July 12, 2018

जीवन यापन की जापानी पद्धति

जीवन यापन की जापानी पद्धति
- विजय जोशी
(पूर्व ग्रुप महाप्रबंधक, भेल, भोपाल)

 जापान जिम्मेदारी, जागरूकता एवं जज़्बे का दूसरा नाम है। एक आम जापानवासी भी अपने ध्येय के प्रति पूरी तरह सतर्क एवं समर्पित रहता है। यही वह विशेषता है जिसके कारण तमाम भौतिक असुविधा और आपदाओं के बीच भी यह देश सिद्धांतों के मामले में भी दुनिया का सिरमौर बनकर उभरा है।
वहाँ की जीवन पद्धति के कुछ सूत्रों को जानने का सौभाग्य मुझे हाल ही में प्राप्त हुआ, जो इस प्रकार हैं -
(1) क्या आप जानते हैं कि वहाँ के बच्चे प्रतिदिन शिक्षकों के साथ मिलकर पहले आधे घंटे साफ सफाई करते हैं। इसी गुण के कारण उस नई पीढ़ी का निर्माण हुआ जो नम्र होने के साथ ही साथ स्वच्छता के प्रति समर्पित भी है।
(2) क्या आप जानते हैं कि जिन जापानियों के पास कुत्ते हैं, वे एक प्लास्टिक का बैग साथ लेकर चलते हैं, ताकि उसमें अपने पालतू का निष्कासन भर सकें। स्वच्छता (Hygiene) स्वच्छता  के प्रति उत्सुकता और समर्पण जापानी आचार व्यवहार (Ethics) का एक अंग है।
(3) क्या आप जानते हैं कि वहाँ सफाई कर्मचारी को हेल्थ इंजीनियर कहा जाता है, जिसकी मासिक आय 5 हजार से 8 हजार अमरीकी डॉलर के समकक्ष होती है तथा उसे लिखित मौखिक परीक्षा से गुजरने पर ही नौकरी मिलती है।
(4) क्या आप जानते हैं कि जापान के पास कोई प्राकृतिक सम्पदा नहीं है तथा उन्हें भूकंप जैसी आपदाओं का खतरा सदैव बना रहता है, लेकिन इसके बावजूद उन्हें संसार की दूसरी सबसे बड़ी अर्थ व्यवस्था बनने से कोई नहीं रोक सका।
(5) क्या आप जानते हैं कि एटमिक त्रासदी को झेलने के बाद केवल एक दशक में जापान पूर्ववत जीवंत (Vibrant) अर्थ शक्ति के रूप में उभर आया।
(6) क्या आप जानते हैं कि जापानियों के लिए ट्रेन, रेस्टोरेंट जैसी सार्वजनिक जगहों पर मोबाइल फोन का प्रयोग प्रतिबंधित है।
(7) क्या आप जानते हैं कि वहाँ कक्षा 1 से 6 तक के छात्रों के लिये मानवीय संबंधों में आचार व्यवहार (Ethics) का ज्ञान आवश्यक है।
(8) क्या आप जानते हैं कि इस समुदाय की संसार के धनी वर्ग में गणना होने के बावजूद उनके घर में कोई नौकर नहीं होता। वे अपने काम स्वयं करते हैं।
(9) क्या आप जानते हैं कि उनके यहाँ प्राथमिक स्तर पर कोई परीक्षा नहीं होती। उनका लक्ष्य तो बच्चों में चारित्रिक गुणों का विकास है।    
(10) क्या आप जानते हैं कि बुफेवाले रेटोरेंट में जाने पर आप पाएँगे कि वहाँ कोई भी जूठा नहीं छोड़ता। वे आवश्यकता से अधिक कभी नहीं लेते ,भले ही वह मुफ्त ही क्यों हो।
(11) क्या आप जानते हैं कि जापान में ट्रेन लेट होने की अधिकतम सीमा मात्र 7 सेकंड प्रति वर्ष है। उन्हें समय की कीमत मालूम है तथा वे समय के मामले में बेहद समयनिष्ठ (Punctual) हैं।
(12) क्या आप जानते हैं कि वहाँ बच्चे स्कूल में भोजन समाप्ति पश्चात् नियमित ब्रश करते हुए दाँत अवश्य साफ करते हैं। वे स्वास्थ्य के प्रति बचपन से ही जागरूक रहते हैं।
(13) क्या आप जानते हैं कि वहाँ बच्चे धीमी गति से लगभग आधे घंटे में अपना भोजन समाप्त करते हैं ,ताकि वह ठीक से पच भी सके। पूछा जाने पर एक जापानी ने उत्तर दिया कि बच्चे हमारी धरोहर तथा हमारे देश का भविष्य हैं।
मित्रो ! यही वहाँ के निवासियों के वे गुण हैं ,जिनके कारण उनका देश महान है। ये पल हमारे लिये आत्म निरीक्षण एवं परीक्षण दोनों के हैं।
सम्पर्कः 8/ सेक्टर-2, शांति निकेतन (चेतक सेतु के पास), भोपाल- 462023, मो. 09826042641, E-mail- v.joshi415@gmail.com

