September 15, 2017

हिन्दी की स्वर्णकाल

संस्कृत हमारी महारानी है 
हिन्दी बहूरानी
- सत्या शर्मा ' कीर्ति '
गुजरे हुए सालों को हम देखें ,तो आज का दौर  हिन्दी  के स्वर्णकाल का दौर कहा जा सकता है।
हमारी  हिन्दी आज सिर्फ देश की ही भाषा नहीं रही;बल्कि पूरी दुनिया में फैल चुकी है।
एक सर्वे के आधार पर हम गर्व कर सकते हैं कि आज हिन्दी एक ऐसी भाषा है ,जो दुनिया में सर्वाधिक बोली जाती है,जिसकी लोकप्रियता भारत के अलावा तमाम पड़ोसी देशों में है।
 हिन्दी  के लिए सबसे महत्त्वपूर्ण पहलू यह है कि यह बिना किसी सत्ता के सरंक्षण के जनभाषा के रूप में आगे बढ़ रही है।
आज वैश्वीकरण का दौर है,अर्थात्  सीधे - सीधे बाजारबाद । अब हर संस्कृति , हर विचार एक उत्पादन में तब्दील हो बाजार में बिकने को तैयार हैं। जाहिर है बेचने के लिए उस भाषा की जरूरत होती है, जो आम भाषा हो।
आज हिन्दुस्तान बहुत बड़ा बाजार है , अतः  हिन्दी  अपनी पैठ बना रही है ।इसकी लोकप्रियता का अनुमान इस तरह भी लगाया जा सकता है कि आज दुनिया भर के विश्व विद्यालयों में  हिन्दी  पढाई जा रही है।इसके लिए हमारे  हिन्दी  सिनेमा के योगदान को भुलाया नहीं जा सकता ,जो विश्वपटल पर अपनी साख बना रहा है।
इंटरनेट ने भी आज क्रांति -सी ला दी है।  अब अनेक लेखक , पाठक और  हिन्दी  प्रेमी बेहिचक अपनी बातों का आदान-प्रदान कर रहे हैं।
ब्लॉग और वेवसाइट  हिन्दी  की नयी कहानी लिख रहे हैं। आज  हिन्दी  के ग्राहकों की संख्या बढ़ी है अधिकतर लोगों की रोज़ी -रोटी की भाषा बन चुकी है।
मैं तो इतना ही कहूँगी कि मैं  हिन्दी  को माँ जैसा ही प्यार करती हूँ। हिन्दी  में सोचती हूँ ,  हिन्दी  में बात करती हूँ  हिन्दी  में गुनगुनाती हूँ ।
 हिन्दी  पर गर्व करती हूँ।
अंत में  हिन्दी  के साधक और कर्मयोगी कॉमिक बुल्के का कथन- संस्कृत हमारी महारानी है, हिन्दी  बहूरानी
सम्पर्क डी-2, द्वितीय तल, महाराणा अपार्टमेण्ट, पी पी कम्पाउण्ड, राँची-834001( झारखण्ड), मो- 8083986263

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माटी समाज सेवी संस्था का अभिनव प्रयास
एक बच्चे की जिम्मेदारी आप भी लें...
माटी समाज सेवी संस्था, समाज के विभिन्न जागरुकता अभियान के क्षेत्र में काम करती रही है। पिछले वर्षों में संस्था ने समाज से जुड़े विभिन्न विषयों जैसे शिक्षा, स्वास्थ्य,पर्यावरण, प्रदूषण आदि क्षेत्रों में काम करते हुए जागरुकता लाने का प्रयास किया है। इसी कड़ी में गत कई वर्षों से यह संस्था बस्तर के जरुरतमंद बच्चों की शिक्षा के लिए धन एकत्रित करने का अभिनव प्रयास कर रही है।
बस्तर कोण्डागाँव जिले के कुम्हारपारा ग्राम में बरसों से कारीगर आदिवासियों के बीच काम रही “साथी समाज सेवी संस्था” द्वारा संचालित स्कूल “साथी राऊंड टेबल गुरूकुल” में ऐसे आदिवासी बच्चों को शिक्षा दी जाती है जिनके माता-पिता उन्हें पढ़ाने में असमर्थ होते हैं। प्रति वर्ष एक बच्चे की शिक्षा में लगभग चार हजार रुपए तक खर्च आता है। शिक्षा सबको मिले इस विचार से सहमत अनेक लोग पिछले कई सालों से माटी संस्था के माध्यम से “साथी राऊंड टेबल गुरूकुल” के बच्चों की शिक्षा की जिम्मेदारी लेते आ रहे हैं। पिछले कई वर्षों से माटी समाज सेवी संस्था उक्त स्कूल के लगभग 15 से 20 बच्चों के लिए शिक्षा शुल्क एकत्रित कर रही है। अनुदान देने वालों में शामिल हैं- प्रियंका-गगन सयाल, लंदन मैनचेस्टर, डॉ. प्रतिमा-अशोक चंद्राकर रायपुर, तरुण खिचरिया, दुर्ग (पत्नी श्रीमती कुमुदिनी खिचरिया की स्मृति में), श्री राजेश चंद्रवंशी (पिता श्री अनुज चंद्रवंशी की स्मृति में), क्षितिज चंद्रवंशी (पिता श्री राकेश चंद्रवंशी की स्मृति में)। अरुणा-नरेन्द्र तिवारी रायपुर, पी. एस. राठौर- अहमदाबाद। इस मुहिम में नए युवा सदस्य जुड़ें हैं- आयुश चंद्रवंशी रायपुर, जिन्होंने अपने पहले वेतन से एक बच्चे की शिक्षा की जिम्मेदारी उठायी है, जो स्वागतेय पहल है। इस प्रयास में यदि आप भी शामिल होना चाहते हैं तो आपका तहे दिल से स्वागत है। आपके इस अल्प सहयोग से एक बच्चा शिक्षित होकर राष्ट्र की मुख्य धारा में शामिल तो होगा ही साथ ही देश के विकास में भागीदार भी बनेगा। तो आइए देश को शिक्षित बनाने में एक कदम हम भी बढ़ाएँ। सम्पर्क- माटी समाज सेवी संस्था, पंडरी, रायपुर (छग) 492 004, मोबा.94255 24044, Email- drvermar@gmail.com

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