July 25, 2017

प्रेरक कथा:

1.समय
एक परमभक्त को ईश्वर ने दर्शन दिए. भक्त ने ईश्वर से पूछा- प्रभु, क्या मैं आपसे एक प्रश्न पूछ सकता हूँ?
ईश्वर ने कहा- अवश्य, जो चाहे पूछो-
भक्त ने कहा- प्रभु, आप तो इस सृष्टि में अनादि-अनंत काल से हैं। ऐसे में 'एक हज़ार सालआपके लिए कितना समय होगा?
ईश्वर ने उत्तर दिया- पुत्र, एक हज़ार साल मेरे लिए पाँच मिनट के बराबर हैं।
भक्त ने पुन: पूछा- यह तो अद्भुत है! तो फिर आपके लिए दस लाख रुपये कितने रुपयों के बराबर हैं?
ईश्वर ने कहा- मेरे लिए दस लाख रुपये पाँच पैसों के बराबर हैं।
यह सुनकर भक्त ने अति उत्साह से पूछा- अच्छा! तो प्रभु क्या आप मुझे पाँच पैसे दे सकते हैं?
ईश्वर ने भक्त की ओर मुस्कुराकर देखा और कहा- क्यों नहीं पुत्र? तुम सिर्फ पाँच मिनट के लिए प्रतीक्षा करो और मैं तुम्हें दे दूँगा।
2.भविष्यवेत्ता

एक बहुत पुरानी यूनानी कहानी सुनाता हूँ आपको। उन दिनों कहीं एक बहुत प्रसिद्ध भविष्यवेत्ता रहता था। एक दिन वह राह चलते कुएँ में गिर गया। हुआ यूँ कि वह रात के दौरान तारों का अवलोकन करते हुए चला जा रहा था। उसे पता न था कि राह में कहीं एक कुँआ है, उसी कुँए में वह गिर गया।
उसके गिरने और चिल्लाने की आवाज़ सुनकर पास ही एक झोपड़ी में रहने वाली बुढ़िया उसकी मदद को वहाँ पहुँच गई और उसे कुँए से निकाला।
जान बची पाकर भविष्यवेत्ता बहुत खुश हुआ। वह बोला- तुम नहीं आतीं तो मैं मारा जाता! तुम्हें पता है मैं कौन हूँ? मैं राज-ज्योतिषी हूँ। हर कोई आदमी मेरी फीस नहीं दे सकता- यहाँ तक कि राजाओं को भी मेरा परामर्श लेने के लिए महीनों तक इंतज़ार करना पड़ता है- लेकिन मैं तुमसे कोई पैसा नहीं लूँगा। तुम कल मेरे घर आओ, मैं मुफ्त में तुम्हारा भविष्य बताऊँगा।
यह सुनकर बुढ़िया बहुत हँसी और बोली- यह सब रहने दो! तुम्हें अपने दो कदम आगे का तो कुछ दिखता नहीं है, मेरा भविष्य तुम क्या बताओगे?
3.तीन बहनें 
एक बहुत बड़ा जादूगर अपनी तीन खूबसूरत बहनों के साथ दुनिया घूम रहा था। ऑस्ट्रेलिया में किसी प्रांत का एक प्रसिद्द योद्धा उसके पास आया और उससे बोला- मैं तुम्हारी सुन्दर  बहनों में से किसी एक से विवाह करना चाहता हूँ।
जादूगर ने उससे कहा- यदि मैं इनमें से एक का विवाह तुमसे कर दूँगा तो बाकी दोनों को लगेगा कि वे कुरूप हैं। मैं ऐसे कबीले की तलाश में हूँ जहाँ तीन वीर योद्धाओं से अपनी तीनों बहनों का एक साथ विवाह कर सकूँ।
इस तरह कई साल तक वे ऑस्ट्रेलिया में यहाँ से वहाँ घूमते रहे पर उन्हें ऐसा कोई कबीला नहीं मिला, जहाँ एक जैसे तीन बहादुर योद्धाओं से उन बहनों का विवाह हो सकता।
वे बहनें इतने साल गुज़र जाने और यात्रा की थकान के कारण बूढ़ी हो गयीं। उन्होंने सोचा- हममें से कोई एक तो विवाह करके सुख से रह सकती थी।
जादूगर भी यही सोचता था। वह बोला- मैं ग़लत था; लेकिन अब बहुत देर हो गयी है।
जादूगर ने उन तीन बहनों को पत्थर का बना दिया।
आज भी सिडनी के पास ब्लूमाउन्टेन नेशनल पार्क जाने वाले पर्यटक पत्थर की उन तीन बहनों को देखकर यह सबक लेते हैं कि एक व्यक्ति की प्रसन्नता के कारण हमें दु:खी नहीं होना चाहिए।
(हिन्दी ज़ेन से)

