July 20, 2015

लोक-मंच विशेष

रंगकर्म जिनके जीने का जरिया बना
रामहृदय तिवारी
दुर्ग जिले के उरडहा गाँव में 16 सितम्बर 1943 को जन्मे रामहृदय तिवारी लोककला के क्षेत्र में पिछले चार दशकों से सक्रिय है। एक स्वतंत्र रंगकर्मी के रुप में श्री तिवारी सिर्फ रंगमंच ही नहीं अपितु नाट्यकर्म से जुड़ी अनेकानेक गतिविधियों में निरंतर संलग्न रहें हैं। श्री तिवारी द्वारा निर्देशित अँधेरे के उस पार भूख के सौदागर, भविष्य, अश्वत्थामा, राजा जिंदा है, मुर्गी वाला, झड़ीराम सर्वहारा, पेंशन, विरोध, हम क्यों नहीं गाते, अरण्यगाथा तथा अन्य अनेक हिन्दी नाटक छत्तीसगढ़ के समृद्ध रंगमंचीय इतिहास का हिस्सा तो बने ही, जनता के संघर्षमय जीवन की अंतरंग, सूक्ष्म और संवेदनशील अभिव्यक्ति के वाहक भी बने।
रामहृदय तिवारी ने कसक, सँवरी, स्वराज, एहसास जैसी अनेक टेली फिल्मों का भी निर्देशन किया। उन्होंने छत्तीसगढ़ी नाचा, बोली, लोकगीत, लोककथा, लोक परम्परा, लोक संगीत, लोक नाट्य और लोक अभिव्यक्ति की विभिन्न विधाओं पर निरंतर और सोद्देश्यपूर्ण लेखन भी किया। वे लम्बे समय तक हिन्दी रंगमंच क्षितिज रंग शिविर से जुड़े रहे और वर्तमान में राज्य की अत्यंत प्रतिष्ठित रंग संस्था लोक रंग अर्जुन्दा से संबद्ध है। वे लंबे समय तक दाऊ रामचंद्र देशमुख और दाऊ महासिंग चंद्राकर के सानिध्य में रहे।
 रामहृदय तिवारी ने छत्तीसगढ़ी लोकजीवन की चहल-पहल को अत्यन्त कलात्मक एवं उद्देश्यपूर्ण अभिव्यक्ति प्रदान की है। दाऊ रामचंद्र देशमुख ने जनता के सुख-दुख को जिस अंतरंगता एवं संवेदनशीलता के साथ लोकनाट्य का हिस्सा बनाया, रामहृदय तिवारी ने उसे सार्थक दिशा और अर्थपूर्ण विस्तार प्रदान किया। महत्त्वपूर्ण यह है कि उन्होंने पहले रंगकर्म को अपने जीवन का हिस्सा बनाया, बाद में उनका जीवन ही रंगकर्म का हिस्सा बन गया।

0 Comments:

लेखकों से... उदंती.com एक सामाजिक- सांस्कृतिक वेब पत्रिका है। पत्रिका में सम- सामयिक लेखों के साथ पर्यावरण, पर्यटन, लोक संस्कृति, ऐतिहासिक- सांस्कृतिक धरोहर से जुड़े लेखों और साहित्य की विभिन्न विधाओं जैसे कहानी, व्यंग्य, लघुकथाएँ, कविता, गीत, ग़ज़ल, यात्रा, संस्मरण आदि का भी समावेश किया गया है। आपकी मौलिक, अप्रकाशित रचनाओं का स्वागत है। रचनाएँ कृपया Email-udanti.com@gmail.com पर प्रेषित करें।
माटी समाज सेवी संस्था का अभिनव प्रयास माटी समाज सेवी संस्था, समाज के विभिन्न जागरुकता अभियान के क्षेत्र में काम करती है। पिछले वर्षों में संस्था ने समाज से जुड़े विभिन्न विषयों जैसे शिक्षा, स्वास्थ्य,पर्यावरण, प्रदूषण आदि क्षेत्रों में काम करते हुए जागरुकता लाने का प्रयास किया है। माटी संस्था कई वर्षों से बस्तर के जरुरतमंद बच्चों की शिक्षा के लिए धन एकत्रित करने का अभिनव प्रयास कर रही है। बस्तर कोण्डागाँव जिले के कुम्हारपारा ग्राम में “साथी समाज सेवी संस्था” द्वारा संचालित स्कूल “साथी राऊंड टेबल गुरूकुल” में ऐसे आदिवासी बच्चों को शिक्षा दी जाती है जिनके माता-पिता उन्हें पढ़ाने में असमर्थ होते हैं। प्रति वर्ष एक बच्चे की शिक्षा में लगभग चार हजार रुपए तक खर्च आता है। शिक्षा सबको मिले इस विचार से सहमत अनेक लोग पिछले कई सालों से उक्त गुरूकुल के बच्चों की शिक्षा की जिम्मेदारी लेते आ रहे हैं। अनुदान देने वालों में शामिल हैं- अनुदान देने वालों में शामिल हैं- प्रियंका-गगन सयाल, मेनचेस्टर (U.K.), डॉ. प्रतिमा-अशोक चंद्राकर, रायपुर, सुमन-शिवकुमार परगनिहा, रायपुर, अरुणा-नरेन्द्र तिवारी, रायपुर, राजेश चंद्रवंशी, रायपुर (पिता श्री अनुज चंद्रवंशी की स्मृति में), क्षितिज चंद्रवंशी, बैंगलोर (पिता श्री राकेश चंद्रवंशी की स्मृति में)। इस प्रयास में यदि आप भी शामिल होना चाहते हैं तो आपका स्वागत है। आपके इस अल्प सहयोग से स्कूल जाने में असमर्थ बच्चे शिक्षित होकर राष्ट्र की मुख्य धारा में शामिल तो होंगे ही साथ ही देश के विकास में भागीदार भी बनेंगे। तो आइए देश को शिक्षित बनाने में एक कदम हम भी बढ़ाएँ। सम्पर्क- माटी समाज सेवी संस्था, रायपुर (छ.ग.) मोबा. 94255 24044, Email- drvermar@gmail.com

उदंती.com तकनीकि सहयोग - संजीव तिवारी

टैम्‍पलैट - आशीष