March 15, 2016

बाल- कहानी

             जंगल में मनी होली

                                        - हरिहर वैष्णव

एक बार की बात है। बन्दर महाशय भटक कर एक शहर में जा पहुँचे। वह था होली का दिन। जिस रात होली जलायी गयी, वे वहीं पर थे। अगले दिन जब वे वापस होने लगे तो देखा कि लोग रंग-गुलाल ले कर होली मना रहे हैं। उन्हें यह सब देख कर बड़ा मजा आया। जंगल लौट कर उन्होंने यह बात अन्य जानवरों को भी बतायी और अगले साल होली मनाने का प्रस्ताव रखा। बन्दर महाशय का प्रस्ताव सभी को अच्छा लगा। फिर बात आयी-गयी हो गयी।
होते-होते अगले साल होली-त्योहार का समय आ गया। तब बन्दर महाशय ने फिर अपना प्रस्ताव याद दिलाया। इस पर जंगल के जानवरों ने भी जंगल में होली मनाने की सोची। सभी को अलग-अलग जिम्मेदारी सौंप दी गयी।
सभी अपनी-अपनी जिम्मेदारी पूरी करने में जुट गये। रंग-गुलाल और पिचकारी का प्रबन्ध हो गया। हाथी दादा भी लकड़ी लेने चले गये। कुछ देर बाद हाथी दादा थोड़ी-सी गिरी-पड़ी-सूखी लकडिय़ाँ अपनी सूँढ़ में पकड़ कर ले आये। बन्दर महाशय यह देख कर बोले, 'क्या हाथी दादा, आप भी? अरे, भाई! इतनी कम लकड़ियों से होली कैसे जलेगी?’
यह सुन कर हाथी दादा बोले, 'बन्दर भाई! हम ढेर सारी लकड़ियों का सत्यानाश नहीं करेंगे।
तभी होशियार लोमड़ी बोली, 'यह तो आपने बहुत पते की बात कही है, हाथी दादा। जंगल खत्म हो गये तो सर्वनाश निश्चित है।
यह सुन कर बन्दर महाशय बोले, 'तब तो हमें पानी की भी बचत करनी चाहिये। मैंने शहर में देखा कि लोग ढेर सारे पानी में रंग घोल कर एक-दूसरे पर डालते और पानी की बर्बादी करते हैं।
और इस तरह सभी की सहमति से थोड़ी-सी लकड़ी की होली जलायी गयी और पानी की बर्बादी किये बिना सूखे रंग-गुलाल से मजे ले-ले कर होली मनायी गयी।

सम्पर्क: सरगीपाल पारा कोण्डागाँव- 494226, बस्तर छत्तीसगढ़, मो. 7697174308,  Email- hariharvaishnav@gmail.com

2 Comments:

Unknown said...

सुन्दर शिक्षात्मक कहानी बच्चों को पानी और जंगल का महत्व समझाती । बहुत अच्छी लगी

सविता अग्रवाल 'सवि' said...

बहुत प्यारी शिक्षाप्रद कहानी है |हार्दिक बधाई |
सविता अग्रवाल 'सवि'

एक बच्चे की जिम्मेदारी आप भी लें

अभिनव प्रयास- माटी समाज सेवी संस्था, जागरुकता अभियान के क्षेत्र में काम करती रही है। इसी कड़ी में गत कई वर्षों से यह संस्था बस्तर के जरुरतमंद बच्चों की शिक्षा के लिए धन एकत्रित करने का अभिनव प्रयास कर रही है। बस्तर कोण्डागाँव जिले के कुम्हारपारा ग्राम में बरसों से आदिवासियों के बीच काम रही 'साथी समाज सेवी संस्था' द्वारा संचालित स्कूल 'साथी राऊंड टेबल गुरूकुल' में ऐसे आदिवासी बच्चों को शिक्षा दी जाती है जिनके माता-पिता उन्हें पढ़ाने में असमर्थ होते हैं। इस स्कूल में पढऩे वाले बच्चों को आधुनिक तकनीकी शिक्षा के साथ-साथ परंपरागत कारीगरी की नि:शुल्क शिक्षा भी दी जाती है। प्रति वर्ष एक बच्चे की शिक्षा में लगभग चार हजार रुपये तक खर्च आता है। शिक्षा सबको मिले इस विचार से सहमत अनेक जागरुक सदस्य पिछले कई सालों से माटी समाज सेवी संस्था के माध्यम से 'साथी राऊंड टेबल गुरूकुल' के बच्चों की शिक्षा की जिम्मेदारी लेते आ रहे हैं। प्रसन्नता की बात है कि नये साल से एक और सदस्य हमारे परिवार में शामिल हो गए हैं- रामेश्वर काम्बोज 'हिमांशु' नई दिल्ली, नोएडा से। पिछले कई वर्षों से अनुदान देने वाले अन्य सदस्यों के नाम हैं- प्रियंका-गगन सयाल, मेनचेस्टर (यू.के.), डॉ. प्रतिमा-अशोक चंद्राकर रायपुर, सुमन-शिवकुमार परगनिहा, रायपुर, अरुणा-नरेन्द्र तिवारी रायपुर, डॉ. रत्ना वर्मा रायपुर, राजेश चंद्रवंशी, रायपुर (पिता श्री अनुज चंद्रवंशी की स्मृति में), क्षितिज चंद्रवंशी, बैंगलोर (पिता श्री राकेश चंद्रवंशी की स्मृति में)। इस प्रयास में यदि आप भी शामिल होना चाहते हैं तो आपका तहे दिल से स्वागत है। आपके इस अल्प सहयोग से एक बच्चा शिक्षित होकर राष्ट्र की मुख्य धारा में शामिल तो होगा ही साथ ही देश के विकास में भागीदार भी बनेगा। तो आइए देश को शिक्षित बनाने में एक कदम हम भी बढ़ाएँ। सम्पर्क- माटी समाज सेवी संस्था, रायपुर (छ. ग.) 492 004, मोबा. 94255 24044, Email- drvermar@gmail.com

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