October 22, 2013

व्यंग्य

चाहिए एक अदद सुपर-डूपर हिट मेगा ब्लॉक बस्टर घोटाला
- प्रमोद ताम्बट
 हद होती है अनाड़ीपने की, फिर एक घोटाला पकड़ में आ गया! आखिर यह क्या, हो क्या रहा है हमारे देश में! भूमंडलीकरण का दौर शुरू हुए अरसा हो गया, दूसरे मुल्क के घोटालेबाजों ने अपनी प्रखर बुद्धि और मेधा के बल पर चुपचाप धन कूट-कूट कर भूमंडल स्तर पर अपनी साख कायम कर ली है और हमारे देश के शीर्षस्थ घोटालेबाज अभी भी स्कूली बच्चों की तरह अपरिपक्वतापूर्ण हरकतें कर पकड़ाते जा रहे हैं। अब तक तो उन्हें भी किसी मँजे हुए, शातिर खिलाड़ी की तरह घोटालों को सफलतापूर्वक अंजाम देना सीख जाना था, परन्तु देखा जा रहा है कि कम्बख़्त हर बार कोई न कोई गलती कर ही बैठते हैं और आ जाते है सपड़ में। अरे ऐसे मामुओं की तरह बेवकूफी भरे काम ही करना थे तो फिर उतरे ही क्यों घपले-घोटाले के इस संजीदा काम में, कहीं चौराहे पर ढेर लगाकर तरबूज़ बेचते!

महीने दो महीने में एक खाद घोटाले का पर्दाफाश हो तो समझ में आता है, यहाँ तो सुबह-सुबह अखबार के साथ-साथ हर रोज़ एक घोटाले की सूचना दरवाज़े पर आकर गिरती है। यह स्थिति तो बिल्कुल भी संतोषप्रद नहीं कही जा सकती। समझ में नहीं आता कि इन उल्लू के पट्ठों ने इतने बड़े-बड़े स्कूल-कॉलेजों में बैठकर क्या सिर्फ घास छीली है। देश-विदेश के मैनेजमेंट संस्थानों में क्या ये खाली मटरगश्ती करने गए थे  या कि महज़ एक कागज़ की डिग्री लेने के लिए इन्होंने अपने माँ-बाप के लाखों रुपये खर्च करवा दिये, वहाँ बैठकर पढ़ाई-लिखाई बिल्कुल नहीं की। क्या अर्थ है बताइये भला इतने पैसे खर्च करके ऐसी फालतू डिग्रियाँ हासिल करने का, अगर कोई गुरबक एक अदद घोटाला भी सफाई से न निबटा सके! लानत है ऐसे संस्थानों और इनसे निकले विद्यार्थियों पर जो वे देश को एक गर्व करने योग्य साफ-सुथरा घोटाला देने की काबिलियत तक नहीं रखते।
मुझे लगता है कि बड़े-बड़े शैक्षणिक संस्थानों के लिए अब गहराई से चिंता करने का माकूल समय आ गया है। कोई आरोप लगाए या न लगाए उन्हें स्वीकार कर लेना चाहिए कि उनकी दी गई शिक्षा में ही कोई खोट है जो एक के बाद एक घोटाले पकड़े जा रहे हैं। उन्हें अपने सिलेबस की सूक्ष्मता से समीक्षा करने और उस संशोधित कर व्यापक रूप से व्यावहारिक बनाने की सख़्त आवश्यकता है। वे अगर, देश को चलाने में समर्थ घोटालेबाज नेता-राजनीतिज्ञ, ब्यूरोक्रेट्स, बिज़नेसमेनों की आपूर्ति करने की महती ज़िम्मेदारी निभा रहे हैं तो फिर उन्हें अपने इन होनहार छात्रों को नीट एंड क्लीन घोटाले करने की सघन ट्रेनिंग देकर ही फिर मैदान में छोड़ना चाहिए। ये नहीं कि जल्दी से जल्दी मार्केट में उतरकर इन्सटंट घोटाला करने के छात्रों के अत्योत्साह से प्रभावित होकर रेवड़ियों की तरह डिग्रियाँ बाँट दें और फिर जब कोई घोटाला पकड़ा जाए तो फिर मुँह छिपाते फिरें। शिक्षा संस्थानों को चाहिए कि वे प्रत्येक क्षेत्र में नियत कोर्स खत्म करने के बाद छात्रों के घोटाला मैनेजमेंट पर एक पृथक् डिग्री-डिप्लोमा कोर्स सम्पन्न करने की अनिवार्यता पर विचार करें। यह बेहद ज़रूरी है। इससे देश को हर तरह से सक्षम घोटालेबाज मिल सकेंगे जो समुचित सफाई से घोटाला कर सकें, ताकि बड़ी से बड़ी जॉच एजेंसी भी हाथ-पाँव मार कर रह जाए परन्तु वास्तव में घोटाला हुआ भी है या नहीं यह तक तय न कर पाए।
शर्म आती है जब अखबार में किसी घोटाले की खबर छपती है या मीडिया वाले तीन-तीन दिन घोटाले की बासी हो गई खबर का पारायण करते रहते हैं। चुल्लू भर पानी में डूब कर मर जाने को जी करता है। पैसठ साल हो गए देश को आज़ाद हुए, दूसरे मुल्कों के घोटालेबाज़ों को कभी यूँ लाइन लगाकर एक के बाद एक पुलिस के फंदे में फँसते हुए नहीं देखा, और एक हमारे घोटालेबाज़ हैं, जब-जब घोटाला करने की कोशिश करते हैं, नादान छोटे बच्चों की तरह फँस मरते हैं। फिर कोर्ट-कचहरी और जेल से बचने के लिए घोटाले से भी ज़्यादा गुंताड़े और मेहनत करते हुए नज़र आते हैं। अरे, पहले ही घोटाला करने में अपनी अक्ल का भरपूर इस्तेमाल कर लेते तो न किसी टुच्चे चोर की तरह पकड़ाते और न जेल में चक्की पीसने से बचने के लिए इतनी मेहनत करनी पड़ती। 
कितना मन करता है एक ऐसा सफल घोटाला देखने के लिए, जिसमें हमारे घोटालावीरों ने अपने सम्पूर्ण कला-कौशल का इस्तेमाल कर के पकड़ में आने लायक एक भी सूत्र बाहर झाँकता हुआ न छोड़ा हो। आत्मा किल्लाती है एक अदद ऐसे बेहतरीन घोटाले का समाचार अपने कानों से सुनने के लिए जिसे निर्विवाद रूप से मील का पत्थर कहा जा सके.......,सचमुच का एक ऐसा घोटाला, दुनिया भर में कोई भी जिसकी चर्चा सुने तो बस वाह कर के रह जाए। जैसे किसी सुपर हिट फिल्म का एक-एक फ्रेम देखकर लोग वाह-वाह की झड़ी लगा देते हैं, उत्साह से कूद-कूद कर सीटियाँ और तालियाँ पीटते हैं, ठीक उसी तरह जीते जी हम भी एक नायाब घोटाला देख-सुन कर जी भर कर वाह-वाही लुटा पाएँ, बड़ी तमन्ना है। करे तो सही कोई जाँबाज, एक अदद सुपर-डुपर हिट मेगा ब्लॉक बस्टर घोटाला, जिसे कोई माई का लाल पकड़ न पाए।
सम्पर्क: 105/32 शिवाजी नगर, भोपाल-462016मो. 09893479106, Email-tambatin@yahoo.co.in

