May 30, 2012

आपके पत्र/ मेल बॉक्स

  • रंगमय तोहफा 
मार्च अंक के मनमोहक मुखपृष्ठ की जितनी तारीफ की जाए थोड़ी है। पलाश पुष्पों में सज्जित यह अंक अपनी अद्भुत और असीमित कलात्मकता का परिचय देते हुए  वास्तव में होली का रंगीन और रसमय तोहफा बन गया है। जहां एक ओर यह चित्र मन में होली के रस और रंग की वर्षा करता है वहीं दूसरी ओर वनों में छाए इन पलाश के फूलों की मादक छवि होली के आने का  शुभ संकेत देती है। इसी चित्र जैसी अनुभूति मुझे तब होती है जब कभी मोती जैसी ओस की बूंदों से जगमगाती लाल कमल की पंखुड़ी देखने का सौभाग्य प्राप्त होता है। इस प्रकर की छबियां मेरे लिए आध्यत्मिक अनुभव होती हैं। इस अंक की अन्य सामग्री में विशेषतया महादेवी वर्मा जी की आत्मकथा, फूलबासन पर लेख तथा होली पर प्रो. अश्विनी केशरवानी की रचना भी उत्तम है। समग्र रूप में यह अंक संग्रहणीय बन गया है। हार्दिक बधाई स्वीकार करें।
-  प्रताप सिंह राठौर, अहमदाबाद, psrathaur@yahoo.com
  • टेसू का चटख रंग
उदंती के होली अंक मिला। आवरणपृष्ठ पर पलाश या टेसू का चटख रंग देख कर मन प्रसन्न हो गया, पहले ग्राम- नगर की सीमा पर पलाश के पेड़ लगे होते थे जो फाल्गुन आते ही खिल उठते थे। डॉक्टर अश्विनी का होली पर आलेख सांस्कृतिक परंपरा का अनुस्मरण है जो सदैव प्रेरक और मनोरंजक बना रहता है। कृष्ण, राम और शिव की होली के कवित्त और लोकगीत अब पढऩे सुनने में कम ही आते हैं। उदंती ने इन्हें प्रकाशित कर संस्कृति- परंपरा को विस्तार देने का प्रयास किया है जो प्रशंसनीय है। सोचता हूँ राम- सीता और उनके अनुजों को होली का अवसर कब और कितना मिला होगा पर कृष्ण की तर्ज पर होली खेलें रघुबीरा के लोकगीत भक्तों ने रचे तो हैं ही। नारी सशक्तिकरण पर अतुलजी की रिपोर्टिंग सामयिक है, इसी तरह की रिपोर्टिंग कन्या भ्रूण हत्या के विरुद्ध कार्यरत संस्था और व्यक्ति समूह पर भी देते रहिये।
- ब्रजेन्द्र श्रीवास्तव, ग्वालियर (मप्र)
brijshrivastava@rediffmail.com
  • असाधारण आदमी
ए दीदी, कभी सोचबो की हैं कि एतना दुलार दीजिएगा त हम रक्खेंगे कहाँ... सरधा से आँख बंद करते हैं त लोर बनकर बरसने लगता है... एगो बात त हम कभी सायद बतइबो नहीं किये आप को.. आप हमको नहीं जानती थीं, मगर हम जानते थे... एक बार एगो फंक्सन में हम गए थे.. चुपचाप कोना में बइठे हुए थे.. लोग बाग रह-रह कर इस्टेज के तरफ देखता था अउर फुसफुसता था लगता है रश्मि प्रभा जी आ गई हैं... एतना बार ई नाम हम सुने कि लगा जइसे अमिताभ बच्चन के आने का इंतजार हो रहा है.. खैर, जब जतरा बना तब्बे मिले कुंभ के मेला में अलग हुए दुन्नो भाई-बहिन!!
आपका लिखला के बाद बुझाता है कि हम अति-साधारण आदमी से असाधारण आदमी हो गए हैं!
- सलिल वर्मा, पटना
http://chalaabihari.blogspot.com  (मार्च अंक में प्रकाशित ब्लाग बुलेटिन कॉलम के ब्लागर की प्रतिक्रिया, रचनाकार रश्मिप्रभा जी के लिए)
  • शानदार अंक
मार्च अंक में प्रकाशित 'बाथ टब की होली'  पढ़कर बहुत मजा आया...बाल्टी से रंग नहीं डाली गई...बाथ टब में होली खेली गई। भई, कुछ तो हुआ। 'संघर्षों में तप कर मजबूत होती आज की स्त्री' नारी जागरण के लिए सशक्त आलेख है। जेन्नी शबनम के हाइकु राग, अनुराग विरह सब कुछ वर्णन कर रहे हैं। इसी तरह ब्लॉग बुलेटिन में सलिल वर्मा का परिचय बहुत अच्छे से दिया है। जहाँ भी पटना और बिहार की बात आती है मैं टिप्पणी दिए बिना नहीं रह पाती। वर्माजी ने अपने ब्लॉग में पुष्पा आर्याणी जी का जिक्रकिया है। मैंने उनकी सिस्टर किरण आर्याणी जी से फिजिक्स पढ़ा है। सलिल जी के ब्लॉग को फॉलो करती हूँ इसलिए सारे पोस्ट पढ़ पाती हूँ।
- ऋता शेखर मधु, hrita.sm@gmail.com
उदंती में प्रकाशित 'बाथ टब की होली' परदेश जा कर अपने देश की छोटी-छोटी चीजें, चाहे वह अच्छी हो या बुरी, कितना याद आती है, रचना जी की इन यादों को पढ़ कर साफ पता चलता है...। अपनी प्यारी खुशनुमा यादों को हमारे साथ बाँटने के लिए रचना जी का आभार और बधाई। 'तुम्हारे बिना' में रंगों के त्योहार होली को इन हाइकुओं के माध्यम से आँखों के सामने फिर से सजीव कर दिया है जेन्नी जी ने...।
- प्रियंका गुप्ता,   priyanka.gupta.knpr@gmail.com
  • मानवीयता का अनुपालन
'कोख में श्मशान' लेख कटु यथार्थ को बयान करता है। हम शास्त्रों की बहुत दुहाई देते हैं, पूजा -पाठ में भी पीछे नहीं। बस पीछे हैं मानवीयता का अनुपालन करने में। पूजा पाठ के नाम पर पूरा तूमार खड़ा कर देंगे, दूसरी ओर मौका मिलते ही आज के युवक दहेज के बदले बिकने को तैयार मिलेंगे। दंगा हो फसाद हो, घर-परिवार के लोग हों चाहे रिश्तेदार, शोषण में कोई भी पीछे नहीं रहना चाहता। आपका यह लेख आँख खोलने वाला है।
- रामेश्वर काम्बोज 'हिमांशु', rdkamboj@gmail.com

