November 19, 2017

प्रेरकः

सोशल मीडिया और 
पाँच के औसतका नियम
 “पाँच के औसतके नियम को सोशल मीडिया पर लागू कीजिए.
प्रसिद्ध अमेरिकी लेखक और उद्योगपति जिम रोन ने कहा थाः
तुम उन पाँच व्यक्तियों का औसत हो जिनके साथ तुम सबसे ज्यादा वक्त गुजारते हो.
अब खुद से पूछिए: मैं सोशल मीडिया पर किन व्यक्तियों के कंटेंट को सबसे ज्यादा पढ़ता और देखता हूं?”
ज्यादातर लोग कहेंगे: मैं तो अपनी फ़ीड में आनेवाले हर किसी व्यक्ति की लिखी और शेयर की गई बातें ही देखता हूं.
सच कहिए, क्या आप वाकई हर किसी व्यक्ति जैसे बनना चाहते हैं या किसी खास व्यक्ति जैसा बनना चाहते हैं?
शायद आप किसी खास व्यक्ति जैसा बनना ही पसंद करेंगे.
सोशल मीडिया पर अच्छा खासा वक्त बिताने पर और रोज़ाना दसियों वीडियो, सैंकड़ों फ़नी इमेज और दुनिया भर की बातें पढ़ते, देखते, लाइक करते, और शेयर करते रहने पर भी हममें से अधिकतर जन अप्रसन्नता का अनुभव करते हैं ; क्योंकि हम इतनी अधिक मात्रा में सतही सामग्री से गुजरते हैं जो हमारी जानकारी नहीं बढ़ाती, हमें हमारे लक्ष्यों तक पहुंचने की प्रेरणा नहीं देती, हमें जीवन को सही दिशा देने के लिए राह नहीं सुझाती.
यदि आप दूसरों से बेहतर बनना चाहते हों तो यह तय कर लें कि आप सोशल मीडिया पर या अपने फ़्रेंड सर्किल में से सबसे अच्छे और सबसे प्रतिभावान पाँच व्यक्तियों का चुनाव करेंगे और उन्हें छोड़कर बाकी लोगों को अनफॉलो कर देंगे. आप चाहें तो अपने परिवार के सदस्यों, कलीग्स और मेंटर्स को भी अपनी लिस्ट में रख सकते हैं.
लोगों को अनफॉलो करने के इस काम में यदि पूरा दिन भी लग जाए तो यह आपके हित में होगा.
यह काम हर सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म के साथ करें- फोसबुक, ट्विटर, गूगल प्लस, वॉट्सअप
मैं जानता हूँ कि आप क्या सोच रहे हैं
आपको लग रहा होगा कि यह काम करने पर आपको मित्र आपसे दूर हो जाएँगे, नाराज़ हो जाएँगे.
सच कहूँ तो आपको उनकी नाराज़गी की परवाह नहीं करनी चाहिए. सुबह से लेकर देर रात तक अपने फोन की स्क्रीन पर फेसबुक को स्क्रोल करते रहनेवाले सोशल मीडिया दोस्तों को उनकी दुनिया में व्यस्त रहने दीजिए. यदि आप उनके कंटेंट को लाइक, शेयर या कमेंट करेंगे तो उन्हें बल मिलेगा. उन्हें इस बात की अनुमति न दें कि वे दिन भर आपका ध्यान लक्ष्य से भटकाते रहें.
आप जिन व्यक्तियों की तरह बनना चाहते हैं उनके जैसा बनने का एक ही उपाय है. इसपर ध्यान दें कि वे क्या पढ़ते और शेयर करते हैं. उनके सीखने और सोचने की प्रक्रिया और किसी भी बात पर प्रतिक्रिया देने की उनकी प्रवृत्ति का अवलोकन करें. यह जानने का प्रयास करें कि वे किस तरह से ग्रो करते हैं.
इसे छोड़कर सोशल मीडिया पर जो कुछ भी है वह आपकी प्रगति की राह में बाधक है.
यह बहुत शानदार लाइफ़-हैक है जो आपके जीवन को नया आयाम और आपको सोच को विस्तार दे सकता है. आपको सोशल मीडिया पर बस पांच सर्वश्रेष्ठ व्यक्तियों का चुनाव करना हैजिनकी तरह आप बनना चाहते हैंजिन्हें आप रोल मॉडल मानते हैंऔर बाकी सबको अनफॉलो कर देना है.
ये काम आज से ही शुरू कर दीजिए. आपका समय शुरु होता हैअब !

