July 18, 2013

प्राकृतिक आपदा

 बढ़ता जा रहा है भू-स्खलन का खतरा
 जानी-मानी विज्ञान पत्रिका जियोलॉजी में उपलब्ध जानकारी व आँकड़ों के आधार पर दावा किया गया है कि विश्व में भू- स्खलन के कारण होने वाली मौतों की संख्या वास्तव में पहले के अनुमानों की अपेक्षा दस गुना अधिक है। यह 'डरहम फेटल लैंडस्लाइड डैटाबेसके आधार पर कहा गया है। जानलेवा भूस्खलनों सम्बंधी आँकड़ों व जानकारियों के इस कोश को ब्रिटेन के डरहम विश्वविद्यालय के अनुसंधानकर्त्ताओं ने तैयार किया है।
पहले के अनुमान बताते थे कि वर्ष 2004 से 2010 के बीच भूस्खलनों के कारण 3000 से 7000 मौतें हुईं। इस नए डैटाबेस ने बताया गया है कि इस दौरान भूस्खलनों से 32,300 मौतें हुईं। अधिक भूस्खलन वाले क्षेत्रों में भारत के अनेक पर्वतीय क्षेत्र भी बताए गए हैं। इन अनुसंधानकर्ताओं ने कहा है कि इस नए डैटाबेस से उपचार व रोकथाम के उपाय करने में सरकारों को मदद मिलेगी व इस तरह अनेक बहुमूल्य जीवन बचाए जा सकेंगे।
इस अनुसंधान का भारतीय संदर्भ में महत्त्व स्पष्ट है;  क्योंकि हाल के वर्षों में भूस्खलनों से होने वाली भीषण क्षति के समाचार वैसे भी बढ़ते ही जा रहे हैं। हाल ही में उत्तराखंड में भारी बारिश व बाढ़ से हुई भयानक क्षति में भू- स्खलन की अहम भूमिका थी। भू-स्खलन सम्बंधी राष्ट्रीय स्तर के आँकड़े सहजता से हमारे देश में उपलब्ध नहीं होते हैं,
पर बहुत-सी छिटपुट जानकारी विभिन्न पर्वतीय राज्यों में बिखरी हुई हैं। ज़रूरत इस बात की है कि राष्ट्रीय स्तर पर इस आपदा के महत्त्व को समझ कर इस सम्बंधी उपचार, रोकथाम व सहायता के उपायों पर समुचित ध्यान दिया जाए।
विशेषकर इस ओर विशेष ध्यान देना ज़रूरी है कि पर्वतीय क्षेत्र में किन मानवीय कारणों व गलतियों से भू-स्खलन के कारण होने वाली क्षति बढ़ी है। एक बड़ी वजह तो यह है कि विभिन्न निर्माण कार्यों, विशेषकर बांध निर्माण तथा खनन के लिए, पर्वतीय क्षेत्रों में विस्फोटकों का अंधाधुंध उपयोग किया गया है। इस
कारण भू-स्खलन की संभावना बढ़ गई है। इसको नियंत्रित व नियमित करना ज़रूरी है। वन विनाश भी भू-स्खलन की संभावना बढऩे का एक अन्य बड़ा कारण रहा है।
भू-स्खलन अपने आप में तो बड़ी आपदा है ही, साथ में वे बाढ़ को और उग्र करते हैं व बहुत विनाशकारी व अचानक आने वाली बाढ़ का कारण भी बनते हैं। यदि हिमालय में किसी नदी का बहाव भू-स्खलन के मलबे के कारण रुक जाता है तो इससे कृत्रिम अस्थायी झील बनने लगती है। अंत में पानी का वेग अधिक होने से जब यह झील फूटती है तो बहुत प्रलयंकारी बाढ़ आ सकती है, जैसे कनोडिया गाड में झील बनने के कारण उत्तरकाशी में बाढ़ आई थी। इन संभावनाओं के मद्देनजऱ भू-स्खलन की संभावना को कम करने तथा जहाँ खतरनाक भूस्खलन होते हैं वहाँ उपचार करने पर समुचित ध्यान देना चाहिए। भू-स्खलन प्रभावितों को समुचित सहायता समय पर पहुँचनी चाहिए। (स्रोत फीचर्स)

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माटी समाज सेवी संस्था का अभिनव प्रयास
एक बच्चे की जिम्मेदारी आप भी लें...
माटी समाज सेवी संस्था, समाज के विभिन्न जागरुकता अभियान के क्षेत्र में काम करती रही है। पिछले वर्षों में संस्था ने समाज से जुड़े विभिन्न विषयों जैसे शिक्षा, स्वास्थ्य,पर्यावरण, प्रदूषण आदि क्षेत्रों में काम करते हुए जागरुकता लाने का प्रयास किया है। इसी कड़ी में गत कई वर्षों से यह संस्था बस्तर के जरुरतमंद बच्चों की शिक्षा के लिए धन एकत्रित करने का अभिनव प्रयास कर रही है।
बस्तर कोण्डागाँव जिले के कुम्हारपारा ग्राम में बरसों से कारीगर आदिवासियों के बीच काम रही “साथी समाज सेवी संस्था” द्वारा संचालित स्कूल “साथी राऊंड टेबल गुरूकुल” में ऐसे आदिवासी बच्चों को शिक्षा दी जाती है जिनके माता-पिता उन्हें पढ़ाने में असमर्थ होते हैं। प्रति वर्ष एक बच्चे की शिक्षा में लगभग चार हजार रुपए तक खर्च आता है। शिक्षा सबको मिले इस विचार से सहमत अनेक लोग पिछले कई सालों से माटी संस्था के माध्यम से “साथी राऊंड टेबल गुरूकुल” के बच्चों की शिक्षा की जिम्मेदारी लेते आ रहे हैं। पिछले कई वर्षों से माटी समाज सेवी संस्था उक्त स्कूल के लगभग 15 से 20 बच्चों के लिए शिक्षा शुल्क एकत्रित कर रही है। अनुदान देने वालों में शामिल हैं- प्रियंका-गगन सयाल, लंदन मैनचेस्टर, डॉ. प्रतिमा-अशोक चंद्राकर रायपुर, तरुण खिचरिया, दुर्ग (पत्नी श्रीमती कुमुदिनी खिचरिया की स्मृति में), श्री राजेश चंद्रवंशी (पिता श्री अनुज चंद्रवंशी की स्मृति में), क्षितिज चंद्रवंशी (पिता श्री राकेश चंद्रवंशी की स्मृति में)। अरुणा-नरेन्द्र तिवारी रायपुर, पी. एस. राठौर- अहमदाबाद। इस मुहिम में नए युवा सदस्य जुड़ें हैं- आयुश चंद्रवंशी रायपुर, जिन्होंने अपने पहले वेतन से एक बच्चे की शिक्षा की जिम्मेदारी उठायी है, जो स्वागतेय पहल है। इस प्रयास में यदि आप भी शामिल होना चाहते हैं तो आपका तहे दिल से स्वागत है। आपके इस अल्प सहयोग से एक बच्चा शिक्षित होकर राष्ट्र की मुख्य धारा में शामिल तो होगा ही साथ ही देश के विकास में भागीदार भी बनेगा। तो आइए देश को शिक्षित बनाने में एक कदम हम भी बढ़ाएँ। सम्पर्क- माटी समाज सेवी संस्था, पंडरी, रायपुर (छग) 492 004, मोबा.94255 24044, Email- drvermar@gmail.com

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