September 15, 2017

प्रदूषण

मूर्ति विजर्सन में 
रसायन विज्ञान का
उपयोग 

- नवनीत कुमार गुप्ता
राष्ट्रीय हरित प्राधिकरण यानी एनजीटी ने प्लास्टर ऑॅफ पेरिस (पीओपी) प्रतिमाओं पर प्रतिबंध लगाने का सुझाव दिया है, और देश के कई हिस्सों में इस पर प्रतिबंध भी है। इसके बावजूद इसका व्यापक उपयोग चिंता का विषय है। इसलिए हमें इससे निपटने के वैकल्पिक तरीकों का विकास करना होगा।
नागपुर स्थित राष्ट्रीय पर्यावरण अभियांत्रिकी अनुसंधान संस्थान (नीरी) ने पीओपी मूर्तियों के विसर्जन में अमोनियम बायकार्बोनेट नामक एक पदार्थ को उपयोगी पाया है। अमोनियम बायकार्बोनेट के उपयोग से प्लास्टर  फ पेरिस बहुत कम समय में विघटित हो जाता है।
अमोनियम बायकार्बोनेट प्लास्टर  फ पेरिस के साथ अभिक्रिया करके कैल्शियम कार्बोनेट और अमोनियम सल्फेट में विघटित हो जाता है। सबसे खास बात यह है कि विघटन के बाद बचे पदार्थों को दोबारा उपयोग किया जा सकता है। अमोनियम सल्फेट एक जाना-माना उर्वरक है जिसका उपयोग खेतों में किया जाता है। इस प्रकार प्लास्टर  फ पेरिस के विघटन से प्राप्त अमोनियम सल्फेट का उपयोग खेतों में हो सकेगा।
विघटन के बाद अमोनियम सल्फेट जल की उपरी पर्त में तैरने लगता है। इसका उपयोग मिट्टी की क्षारीयता को कम करने के लिए भी किया जाता है। प्लास्टर  फ पेरिस के विघटन से प्राप्त दूसरा पदार्थ कैल्शियम कार्बोनेट नीचे तली में बैठ जाता है जिसका उपयोग सीमेंट उद्योग में दोबारा से किया जा सकता है।
नीरी ने इस वर्ष गणेश पूजा के दौरान प्रतिमाओं के विसर्जन के लिए तीन टंकियाँ बनाई हैं जिनमें से दो में इस तकनीक के उपयोग की तैयारी की जा रही है। इसके परिणामस्वरूप जो प्रतिमाएँ गलने में बहुत दिनों का समय लेती थीं वे जल्द गल जाएँगी और उनके गलने पर जो पदार्थ शेष बचेंगे उसमें से अधिकतर का उपयोग दोबारा से किया जा सकेगा। इस प्रकार इस तकनीक के उपयोग से जहाँ जल प्रदूषित होने से बचेगा, वहीं विभिन्न पदार्थों को दोबारा से उपयोग किया जा सकेगा। इस प्रकार यह तकनीक पर्यावरण संरक्षण की दृष्टि से महत्त्वपूर्ण साबित होगी।
नीरी द्वारा इस वर्ष प्रयोगात्मक आधार पर इस पद्धति का उपयोग किया जाएगा। जब प्लास्टर  फ पेरिस से बनी मूर्तियों को पानी में छोड़ दिया जाता है तो इसके गलने से मुक्त होने वाली अनेक भारी धातुएँ पानी में पहुँचती हैं जो जलीय जीवन के लिए हानिकारक होती हैं। इसके अलावा, पानी में घुलित ऑॅक्सीजन के स्तर में कमी आती है और जलीय जीव प्रभावित होते हैं। पिछले साल हैदराबाद और उसके आसपास के क्षेत्रों में ही करीबन एक लाख से अधिक गणेश मंडल दर्ज किए गए थे। इन सभी मंडलों की मूर्तियाँ आसपास की 141 झीलों में विसर्जित की गईं थी। औसतन प्रत्येक झील में 500 मूर्तियाँ विसर्जित हुई होंगी। इतनी बड़ी संख्या में मूर्तियों के विसर्जन के कारण जल स्रोत भी प्रदूषित हुए।
आजकल इको- फ्रेंडली तरीके से त्यौहार मनाने पर ज़ोर दिया जा रहा है। ऐसे में हम सभी को पर्यावरण संरक्षण की दृष्टि से ऐसे ही तरीके अपनाने चाहिए जो प्रदूषण को कम करते हों। (स्रोत फीचर्स)

0 Comments:

लेखकों से अनुरोध...

