April 20, 2017

जीवन- दर्शन

 हाजिरजवाबी
से हल 
- विजय जोशी  
(पूर्व ग्रुप महाप्रबंधक भेल, भोपाल)
सलीके से पूरित संवाद जीवन में सफलता की कुंजी है। समझदार व्यक्ति मूर्खतापूर्ण सवालों का चतुराईपूर्ण उत्तर देकर प्रश्नकर्ता को निरुत्तर कर देता है। और कई बार तो उपहास का पात्र भी बना देता है। विपरित परिस्थिति में भी सटीक संवाद व्यर्थ के विवाद को न केवल टाल देता है, अपितु समाज में आपकी छवि को निर्विवाद बनाने में सहायक सिद्ध होता है। बुद्धिमान व्यक्ति का सामयिक उत्तर क्रोधपूर्ण वार्तालाप में अप्रिय प्रसंग का प्रवेश बाधित कर देता है।
इस मामले में महात्मा गाँधी का संवाद संप्रेषण सर्वोत्तम था। वे कभी भी मानसिक संतुलन नहीं खोते थे और अपने तर्कपूर्ण उत्तर से सामनेवाले को कई बार झेंपने पर मजबूर कर देते थे।
अंग्रेज गाँधीजी से बहुत चिढ़ते थे। एक बार पीटर नामक एक ऐसे ही सज्जन प्रोफेसर विश्वविद्यालय के रेस्टोरेंट में भोजन कर रहे थे। उसी समय गाँधी भी अपनी ट्रे लेकर उनकी बगल में जा बैठे।
पीटर ने अप्रसन्नतापूर्वक कहा- एक सूअर और पक्षी कभी भी साथ बैठकर खाना नहीं खाते।
महात्मा गाँधी ने कहा- सत्य कहा आपने। पर मैं तो कुछ ही पलों में भोजन करके उड़ जाऊँगा। और यह कहकर वे दूसरी टेबल पर जाकर बैठ गए।
पीटर का चेहरा गुस्से से लाल हो गया और वे तुरंत प्रतिशोध का दूसरा अवसर ढूँढने में व्यस्त हो गए। लेकिन महात्मा वैसे ही पूरी तरह शांत भाव से भोजन करते रहे।
पीटर ने संवाद के धनुष से दूसरा बाण छोड़ा- गाँधी समझो हम सड़क पर पैदल चल रहे हैं और हमें अचानक दो पैकेट राह में पड़े मिल जाते हैं। एक पर लिखा है बुद्धि और दूसरे पर पैसा। आप किसे लेना पसंद करेंगे।
बगैर एक पल गँवाये गाँधीजी का उत्तर था- वह पैकेट जिस पर पैसा लिखा है।
पीटर मुस्कुराकर बोले- अगर मैं आपकी जगह होता तो बुद्धि शब्द से अंकित पैकेट उठाता।
सही कहा आपने- गाँधीजी ने उत्तर दिया- आखिरकर आदमी वही तो उठाएगा जिसकी उसके पास कमी है।
अब तो अति हो गई। प्रोफेसर ने अगली चाल चली और परीक्षा स्थल पर  गाँधीजी को उत्तर पुस्तिका देते समय पहले पन्ने पर इडियट शब्द लिख दिया और मुस्कुराने लगे। गाँधीजी ने शांत भाव से उत्तर पुस्तिका ग्रहण की तथा बैठ गए। कुछ पल बीत जाने पर वे अपनी जगह से उठे और प्रोफेसर से कहा- मिस्टर पीटर आपने मेरी उत्तर पुस्तिका पर अपने आटोग्राफ तो कर दिये लेकिन मुझे ग्रेड देना भूल गए।
बात का सारांश मात्र यही है कि कुतर्की का वैसा ही उत्तर देना न केवल विवाद को बढ़ाता है, अपितु अप्रिय स्थिति भी उत्पन्न कर सकता है। शांतचित्त से बुद्धिमत्तापूर्ण उत्तर न केवल सामने वाले को लज्जित कर सकता है, बल्कि समाज में आपकी प्रतिष्ठा में अभिवृद्धि भी करता है। इसलिए ऐसी स्थिति की उपस्थिति से सामना होने पर व्यर्थ के विवाद से बचते हुए जहाँ तक संभव हो सार्थक एवं समझदारीपूर्ण सामयिक उत्तर देने का यत्न करें। इससे आपकी मानसिक शांति भी बनी रहेगी और समाज में प्रतिष्ठा भी।
सम्पर्क: 8/ सेक्टर-2, शांति निकेतन (चेतक सेतु के पास) भोपाल- 462023, मो. 09826042641, E-mail- v.joshi415@gmail.com