1 Comment:

Unknown said...

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एक बच्चे की जिम्मेदारी आप भी लें

अभिनव प्रयास- माटी समाज सेवी संस्था, जागरुकता अभियान के क्षेत्र में काम करती रही है। इसी कड़ी में गत कई वर्षों से यह संस्था बस्तर के जरुरतमंद बच्चों की शिक्षा के लिए धन एकत्रित करने का अभिनव प्रयास कर रही है। बस्तर कोण्डागाँव जिले के कुम्हारपारा ग्राम में बरसों से आदिवासियों के बीच काम रही 'साथी समाज सेवी संस्था' द्वारा संचालित स्कूल 'साथी राऊंड टेबल गुरूकुल' में ऐसे आदिवासी बच्चों को शिक्षा दी जाती है जिनके माता-पिता उन्हें पढ़ाने में असमर्थ होते हैं। इस स्कूल में पढऩे वाले बच्चों को आधुनिक तकनीकी शिक्षा के साथ-साथ परंपरागत कारीगरी की नि:शुल्क शिक्षा भी दी जाती है। प्रति वर्ष एक बच्चे की शिक्षा में लगभग चार हजार रुपये तक खर्च आता है। शिक्षा सबको मिले इस विचार से सहमत अनेक जागरुक सदस्य पिछले कई सालों से माटी समाज सेवी संस्था के माध्यम से 'साथी राऊंड टेबल गुरूकुल' के बच्चों की शिक्षा की जिम्मेदारी लेते आ रहे हैं। प्रसन्नता की बात है कि नये साल से एक और सदस्य हमारे परिवार में शामिल हो गए हैं- रामेश्वर काम्बोज 'हिमांशु' नई दिल्ली, नोएडा से। पिछले कई वर्षों से अनुदान देने वाले अन्य सदस्यों के नाम हैं- प्रियंका-गगन सयाल, मेनचेस्टर (यू.के.), डॉ. प्रतिमा-अशोक चंद्राकर रायपुर, सुमन-शिवकुमार परगनिहा, रायपुर, अरुणा-नरेन्द्र तिवारी रायपुर, डॉ. रत्ना वर्मा रायपुर, राजेश चंद्रवंशी, रायपुर (पिता श्री अनुज चंद्रवंशी की स्मृति में), क्षितिज चंद्रवंशी, बैंगलोर (पिता श्री राकेश चंद्रवंशी की स्मृति में)। इस प्रयास में यदि आप भी शामिल होना चाहते हैं तो आपका तहे दिल से स्वागत है। आपके इस अल्प सहयोग से एक बच्चा शिक्षित होकर राष्ट्र की मुख्य धारा में शामिल तो होगा ही साथ ही देश के विकास में भागीदार भी बनेगा। तो आइए देश को शिक्षित बनाने में एक कदम हम भी बढ़ाएँ। सम्पर्क- माटी समाज सेवी संस्था, रायपुर (छ. ग.) 492 004, मोबा. 94255 24044, Email- drvermar@gmail.com

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