1 Comment:

प्रमोद ताम्बट said...

व्‍यंग्‍य प्रकाशित करने के लिए शुक्रिया।

लेखकों से अनुरोध...

उदंती.com एक सामाजिक- सांस्कृतिक वेब पत्रिका है। पत्रिका में सम- सामयिक मुद्दों के साथ पर्यावरण को बचाने तथा पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए उठाए जाने वाले कदमों को प्राथमिकता से प्रकाशित किया जाता है। समाजिक जन जागरण के विभिन्न मुद्दों को शामिल करने के साथ ऐतिहासिक सांस्कृतिक धरोहर से जुड़े लेखों और साहित्य की विभिन्न विधाओं जैसे कहानी, कविता, गीत, गजल, व्यंग्य, निबंध, लघुकथाएं और संस्मरण आदि का भी समावेश किया गया है। उपर्युक्त सभी विषयों पर मौलिक अप्रकाशित रचनाओं का स्वागत है। आप अपनी रचनाएँ Email-udanti.com@gmail.comपर प्रेषित करें।

माटी समाज सेवी संस्था का अभिनव प्रयास
एक बच्चे की जिम्मेदारी आप भी लें...
माटी समाज सेवी संस्था, समाज के विभिन्न जागरुकता अभियान के क्षेत्र में काम करती रही है। पिछले वर्षों में संस्था ने समाज से जुड़े विभिन्न विषयों जैसे शिक्षा, स्वास्थ्य,पर्यावरण, प्रदूषण आदि क्षेत्रों में काम करते हुए जागरुकता लाने का प्रयास किया है। इसी कड़ी में गत कई वर्षों से यह संस्था बस्तर के जरुरतमंद बच्चों की शिक्षा के लिए धन एकत्रित करने का अभिनव प्रयास कर रही है।
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