उदंती.com एक सामाजिक- सांस्कृतिक वेब पत्रिका है। पत्रिका में सम- सामयिक मुद्दों के साथ पर्यावरण को बचाने तथा पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए उठाए जाने वाले कदमों को प्राथमिकता से प्रकाशित किया जाता है। समाजिक जन जागरण के विभिन्न मुद्दों को शामिल करने के साथ ऐतिहासिक सांस्कृतिक धरोहर से जुड़े लेखों और साहित्य की विभिन्न विधाओं जैसे कहानी, कविता, गीत, गजल, व्यंग्य, निबंध, लघुकथाएं और संस्मरण आदि का भी समावेश किया गया है। उपर्युक्त सभी विषयों पर मौलिक अप्रकाशित रचनाओं का स्वागत है। आप अपनी रचनाएँ Email-udanti.com@gmail.comपर प्रेषित करें।

माटी समाज सेवी संस्था का अभिनव प्रयास
एक बच्चे की जिम्मेदारी आप भी लें...
माटी समाज सेवी संस्था, समाज के विभिन्न जागरुकता अभियान के क्षेत्र में काम करती रही है। पिछले वर्षों में संस्था ने समाज से जुड़े विभिन्न विषयों जैसे शिक्षा, स्वास्थ्य,पर्यावरण, प्रदूषण आदि क्षेत्रों में काम करते हुए जागरुकता लाने का प्रयास किया है। इसी कड़ी में गत कई वर्षों से यह संस्था बस्तर के जरुरतमंद बच्चों की शिक्षा के लिए धन एकत्रित करने का अभिनव प्रयास कर रही है।
बस्तर कोण्डागाँव जिले के कुम्हारपारा ग्राम में बरसों से कारीगर आदिवासियों के बीच काम रही “साथी समाज सेवी संस्था” द्वारा संचालित स्कूल “साथी राऊंड टेबल गुरूकुल” में ऐसे आदिवासी बच्चों को शिक्षा दी जाती है जिनके माता-पिता उन्हें पढ़ाने में असमर्थ होते हैं। प्रति वर्ष एक बच्चे की शिक्षा में लगभग चार हजार रुपए तक खर्च आता है। शिक्षा सबको मिले इस विचार से सहमत अनेक लोग पिछले कई सालों से माटी संस्था के माध्यम से “साथी राऊंड टेबल गुरूकुल” के बच्चों की शिक्षा की जिम्मेदारी लेते आ रहे हैं। पिछले कई वर्षों से माटी समाज सेवी संस्था उक्त स्कूल के लगभग 15 से 20 बच्चों के लिए शिक्षा शुल्क एकत्रित कर रही है। अनुदान देने वालों में शामिल हैं- प्रियंका-गगन सयाल, लंदन मैनचेस्टर, डॉ. प्रतिमा-अशोक चंद्राकर रायपुर, तरुण खिचरिया, दुर्ग (पत्नी श्रीमती कुमुदिनी खिचरिया की स्मृति में), श्री राजेश चंद्रवंशी (पिता श्री अनुज चंद्रवंशी की स्मृति में), क्षितिज चंद्रवंशी (पिता श्री राकेश चंद्रवंशी की स्मृति में)। अरुणा-नरेन्द्र तिवारी रायपुर, पी. एस. राठौर- अहमदाबाद। इस मुहिम में नए युवा सदस्य जुड़ें हैं- आयुश चंद्रवंशी रायपुर, जिन्होंने अपने पहले वेतन से एक बच्चे की शिक्षा की जिम्मेदारी उठायी है, जो स्वागतेय पहल है। इस प्रयास में यदि आप भी शामिल होना चाहते हैं तो आपका तहे दिल से स्वागत है। आपके इस अल्प सहयोग से एक बच्चा शिक्षित होकर राष्ट्र की मुख्य धारा में शामिल तो होगा ही साथ ही देश के विकास में भागीदार भी बनेगा। तो आइए देश को शिक्षित बनाने में एक कदम हम भी बढ़ाएँ। सम्पर्क- माटी समाज सेवी संस्था, पंडरी, रायपुर (छग) 492 004, मोबा.94255 24044, Email- drvermar@gmail.com

उदंती.com तकनीकि सहयोग - संजीव तिवारी

टैम्‍पलैट - आशीष