May 15, 2018

ट्विटर पर झूठी खबरें ज्य़ादा तेज़ चलती हैं

ट्विटर पर झूठी खबरें 
ज्य़ादा तेज़ चलती हैं
वर्ष 2006 से 2017 के बीच ट्विटर पर 30 लाख लोगों के पोस्ट के विश्लेषण के आधार पर शोधकर्ताओं का निष्कर्ष है कि यहाँ  झूठी खबरों की रफ्तार कहीं ज़्यादा तेज़ होती है।
मैसाचुसेट्स इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नॉलॉजी की मीडिया लैब के सोरोश वोसोगी और उनके साथियों ने ट्विटर पर 1 लाख 26 हज़ार स्टोरीज़ को देखा। किसी ट्वीट को स्टोरी तब माना गया जब उसमें कोई दावा किया जाए। अर्थात् यह ज़रूरी नहीं कि ऐसा ट्वीट किसी समाचार संगठन की किसी स्टोरी से जुड़ा हो। इन दावों की तथ्यात्मक जांच छह  स्वतंत्र संगठनों द्वारा की गई। इनमें स्नोप्स, पोलिटीफैक्ट और फैक्टचेक शामिल हैं। और इस सबके बाद जो पता चला वह डरावना था। सूचना की हर श्रेणी में मिथ्या खबरें ज़्यादा दूर तक, ज़्यादा तेज़ी से आगे बढ़ती हैं बनिस्बत सच्ची खबरों के। और इनकी रफ्तार में अंतर कई गुना है।
ट्विटर पर सच्ची खबरों को 1500 लोगों तक पहुंचने में झूठी खबरों के मुकाबले 6 गुना ज़्यादा समय लगता है। कारण यह है कि झूठ को रीट्वीट किए जाने की संभावना 70 प्रतिशत ज़्यादा होती है। यह फर्क तब भी रहता है जब आप किसी अकाउंट की आयु, सक्रियता के स्तर और फॉलोअर्स की संख्या को अलग करके देखें। सबसे ज़्यादा वायरल झूठे पोस्ट राजनैतिक किस्म के थे।
आम तौर पर धारणा यह है कि कई संगठन रोबोटों को इस काम में लगा देते हैं। वे पोस्ट को रीट्वीट करते रहते हैं और इस प्रकार से झूठी खबरें फैलती हैं। लेकिन उपर्युक्त अध्ययन से यह भी पता चला कि झूठी खबरों को फैलाने में ऐसे स्व-चालित अकाउंट्स नहीं बल्कि वास्तविक लोगों की भूमिका थी। इस बात का पता लगाने के लिए शोधकर्ताओं ने उन पोस्ट को छोड़ दिया था जिन्हें स्वचालित अकाउंट से भेजा गया था। इन पोस्ट का अलग से विश्लेषण करने पर पता चला कि रोबोट अकाउंट खबरों को फैलाने में भूमिका अवश्य निभाते हैं, किंतु वे झूठी और सच्ची खबरों के बीच भेद नहीं करते। 
साइंस  में प्रकाशित इन निष्कर्षों पर बैंगर विश्वविद्यालय के वायन बकीर कहते हैं कि लोग झूठी खबरों को कई कारणों से साझा करते हैं। इनसें सबसे बड़ा कारण है अचरज और आक्रोश का मिला-जुला एहसास। (स्रोत फीचर्स)

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एक बच्चे की जिम्मेदारी आप भी लें

अभिनव प्रयास- माटी समाज सेवी संस्था, जागरुकता अभियान के क्षेत्र में काम करती रही है। इसी कड़ी में गत कई वर्षों से यह संस्था बस्तर के जरुरतमंद बच्चों की शिक्षा के लिए धन एकत्रित करने का अभिनव प्रयास कर रही है। बस्तर कोण्डागाँव जिले के कुम्हारपारा ग्राम में बरसों से आदिवासियों के बीच काम रही 'साथी समाज सेवी संस्था' द्वारा संचालित स्कूल 'साथी राऊंड टेबल गुरूकुल' में ऐसे आदिवासी बच्चों को शिक्षा दी जाती है जिनके माता-पिता उन्हें पढ़ाने में असमर्थ होते हैं। इस स्कूल में पढऩे वाले बच्चों को आधुनिक तकनीकी शिक्षा के साथ-साथ परंपरागत कारीगरी की नि:शुल्क शिक्षा भी दी जाती है। प्रति वर्ष एक बच्चे की शिक्षा में लगभग चार हजार रुपये तक खर्च आता है। शिक्षा सबको मिले इस विचार से सहमत अनेक जागरुक सदस्य पिछले कई सालों से माटी समाज सेवी संस्था के माध्यम से 'साथी राऊंड टेबल गुरूकुल' के बच्चों की शिक्षा की जिम्मेदारी लेते आ रहे हैं। प्रसन्नता की बात है कि नये साल से एक और सदस्य हमारे परिवार में शामिल हो गए हैं- रामेश्वर काम्बोज 'हिमांशु' नई दिल्ली, नोएडा से। पिछले कई वर्षों से अनुदान देने वाले अन्य सदस्यों के नाम हैं- प्रियंका-गगन सयाल, मेनचेस्टर (यू.के.), डॉ. प्रतिमा-अशोक चंद्राकर रायपुर, सुमन-शिवकुमार परगनिहा, रायपुर, अरुणा-नरेन्द्र तिवारी रायपुर, डॉ. रत्ना वर्मा रायपुर, राजेश चंद्रवंशी, रायपुर (पिता श्री अनुज चंद्रवंशी की स्मृति में), क्षितिज चंद्रवंशी, बैंगलोर (पिता श्री राकेश चंद्रवंशी की स्मृति में)। इस प्रयास में यदि आप भी शामिल होना चाहते हैं तो आपका तहे दिल से स्वागत है। आपके इस अल्प सहयोग से एक बच्चा शिक्षित होकर राष्ट्र की मुख्य धारा में शामिल तो होगा ही साथ ही देश के विकास में भागीदार भी बनेगा। तो आइए देश को शिक्षित बनाने में एक कदम हम भी बढ़ाएँ। सम्पर्क- माटी समाज सेवी संस्था, रायपुर (छ. ग.) 492 004, मोबा. 94255 24044, Email- drvermar@gmail.com

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