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लेखकों से अनुरोध...

उदंती.com एक सामाजिक- सांस्कृतिक वेब पत्रिका है। पत्रिका में सम- सामयिक मुद्दों के साथ पर्यावरण को बचाने तथा पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए उठाए जाने वाले कदमों को प्राथमिकता से प्रकाशित किया जाता है। समाजिक जन जागरण के विभिन्न मुद्दों को शामिल करने के साथ ऐतिहासिक सांस्कृतिक धरोहर से जुड़े लेखों और साहित्य की विभिन्न विधाओं जैसे कहानी, कविता, गीत, गजल, व्यंग्य, निबंध, लघुकथाएं और संस्मरण आदि का भी समावेश किया गया है। उपर्युक्त सभी विषयों पर मौलिक अप्रकाशित रचनाओं का स्वागत है। आप अपनी रचनाएँ Email-udanti.com@gmail.comपर प्रेषित करें।

माटी समाज सेवी संस्था का अभिनव प्रयास
एक बच्चे की जिम्मेदारी आप भी लें...
माटी समाज सेवी संस्था, समाज के विभिन्न जागरुकता अभियान के क्षेत्र में काम करती रही है। पिछले वर्षों में संस्था ने समाज से जुड़े विभिन्न विषयों जैसे शिक्षा, स्वास्थ्य,पर्यावरण, प्रदूषण आदि क्षेत्रों में काम करते हुए जागरुकता लाने का प्रयास किया है। इसी कड़ी में गत कई वर्षों से यह संस्था बस्तर के जरुरतमंद बच्चों की शिक्षा के लिए धन एकत्रित करने का अभिनव प्रयास कर रही है।
बस्तर कोण्डागाँव जिले के कुम्हारपारा ग्राम में बरसों से कारीगर आदिवासियों के बीच काम रही “साथी समाज सेवी संस्था” द्वारा संचालित स्कूल “साथी राऊंड टेबल गुरूकुल” में ऐसे आदिवासी बच्चों को शिक्षा दी जाती है जिनके माता-पिता उन्हें पढ़ाने में असमर्थ होते हैं। प्रति वर्ष एक बच्चे की शिक्षा में लगभग चार हजार रुपए तक खर्च आता है। शिक्षा सबको मिले इस विचार से सहमत अनेक लोग पिछले कई सालों से माटी संस्था के माध्यम से “साथी राऊंड टेबल गुरूकुल” के बच्चों की शिक्षा की जिम्मेदारी लेते आ रहे हैं। पिछले कई वर्षों से माटी समाज सेवी संस्था उक्त स्कूल के लगभग 15 से 20 बच्चों के लिए शिक्षा शुल्क एकत्रित कर रही है। अनुदान देने वालों में शामिल हैं- प्रियंका-गगन सयाल, लंदन मैनचेस्टर, डॉ. प्रतिमा-अशोक चंद्राकर रायपुर, तरुण खिचरिया, दुर्ग (पत्नी श्रीमती कुमुदिनी खिचरिया की स्मृति में), श्री राजेश चंद्रवंशी (पिता श्री अनुज चंद्रवंशी की स्मृति में), क्षितिज चंद्रवंशी (पिता श्री राकेश चंद्रवंशी की स्मृति में)। अरुणा-नरेन्द्र तिवारी रायपुर, पी. एस. राठौर- अहमदाबाद। इस मुहिम में नए युवा सदस्य जुड़ें हैं- आयुश चंद्रवंशी रायपुर, जिन्होंने अपने पहले वेतन से एक बच्चे की शिक्षा की जिम्मेदारी उठायी है, जो स्वागतेय पहल है। इस प्रयास में यदि आप भी शामिल होना चाहते हैं तो आपका तहे दिल से स्वागत है। आपके इस अल्प सहयोग से एक बच्चा शिक्षित होकर राष्ट्र की मुख्य धारा में शामिल तो होगा ही साथ ही देश के विकास में भागीदार भी बनेगा। तो आइए देश को शिक्षित बनाने में एक कदम हम भी बढ़ाएँ। सम्पर्क- माटी समाज सेवी संस्था, पंडरी, रायपुर (छग) 492 004, मोबा.94255 24044, Email- drvermar@gmail.com

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