September 15, 2017

हास्य व्यंग्य

बॉस का गधा
-सुमित प्रताप सिंह, नई दिल्ली
मेरा बॉस अक्सर मुझे गधा कहता है। वैसे तो कहावत है बॉस इका ऑलवेज राइट और मैं इस कहावत को पूरे दिलो-दिमाग से स्वीकार भी करता हूँ पर वो कहते हैं न कभी-कभी कहावत भी गलत साबित हो सकती है और ये कहावत तब बिल्कुल गलत साबित होती है जब मेरा बॉस मुझे गधा कहता है। हालाँकि मैं पूरे दिन बॉस की खातिर इतनी बुरी तरह लगा, खपा और जुटा रहता हूँ कि मेरी इस कड़ी मेहनत को देखकर गधा भी मुझे पूरी इज्जत के साथ सलाम ठोंकने के लिए विवश हो जाए पर मुझे किसी के सलाम की कोई चाहत नहीं है, क्योंकि मैं मेहनती इंसान हूँ और अपनी रोजी-रोटी कमाने के लिए पूरा दिन जी-तोड़ मेहनत करता हूँ। मेरी मेहनत का केंद्र बिंदु सिर्फ और सिर्फ मेरा बॉस होता है। उसकी हर ऐरी-गैरी, उल्टी-सीधी, छोटी-बड़ी और टुच्ची से टुच्ची बात मानना मेरी ड्यूटी है या यूँ कहें कि मेरी मजबूरी है। लोग मजबूरी का नाम पता नहीं किसे-किसे कहते हैं पर मुझे लगता है कि मजबूरी का नाम सिर्फ और सिर्फ मैं ही हूँ। मेरी मजबूरी है अपने बॉस का हुक्म बजाते रहना और उसके इशारों पर हरदम नाचते रहना। वैसे तो मैं सरकारी सेवक हूँ और सरकार के माध्यम से जनता की नौकरी करने के लिए ही भर्ती हुआ हूँ, लेकिन जबसे मैं बड़े सरकारी सेवक यानी कि अपने बॉस के शिकंजे में आया हूँ तबसे मैं उसे ही जनता और जनता की चुनी हुई सरकार मानकर उसकी जी-हुजूरी करने में ही अपना कीमती वक्त बर्बाद कर रहा हूँ। जैसे बॉस मुझे गधा कहता है वैसे ही पूरा दफ्तर उसे गधा कहता है। मतलब कि वो मुझ अकेले को गधा कहता है और दफ्तर के सभी कर्मचारी उस अकेले को गधा कहते हैं। अब लोकतांत्रिक प्रणाली में जिसको अधिक मत मिलते हैं जीतता तो वही है। सो उसके एक मत के मुकाबले दफ्तर के सैकड़ों मत उसका गधा होना सिद्ध करते हैं। शायद इस बात को जानते हुए भी वो इसे स्वीकार नहीं करना चाहता और जब भी मौका मिलता है वो मुझे गधा बोल देता है। कभी-कभी
मेरा जी करता है उस गधे बॉस की गर्दन को किसी मजबूत रस्सी से जकड़कर  उसे उसी की कुर्सी के पाए से जाकर बाँध दूँ और उसके एक जोरदार दुलत्ती मारूँ ; लेकिन फिर मेरा दिमाग ऐसे गधेपन की इजाजत नहीं देता और मैं शांत मुद्रा में बैठकर विचार करता हूँ कि उस गधे को दुरुस्त करने के लिए कुछ न कुछ तो उपाय तो करना ही पड़ेगा लेकिन उसे सुधारने का उसके गले में रस्सी बांधके दुलत्ती जडऩे से बेहतर कोई और उपाय सूझता ही नहीं। फिर मेरे भोले से मस्तिष्क में ये यक्ष प्रश्न कौंधता है कि उस गधे के गले में रस्सी आखिर बाँधे तो बाँधे कौन? और मैं एकदम से उदास हो अपने बॉस को उसके कमरे के दरवाजे में बने गुप्त छेद से बाहर खड़े होकर चुपके-चुपके देखता हूँ और जोर से सांस भीतर खींचकर उसे धीमे -धीमे बाहर छोड़ते हुए बिल्कुल धीमी आवाज में बहुत ही गुस्से में बोलता हूँ 'गधा कहीं का!

0 Comments:

लेखकों से... उदंती.com एक सामाजिक- सांस्कृतिक वेब पत्रिका है। पत्रिका में सम- सामयिक लेखों के साथ पर्यावरण, पर्यटन, लोक संस्कृति, ऐतिहासिक- सांस्कृतिक धरोहर से जुड़े लेखों और साहित्य की विभिन्न विधाओं जैसे कहानी, व्यंग्य, लघुकथाएँ, कविता, गीत, ग़ज़ल, यात्रा, संस्मरण आदि का भी समावेश किया गया है। आपकी मौलिक, अप्रकाशित रचनाओं का स्वागत है। रचनाएँ कृपया Email-udanti.com@gmail.com पर प्रेषित करें।
माटी समाज सेवी संस्था का अभिनव प्रयास माटी समाज सेवी संस्था, समाज के विभिन्न जागरुकता अभियान के क्षेत्र में काम करती है। पिछले वर्षों में संस्था ने समाज से जुड़े विभिन्न विषयों जैसे शिक्षा, स्वास्थ्य,पर्यावरण, प्रदूषण आदि क्षेत्रों में काम करते हुए जागरुकता लाने का प्रयास किया है। माटी संस्था कई वर्षों से बस्तर के जरुरतमंद बच्चों की शिक्षा के लिए धन एकत्रित करने का अभिनव प्रयास कर रही है। बस्तर कोण्डागाँव जिले के कुम्हारपारा ग्राम में “साथी समाज सेवी संस्था” द्वारा संचालित स्कूल “साथी राऊंड टेबल गुरूकुल” में ऐसे आदिवासी बच्चों को शिक्षा दी जाती है जिनके माता-पिता उन्हें पढ़ाने में असमर्थ होते हैं। प्रति वर्ष एक बच्चे की शिक्षा में लगभग चार हजार रुपए तक खर्च आता है। शिक्षा सबको मिले इस विचार से सहमत अनेक लोग पिछले कई सालों से उक्त गुरूकुल के बच्चों की शिक्षा की जिम्मेदारी लेते आ रहे हैं। अनुदान देने वालों में शामिल हैं- अनुदान देने वालों में शामिल हैं- प्रियंका-गगन सयाल, मेनचेस्टर (U.K.), डॉ. प्रतिमा-अशोक चंद्राकर, रायपुर, सुमन-शिवकुमार परगनिहा, रायपुर, अरुणा-नरेन्द्र तिवारी, रायपुर, राजेश चंद्रवंशी, रायपुर (पिता श्री अनुज चंद्रवंशी की स्मृति में), क्षितिज चंद्रवंशी, बैंगलोर (पिता श्री राकेश चंद्रवंशी की स्मृति में)। इस प्रयास में यदि आप भी शामिल होना चाहते हैं तो आपका स्वागत है। आपके इस अल्प सहयोग से स्कूल जाने में असमर्थ बच्चे शिक्षित होकर राष्ट्र की मुख्य धारा में शामिल तो होंगे ही साथ ही देश के विकास में भागीदार भी बनेंगे। तो आइए देश को शिक्षित बनाने में एक कदम हम भी बढ़ाएँ। सम्पर्क- माटी समाज सेवी संस्था, रायपुर (छ.ग.) मोबा. 94255 24044, Email- drvermar@gmail.com

उदंती.com तकनीकि सहयोग - संजीव तिवारी

टैम्‍पलैट - आशीष