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माटी समाज सेवी संस्था का अभिनव प्रयास
एक बच्चे की जिम्मेदारी आप भी लें...
माटी समाज सेवी संस्था, समाज के विभिन्न जागरुकता अभियान के क्षेत्र में काम करती रही है। पिछले वर्षों में संस्था ने समाज से जुड़े विभिन्न विषयों जैसे शिक्षा, स्वास्थ्य,पर्यावरण, प्रदूषण आदि क्षेत्रों में काम करते हुए जागरुकता लाने का प्रयास किया है। इसी कड़ी में गत कई वर्षों से यह संस्था बस्तर के जरुरतमंद बच्चों की शिक्षा के लिए धन एकत्रित करने का अभिनव प्रयास कर रही है।
बस्तर कोण्डागाँव जिले के कुम्हारपारा ग्राम में बरसों से कारीगर आदिवासियों के बीच काम रही “साथी समाज सेवी संस्था” द्वारा संचालित स्कूल “साथी राऊंड टेबल गुरूकुल” में ऐसे आदिवासी बच्चों को शिक्षा दी जाती है जिनके माता-पिता उन्हें पढ़ाने में असमर्थ होते हैं। प्रति वर्ष एक बच्चे की शिक्षा में लगभग चार हजार रुपए तक खर्च आता है। शिक्षा सबको मिले इस विचार से सहमत अनेक लोग पिछले कई सालों से माटी संस्था के माध्यम से “साथी राऊंड टेबल गुरूकुल” के बच्चों की शिक्षा की जिम्मेदारी लेते आ रहे हैं। पिछले कई वर्षों से माटी समाज सेवी संस्था उक्त स्कूल के लगभग 15 से 20 बच्चों के लिए शिक्षा शुल्क एकत्रित कर रही है। अनुदान देने वालों में शामिल हैं- प्रियंका-गगन सयाल, लंदन मैनचेस्टर, डॉ. प्रतिमा-अशोक चंद्राकर रायपुर, तरुण खिचरिया, दुर्ग (पत्नी श्रीमती कुमुदिनी खिचरिया की स्मृति में), श्री राजेश चंद्रवंशी (पिता श्री अनुज चंद्रवंशी की स्मृति में), क्षितिज चंद्रवंशी (पिता श्री राकेश चंद्रवंशी की स्मृति में)। अरुणा-नरेन्द्र तिवारी रायपुर, पी. एस. राठौर- अहमदाबाद। इस मुहिम में नए युवा सदस्य जुड़ें हैं- आयुश चंद्रवंशी रायपुर, जिन्होंने अपने पहले वेतन से एक बच्चे की शिक्षा की जिम्मेदारी उठायी है, जो स्वागतेय पहल है। इस प्रयास में यदि आप भी शामिल होना चाहते हैं तो आपका तहे दिल से स्वागत है। आपके इस अल्प सहयोग से एक बच्चा शिक्षित होकर राष्ट्र की मुख्य धारा में शामिल तो होगा ही साथ ही देश के विकास में भागीदार भी बनेगा। तो आइए देश को शिक्षित बनाने में एक कदम हम भी बढ़ाएँ। सम्पर्क- माटी समाज सेवी संस्था, पंडरी, रायपुर (छग) 492 004, मोबा.94255 24044, Email- drvermar@gmail.com

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