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लेखकों से अनुरोध...

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माटी समाज सेवी संस्था का अभिनव प्रयास
एक बच्चे की जिम्मेदारी आप भी लें...
माटी समाज सेवी संस्था, समाज के विभिन्न जागरुकता अभियान के क्षेत्र में काम करती रही है। पिछले वर्षों में संस्था ने समाज से जुड़े विभिन्न विषयों जैसे शिक्षा, स्वास्थ्य,पर्यावरण, प्रदूषण आदि क्षेत्रों में काम करते हुए जागरुकता लाने का प्रयास किया है। इसी कड़ी में गत कई वर्षों से यह संस्था बस्तर के जरुरतमंद बच्चों की शिक्षा के लिए धन एकत्रित करने का अभिनव प्रयास कर रही है।
बस्तर कोण्डागाँव जिले के कुम्हारपारा ग्राम में बरसों से कारीगर आदिवासियों के बीच काम रही “साथी समाज सेवी संस्था” द्वारा संचालित स्कूल “साथी राऊंड टेबल गुरूकुल” में ऐसे आदिवासी बच्चों को शिक्षा दी जाती है जिनके माता-पिता उन्हें पढ़ाने में असमर्थ होते हैं। प्रति वर्ष एक बच्चे की शिक्षा में लगभग चार हजार रुपए तक खर्च आता है। शिक्षा सबको मिले इस विचार से सहमत अनेक लोग पिछले कई सालों से माटी संस्था के माध्यम से “साथी राऊंड टेबल गुरूकुल” के बच्चों की शिक्षा की जिम्मेदारी लेते आ रहे हैं। पिछले कई वर्षों से माटी समाज सेवी संस्था उक्त स्कूल के लगभग 15 से 20 बच्चों के लिए शिक्षा शुल्क एकत्रित कर रही है। अनुदान देने वालों में शामिल हैं- प्रियंका-गगन सयाल, लंदन मैनचेस्टर, डॉ. प्रतिमा-अशोक चंद्राकर रायपुर, तरुण खिचरिया, दुर्ग (पत्नी श्रीमती कुमुदिनी खिचरिया की स्मृति में), श्री राजेश चंद्रवंशी (पिता श्री अनुज चंद्रवंशी की स्मृति में), क्षितिज चंद्रवंशी (पिता श्री राकेश चंद्रवंशी की स्मृति में)। अरुणा-नरेन्द्र तिवारी रायपुर, पी. एस. राठौर- अहमदाबाद। इस मुहिम में नए युवा सदस्य जुड़ें हैं- आयुश चंद्रवंशी रायपुर, जिन्होंने अपने पहले वेतन से एक बच्चे की शिक्षा की जिम्मेदारी उठायी है, जो स्वागतेय पहल है। इस प्रयास में यदि आप भी शामिल होना चाहते हैं तो आपका तहे दिल से स्वागत है। आपके इस अल्प सहयोग से एक बच्चा शिक्षित होकर राष्ट्र की मुख्य धारा में शामिल तो होगा ही साथ ही देश के विकास में भागीदार भी बनेगा। तो आइए देश को शिक्षित बनाने में एक कदम हम भी बढ़ाएँ। सम्पर्क- माटी समाज सेवी संस्था, पंडरी, रायपुर (छग) 492 004, मोबा.94255 24044, Email- drvermar@gmail.com

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