September 26, 2013

बाल- संसद

प्राथमिक शिक्षा से लोकतंत्र का प्रशिक्षण
-भारत डोगरा
राजस्थान में प्रायमरी कक्षा तक के छात्रों को लोकतंत्र में प्रशिक्षित करने का एक अनूठा प्रयोग 'बाल संसदके नाम से किया गया है। 'बाल संसदका चुनाव अजमेर और जयपुर जि़लों में चल रही लगभग 90 रात्रि शालाओं के छात्रों द्वारा किया जाता है। इन रात्रि शालाओं में प्राय: गाँवों के सबसे निर्धन व कमज़ोर आर्थिक स्थिति के परिवारों के वे छात्र पढऩे आते हैं, जो विभिन्न कारणों से दिन के स्कूल में नहीं जा पाते हैं। ये छात्र प्राय: उन परिवारों से हैं जिनके माता-पिता दोनों मज़दूरी करने जाते हैं। इस स्थिति में ये बच्चे ही पशु चराने जाते हैं या छोटे भाई-बहनों की देखरेख करते हैं। शाम के समय वे रात्रि शाला में आ जाते हैं जहाँ रात के 9-10 बजे तक पढ़ते हैं, गीत गाते हैं, खेलते हैं।
रात्रि शालाओं में लोकतंत्र के प्रशिक्षण का अनूठा प्रयोग बाल संसद के रूप में किया गया है। लगभग 60 से 70 बच्चे एक सांसद को चुनते हैं। विभिन्न उम्मीदवारों के लिए वोट डालने, उम्मीदवार के प्रतिनिधि की उपस्थिति में वोट गिनने आदि की पूरी प्रक्रिया अपनाई जाती है। निर्वाचित सांसदों द्वारा प्रधानमंत्री का चुनाव होता है और फिर मंत्रिमंडल का गठन होता है। जहाँ एक ओर वित्तमंत्री, गृहमंत्री, पर्यावरण मंत्री आदि चुने जाते हैं वहीं कुछ मंत्री स्थानीय ज़रूरतों के अनुसार होते हैं, जैसे पुस्तकालय मंत्री, बाल मेला मंत्री आदि।
एक बाल संसद का गठन ढाई वर्ष के लिए होता है। अभी तक सात बाल संसदों का गठन यहाँ हो चुका है। इस वर्ष यहाँ की सातवी बाल संसद अपना कार्यकाल पूरा कर रही है।
प्रधानमंत्री अन्य मंत्रियों की सहायता से विभिन्न रात्रि शालाओं का दौरा करती हैं व जब जहाँ जो कमी पाई जाती है, उसे पूरा करने के लिए सहयोगी संस्था बेयरफुट कॉलेज के सम्बंधित विभाग को निर्देश दिए जाते हैं।
उदाहरण के लिए यदि सौर ऊर्जा से होने वाली प्रकाश व्यवस्था में कोई कमी है तो बेयरफुट कॉलेज के सोलर विभाग को ज़रूरी निर्देश दिया जाता है कि इसे ठीक किया जाए व पेयजल की उपलब्धि में कमी हो तो जल विभाग को कहा जाता है। इन विभिन्न विभागों के सचिवों को बाल संसद की बैठक में आना होता है। पर्यावरण मंत्री को यह फिक्र करनी होती है कि आसपास पेड़-पौधे लगाने व सफाई रखने का कार्य ठीक हो पा रहा है या नहीं, जबकि स्वास्थ्य मंत्री की चिंता का एक मुख्य विषय यह होता है कि सभी बच्चों की नियमित स्वास्थ्य जाँच का जो नियम है उसका पालन हो रहा या नहीं।
कुछ रात्रि शालाओं में टिन शेड की सही व्यवस्था समय पर न हो पाने पर बाल संसद के नवीनतम अधिवेशन में चिंता प्रकट की गई है व प्रधानमंत्री ने इस बारे में कड़े निर्देश दिए हैं। इस अधिवेशन में प्रधानमंत्री नीरजा नाम की छात्रा व शिक्षा मंत्री हेमराज ने संस्था के विभिन्न उपकेंद्रों के प्रतिनिधियों से विस्तृत जानकारी माँगी कि शिक्षा से वंचित कुछ बच्चे अभी तक रात्रि शालाओं में क्यों प्रवेश नहीं पा सके हैं। दूर-दूर से आए विभिन्न प्रतिनिधियों ने अपने सर्वेक्षणों के आधार पर जानकारी दी कि किस समस्या के कारण ये बच्चे अभी रात्रि शाला में नहीं आ रहे हैं। एक मुख्य वजह यह सामने आई थी कि कुछ बच्चों के माता-पिता मज़दूरी के लिए अन्यत्र पलायन कर गए हैं।
बाल संसद की किसी बैठक में कौन से मुद्दे चर्चित होते हैं इसका विस्तृत एजेंडा तैयार करके वितरित किया जाता है। इससे यह जानकारी में भी रहता है कि जो कार्रवाइयाँ पहले बताई गई थी या निर्देश दिए गए थे, उनका पालन किस हद तक हुआ है। उदाहरण के लिए नवीनतम बैठक में जो कागज़ात वितरित हुए हैं, उनमें बताया गया है कि किस कार्यशाला में सुधार को कहा गया है, किसका स्थान परिवर्तन करना पड़ा व किस शाला में कोई समस्या अभी भी बनी हुई है।
ये छात्र अभी बहुत कम उम्र के हैं अत: बेशक अभी यह लोकतांत्रिक प्रक्रिया संस्था के शिक्षा विभाग की देखरेख में उसकी सहायता से ही चलती है पर बार-बार छात्रों को खुलकर बोलने व आगे आने के लिए प्रोत्साहित भी किया जाता है। इस उदाहरण से सीखकर हम अपने विद्यालयों के संचालन में छात्रों की भागीदारी को व्यापक स्तर पर बढ़ा सकते हैं; जिससे उनकी रचनात्मकता को तरह-तरह से खिलने का मौका मिलेगा व साथ ही लोकतंत्र का प्रशिक्षण भी स्कूलों से बहुत रोचक ढंग से मिलेगा। (स्रोत फीचर्स)  

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