July 25, 2017

बारिश में:


मन करता है...
- डॉ. रत्ना वर्मा
1. बारिश ने दे दी दस्तक
मन करता है
मैं भी उड़कर
परियों के देस चलूँ।
खुले आसमान में
अठखेलियाँ करते
काले घने बादलों के बीच
छुपा- छिपी खेलते
पुकारूँ वर्षा की बूंदों को।
और
वो देखो छम- छम करते
बारिश ने दे दी दस्तक।
नीचे देखो धरती ने ओढ़ ली
हरी चुनरिया
कोयल कूकी, मोर नाचा
चहूँ ओर खिल गए फूल। 

2. कागज़ की वो नाव

बारिश की बूँदें
याद दिला जाते हैं
बचपन की,
छई छपा और
कागज़ की नाव बनाते
वे मस्ती भरे दिन,
पर आज 
कहाँ खेलें बचपन का वो खेल,
बारिश का पानी
अब बह जाता है नालियों में
सड़कों के गड्ढों में
अब भरा है गंदा पानी।
फिर भी
मन तो करता है,
फिर से बनाऊँ कागज़ की वो नाव
जो दूर तक बहती जाए
बारिश की बौछारों संग
मेरे मन के बहाव की तरह।

3. गुनगुनाऊँ एक नया गीत

पंखों को फडफ़ड़ाकर
वर्षा की बूँदों को झटकती 
बारिश में भीगती 
नन्हीं चिरैया को देख,
मन करता है मेरा भी
उड़ जाऊँ परियों के देस
माँग लूँ मैं पंख अपने लिए
और भीगूँ
मैं भी चिरैया के संग
पेड़-पेड़, डाली-डाली
इतराऊँ बादलों के बीच
गुनगुनाऊँ एक नया गीत। 

4. हथेलियों की बूँदों को

बादलों ने बरसकर दे दिया है
कालिदास का संदेश
मेरा भी मन करता है
खिड़की से आती,
वर्षा की इन बूंदों को
हथेलियों में भर लूँ
और कह दूँ बादलों से,
जा मेरी हथेलियों की
इन बूँदों को
चहूँ ओर बरसा जा
भिगो दे उनका भी मन
जिन्हें इंतजार है
उन मेघों के बरसने का
जिसे भेजा है कालिदास ने।
डॉ. सुनीता वर्मा के चित्रों के साथ...
कविता के साथ प्रस्तुत ये सभी चित्र डॉ. सुनीता वर्मा ने बनाए हैं। उनके चित्र ऐसे हैं कि चित्रों के साथ हमारा मन भी कल्पना की उड़ान भरने लग जाता है और कविता अपने आप फूट पड़ती हैं। 
- एक नए विषय को लेकर बनाए उनके ये चित्र मानव मन का एक अलग ही पहलू हमारे सामने प्रस्तुत करते हैं- 
सुनीता ने परियों का चित्रण प्रतीक के रूप में किया है जो अपनी इच्छाओं को अपने पंखों में समेटे हुए है। पंखों के भीतर का चित्रण मन की इच्छाओं का प्रतीकात्मक वर्णन हैजो इस जीवन में फलित होना चाहती है। इनमें से कुछ पूरी हुईं तथा कुछ ख्वाहिशें अभी बाकी हैं।
- चित्रों में प्रयुक्त चटक रंग उन निर्दोष क्षणों की साक्षी हैंजिन पर अभी धूल नहीं चढ़ी है।
- यह सच है हर सृजन में सृजक का अक्स झलकता है। विषय वस्तु मेंविवरण में विचारों की गहराई और विस्तार का पता मिलता है। प्रस्तुतीकरण में तकनीक और स्किल की परिपक्वता को समझा जा सकता है। सुनीता के अनुसार कोई भी सृजन सृजक का आईना होता है। sunitaverma1511@gmail.com, मो. 9406422222.

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एक बच्चे की जिम्मेदारी आप भी लें

अभिनव प्रयास- माटी समाज सेवी संस्था, जागरुकता अभियान के क्षेत्र में काम करती रही है। इसी कड़ी में गत कई वर्षों से यह संस्था बस्तर के जरुरतमंद बच्चों की शिक्षा के लिए धन एकत्रित करने का अभिनव प्रयास कर रही है। बस्तर कोण्डागाँव जिले के कुम्हारपारा ग्राम में बरसों से आदिवासियों के बीच काम रही 'साथी समाज सेवी संस्था' द्वारा संचालित स्कूल 'साथी राऊंड टेबल गुरूकुल' में ऐसे आदिवासी बच्चों को शिक्षा दी जाती है जिनके माता-पिता उन्हें पढ़ाने में असमर्थ होते हैं। इस स्कूल में पढऩे वाले बच्चों को आधुनिक तकनीकी शिक्षा के साथ-साथ परंपरागत कारीगरी की नि:शुल्क शिक्षा भी दी जाती है। प्रति वर्ष एक बच्चे की शिक्षा में लगभग चार हजार रुपये तक खर्च आता है। शिक्षा सबको मिले इस विचार से सहमत अनेक जागरुक सदस्य पिछले कई सालों से माटी समाज सेवी संस्था के माध्यम से 'साथी राऊंड टेबल गुरूकुल' के बच्चों की शिक्षा की जिम्मेदारी लेते आ रहे हैं। प्रसन्नता की बात है कि नये साल से एक और सदस्य हमारे परिवार में शामिल हो गए हैं- रामेश्वर काम्बोज 'हिमांशु' नई दिल्ली, नोएडा से। पिछले कई वर्षों से अनुदान देने वाले अन्य सदस्यों के नाम हैं- प्रियंका-गगन सयाल, मेनचेस्टर (यू.के.), डॉ. प्रतिमा-अशोक चंद्राकर रायपुर, सुमन-शिवकुमार परगनिहा, रायपुर, अरुणा-नरेन्द्र तिवारी रायपुर, डॉ. रत्ना वर्मा रायपुर, राजेश चंद्रवंशी, रायपुर (पिता श्री अनुज चंद्रवंशी की स्मृति में), क्षितिज चंद्रवंशी, बैंगलोर (पिता श्री राकेश चंद्रवंशी की स्मृति में)। इस प्रयास में यदि आप भी शामिल होना चाहते हैं तो आपका तहे दिल से स्वागत है। आपके इस अल्प सहयोग से एक बच्चा शिक्षित होकर राष्ट्र की मुख्य धारा में शामिल तो होगा ही साथ ही देश के विकास में भागीदार भी बनेगा। तो आइए देश को शिक्षित बनाने में एक कदम हम भी बढ़ाएँ। सम्पर्क- माटी समाज सेवी संस्था, रायपुर (छ. ग.) 492 004, मोबा. 94255 24044, Email- drvermar@gmail.com

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