November 19, 2017

जीवन दर्शनः

 इंद्र धनुष 
-विजय जोशी
हम सबने प्रकृति की अनुपम देन इंद्र धनुष को देखा है। अपनी सतरंगी छटा बिखेरते हुए जब वह आकाश में उभरता है तो हम सबके अंदर का मन मयूर नाच उठता है। इसमें हर रंग का न केवल समायोजन है बल्कि उसके पीछे एक संदेश भी है ।
पहला रंग लाल: गुलाब के फूल या खून के रंग के अनुरूप यह रंग शृंगार, प्रेम, रोमांस व जोश का प्रतीक है। गुलाब की सुंदरता व सुंगध तन, मन दोनों को खुशी से सराबोर कर देती है।
दूसरा रंग नारंगी: फलों, शरद ऋतु एवं सूर्यास्त को दर्शाने वाला यह रंग जीवन में शांति का संदेश देता है।
तीसरा रंग पीला: सूर्य की चमक, सुर्ख, सूरजमुखी जैसे फूलों की आभा से युक्त यह रंग मूलतः प्रसन्नता का संदेश स्वयं में समायोजित करते हुए हमें जीवन में खुशी का संदेश प्रदान करता है।
चौथा रंग हरा:  धरती पर हर ओर नर्म दूब की आभा लिये, पेड़ों, मैदानों, वनों हर ओर अपनी प्राकृतिक छटा वाला यह रंग इंसान को कुदरत के योगदान का संदेश प्रदान करता है।
पाँचवाँ रंग नीला:  विस्तृत आकाश पर एक सिरे से दूसरे सिरे तक दृश्यमान यह रंग हमें जीवन में पटल या कैनवास को बड़ा करते हुए उस पर अच्छे व परहितकारी कार्य की कूँची से पावन संदेश लिखकर उसे सार्थक करने का प्रयोजन बनता है।
छठा रंग नीलवर्णी (इंडिगो): रात का साथ निभाता यह रंग सुखद सपनों के सुख का अहसास देते हुए हमें अपने तथा दूसरों के साथ उसी अहसास को बाँटने का प्रयोजन करता है।
सातवाँ रंग बैंगनी: शांति और समृद्धि से सुसज्जित यह रंग समुद्र की गहराई का सूचक है जो हमें  जीवन में न केवल गहराई का महत्व समझाता है अपितु हमारे चरित्र को भी गहन गंभीर बनाने की प्रेरणा का वाहक बनता है।
      यह तय है कि जीवन तो एक सतरंगी इंद्रधनुष है पर याद रखिए- जब तक आप अपने व्यक्तित्व में अच्छाइयों का संग्रहण बादल के स्वरूप करके उसकी बारिश अपनों पर नहीं करेंगे, तब तक न तो जीवन में इंद्रधनुषी छटा बिखरेगी और न वह रंगीन आभा, जो खुद को तथा दूसरों को आनंद दे सकती है। यही है इंद्रधनुष से प्राप्त वह तीन सूत्रीय संदेश पहला अच्छाइयों का संग्रहण, दूसरा अपनों पर उसकी बरसात तथा तीसरा इनसे उपजी इंद्रधनुषी आभा का अपनों के साथ आनंद।

सम्पर्कः 8/ सेक्टर-2, शांति निकेतन (चेतक सेतु के पास) भोपाल- 462023, मो. 09826042641, E-mail- v.joshi415@gmail.com

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माटी समाज सेवी संस्था का अभिनव प्रयास
एक बच्चे की जिम्मेदारी आप भी लें...
माटी समाज सेवी संस्था, समाज के विभिन्न जागरुकता अभियान के क्षेत्र में काम करती रही है। पिछले वर्षों में संस्था ने समाज से जुड़े विभिन्न विषयों जैसे शिक्षा, स्वास्थ्य,पर्यावरण, प्रदूषण आदि क्षेत्रों में काम करते हुए जागरुकता लाने का प्रयास किया है। इसी कड़ी में गत कई वर्षों से यह संस्था बस्तर के जरुरतमंद बच्चों की शिक्षा के लिए धन एकत्रित करने का अभिनव प्रयास कर रही है।
बस्तर कोण्डागाँव जिले के कुम्हारपारा ग्राम में बरसों से कारीगर आदिवासियों के बीच काम रही “साथी समाज सेवी संस्था” द्वारा संचालित स्कूल “साथी राऊंड टेबल गुरूकुल” में ऐसे आदिवासी बच्चों को शिक्षा दी जाती है जिनके माता-पिता उन्हें पढ़ाने में असमर्थ होते हैं। प्रति वर्ष एक बच्चे की शिक्षा में लगभग चार हजार रुपए तक खर्च आता है। शिक्षा सबको मिले इस विचार से सहमत अनेक लोग पिछले कई सालों से माटी संस्था के माध्यम से “साथी राऊंड टेबल गुरूकुल” के बच्चों की शिक्षा की जिम्मेदारी लेते आ रहे हैं। पिछले कई वर्षों से माटी समाज सेवी संस्था उक्त स्कूल के लगभग 15 से 20 बच्चों के लिए शिक्षा शुल्क एकत्रित कर रही है। अनुदान देने वालों में शामिल हैं- प्रियंका-गगन सयाल, लंदन मैनचेस्टर, डॉ. प्रतिमा-अशोक चंद्राकर रायपुर, तरुण खिचरिया, दुर्ग (पत्नी श्रीमती कुमुदिनी खिचरिया की स्मृति में), श्री राजेश चंद्रवंशी (पिता श्री अनुज चंद्रवंशी की स्मृति में), क्षितिज चंद्रवंशी (पिता श्री राकेश चंद्रवंशी की स्मृति में)। अरुणा-नरेन्द्र तिवारी रायपुर, पी. एस. राठौर- अहमदाबाद। इस मुहिम में नए युवा सदस्य जुड़ें हैं- आयुश चंद्रवंशी रायपुर, जिन्होंने अपने पहले वेतन से एक बच्चे की शिक्षा की जिम्मेदारी उठायी है, जो स्वागतेय पहल है। इस प्रयास में यदि आप भी शामिल होना चाहते हैं तो आपका तहे दिल से स्वागत है। आपके इस अल्प सहयोग से एक बच्चा शिक्षित होकर राष्ट्र की मुख्य धारा में शामिल तो होगा ही साथ ही देश के विकास में भागीदार भी बनेगा। तो आइए देश को शिक्षित बनाने में एक कदम हम भी बढ़ाएँ। सम्पर्क- माटी समाज सेवी संस्था, पंडरी, रायपुर (छग) 492 004, मोबा.94255 24044, Email- drvermar@gmail.com

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