March 10, 2017

लघु कथाएँ:

 1. धज्जियाँ
- रश्मि तारिका   

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कमला , कब तक भूखी प्यासी बैठी रहेगी।मेरी बात मान ,ये मेरा बच्चा ले जा और जो बस्ती के स्कूल में सरकार सभी बच्चों को चावल ,दलिया बाँट रही है वो ले आ।"बाढ़ के बाद गाँव में सरकार द्वारा बच्चों के नाम पौष्टिक आहार बाँटने पर रमावती ने भूखी प्यासी कमला को समझाया।
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पागल हो गई है क्या तूँ रमा ? जो तेरी सास ने मुझ बाँझ के साथ तेरे बच्चे को देख लिया , पूरा गाँव सर पर उठा लेगी।न री रहने दे।"निढाल पड़ी कमला ने मना करते हुए कहा।
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देख इस बखत तूँ मेरी सास की सोच। चिंता तो उसे भी हो रही है तेरी पर अब हमारे पास खुद इतना है कि तुझे दे दें।मैं निबट लूँगी अपनी सास से । बस तूँ एक बड़ा सा डिब्बा अपने साथ लेती जा और एक पचास का नोट बाँटने वाले को थमा देना।वो तेरा पूरा डिब्बा भर देगा "
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पर ये पचास रुपये क्यों और वो भला नियम क्यों तोड़ेगा ? " कमला ने बच्चे को गोद में लेते हुए हैरानी से पूछा।
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अरी बावली , तूँ नियम की चिंता कर।हर नियम तोड़ की कोख से ही जन्म लेता है।जल्दी जा अब।"
और कमला बच्चे को गोद में उठाए ,एक हाथ में डोल थामे चल दी तथा कथित नियमों की धज्जियाँ उड़ाने।

2-.
ख़ामोशी

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श्रुति बिटिया, तेरी आंटी को मेरे पास वाले बेड पर शिफ्ट कर दे "सुनकर फ़िज़ियोथेरेपिस्ट डॉ. श्रुति के चेहरे पर मुस्कान गयी ।वो वृद्ध दम्पति अपने घुटनों के इलाज के लिए आते ही रहते थे, पत्नी तो अक्सर माला जपती रहतीं और पति ही हमेशा उसके दर्द के बारे में बताते।
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अंकल , आप चिंता क्यूँ करते हैं।हम आँटी का ख्याल रखते हैं और आपका भी।"
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वो तेरी आँटी है कभी कुछ नहीं कहती, उसका दर्द भी मुझे ही समझना पड़ता है। यही एक मुश्किल है, sआह!" अपनी पत्नी की तरफ प्यार से देखते हुए घुटने में दर्द की एक तेज़ लहर से पति की चीख निकल गई। पत्नी माला साइड में रख कर उनके पास भागती हुई आई, मानो दर्द उसे हुआ हो।
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देखा, बिटिया तुमने ? मेरी हर तकलीफ में ऐसे ही खड़ी हो जाती है लेकिन खुद कभी अपनी तकलीफ का ज़िक्र भी नहीं करती।" दोनों पति-पत्नी की नज़रें मिलीं तो पत्नी की आँखों में चुप रहने की याचना पति तुरंत ही समझ गए, उसके चेहरे पर उदासी गयी।
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काश.. इसकी आवाज़ को मैं पहले दबाता तो आज इसकी आवाज़ सुन पाता, अब जाने इसने कैसी ख़ामोशी इख़्तियार कर ली है।" मस्तिष्क में विचार आते ही अपने आँसू छुपाने के लिए पति ने चेहरा दूसरी तरफ कर लिया।
सम्पर्कः 12 –, टॉवर-बी, रतनांश अपार्टमेण्ट, नीयर धीरज संस, जी डी गोयनका रोड, वेसू , सूरत- 395007,    -मेल- tarikarashmi@yahoo.in

1 Comment:

रश्मि शर्मा said...

बहुत सुन्दर

एक बच्चे की जिम्मेदारी आप भी लें

अभिनव प्रयास- माटी समाज सेवी संस्था, जागरुकता अभियान के क्षेत्र में काम करती रही है। इसी कड़ी में गत कई वर्षों से यह संस्था बस्तर के जरुरतमंद बच्चों की शिक्षा के लिए धन एकत्रित करने का अभिनव प्रयास कर रही है। बस्तर कोण्डागाँव जिले के कुम्हारपारा ग्राम में बरसों से आदिवासियों के बीच काम रही 'साथी समाज सेवी संस्था' द्वारा संचालित स्कूल 'साथी राऊंड टेबल गुरूकुल' में ऐसे आदिवासी बच्चों को शिक्षा दी जाती है जिनके माता-पिता उन्हें पढ़ाने में असमर्थ होते हैं। इस स्कूल में पढऩे वाले बच्चों को आधुनिक तकनीकी शिक्षा के साथ-साथ परंपरागत कारीगरी की नि:शुल्क शिक्षा भी दी जाती है। प्रति वर्ष एक बच्चे की शिक्षा में लगभग चार हजार रुपये तक खर्च आता है। शिक्षा सबको मिले इस विचार से सहमत अनेक जागरुक सदस्य पिछले कई सालों से माटी समाज सेवी संस्था के माध्यम से 'साथी राऊंड टेबल गुरूकुल' के बच्चों की शिक्षा की जिम्मेदारी लेते आ रहे हैं। प्रसन्नता की बात है कि नये साल से एक और सदस्य हमारे परिवार में शामिल हो गए हैं- रामेश्वर काम्बोज 'हिमांशु' नई दिल्ली, नोएडा से। पिछले कई वर्षों से अनुदान देने वाले अन्य सदस्यों के नाम हैं- प्रियंका-गगन सयाल, मेनचेस्टर (यू.के.), डॉ. प्रतिमा-अशोक चंद्राकर रायपुर, सुमन-शिवकुमार परगनिहा, रायपुर, अरुणा-नरेन्द्र तिवारी रायपुर, डॉ. रत्ना वर्मा रायपुर, राजेश चंद्रवंशी, रायपुर (पिता श्री अनुज चंद्रवंशी की स्मृति में), क्षितिज चंद्रवंशी, बैंगलोर (पिता श्री राकेश चंद्रवंशी की स्मृति में)। इस प्रयास में यदि आप भी शामिल होना चाहते हैं तो आपका तहे दिल से स्वागत है। आपके इस अल्प सहयोग से एक बच्चा शिक्षित होकर राष्ट्र की मुख्य धारा में शामिल तो होगा ही साथ ही देश के विकास में भागीदार भी बनेगा। तो आइए देश को शिक्षित बनाने में एक कदम हम भी बढ़ाएँ। सम्पर्क- माटी समाज सेवी संस्था, रायपुर (छ. ग.) 492 004, मोबा. 94255 24044, Email- drvermar@gmail.com

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