मुझपर भरोसा रखें. आप निराश नहीं होंगे. (हिन्दी ज़ेन से)

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लेखकों से अनुरोध...

उदंती.com एक सामाजिक- सांस्कृतिक वेब पत्रिका है। पत्रिका में सम- सामयिक मुद्दों के साथ पर्यावरण को बचाने तथा पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए उठाए जाने वाले कदमों को प्राथमिकता से प्रकाशित किया जाता है। समाजिक जन जागरण के विभिन्न मुद्दों को शामिल करने के साथ ऐतिहासिक सांस्कृतिक धरोहर से जुड़े लेखों और साहित्य की विभिन्न विधाओं जैसे कहानी, कविता, गीत, गजल, व्यंग्य, निबंध, लघुकथाएं और संस्मरण आदि का भी समावेश किया गया है। उपर्युक्त सभी विषयों पर मौलिक अप्रकाशित रचनाओं का स्वागत है। आप अपनी रचनाएँ Email-udanti.com@gmail.comपर प्रेषित करें।

माटी समाज सेवी संस्था का अभिनव प्रयास
एक बच्चे की जिम्मेदारी आप भी लें...
माटी समाज सेवी संस्था, समाज के विभिन्न जागरुकता अभियान के क्षेत्र में काम करती रही है। पिछले वर्षों में संस्था ने समाज से जुड़े विभिन्न विषयों जैसे शिक्षा, स्वास्थ्य,पर्यावरण, प्रदूषण आदि क्षेत्रों में काम करते हुए जागरुकता लाने का प्रयास किया है। इसी कड़ी में गत कई वर्षों से यह संस्था बस्तर के जरुरतमंद बच्चों की शिक्षा के लिए धन एकत्रित करने का अभिनव प्रयास कर रही है।
बस्तर कोण्डागाँव जिले के कुम्हारपारा ग्राम में बरसों से कारीगर आदिवासियों के बीच काम रही “साथी समाज सेवी संस्था” द्वारा संचालित स्कूल “साथी राऊंड टेबल गुरूकुल” में ऐसे आदिवासी बच्चों को शिक्षा दी जाती है जिनके माता-पिता उन्हें पढ़ाने में असमर्थ होते हैं। प्रति वर्ष एक बच्चे की शिक्षा में लगभग चार हजार रुपए तक खर्च आता है। शिक्षा सबको मिले इस विचार से सहमत अनेक लोग पिछले कई सालों से माटी संस्था के माध्यम से “साथी राऊंड टेबल गुरूकुल” के बच्चों की शिक्षा की जिम्मेदारी लेते आ रहे हैं। पिछले कई वर्षों से माटी समाज सेवी संस्था उक्त स्कूल के लगभग 15 से 20 बच्चों के लिए शिक्षा शुल्क एकत्रित कर रही है। अनुदान देने वालों में शामिल हैं- प्रियंका-गगन सयाल, लंदन मैनचेस्टर, डॉ. प्रतिमा-अशोक चंद्राकर रायपुर, तरुण खिचरिया, दुर्ग (पत्नी श्रीमती कुमुदिनी खिचरिया की स्मृति में), श्री राजेश चंद्रवंशी (पिता श्री अनुज चंद्रवंशी की स्मृति में), क्षितिज चंद्रवंशी (पिता श्री राकेश चंद्रवंशी की स्मृति में)। अरुणा-नरेन्द्र तिवारी रायपुर, पी. एस. राठौर- अहमदाबाद। इस मुहिम में नए युवा सदस्य जुड़ें हैं- आयुश चंद्रवंशी रायपुर, जिन्होंने अपने पहले वेतन से एक बच्चे की शिक्षा की जिम्मेदारी उठायी है, जो स्वागतेय पहल है। इस प्रयास में यदि आप भी शामिल होना चाहते हैं तो आपका तहे दिल से स्वागत है। आपके इस अल्प सहयोग से एक बच्चा शिक्षित होकर राष्ट्र की मुख्य धारा में शामिल तो होगा ही साथ ही देश के विकास में भागीदार भी बनेगा। तो आइए देश को शिक्षित बनाने में एक कदम हम भी बढ़ाएँ। सम्पर्क- माटी समाज सेवी संस्था, पंडरी, रायपुर (छग) 492 004, मोबा.94255 24044, Email- drvermar@gmail.com

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