January 18, 2013

परिवार



खत्म होते घर-आँगन
- संजय कुमार

घर-आँगन, परिवार, रिश्ते-नाते और हमारे संस्कार बदलते समय के साथ धीरे-धीरे बदलते जा रहे हैं! अब हमारे घर- परिवार में वो बात नहीं रही जो पहले कभी हुआ करती थी! पहले हम घर-परिवार से जाने जाते थे और अब ....?  कहा जाता हैं एकता में जो शक्ति है वो किसी अकेले इन्सान में नहीं होती और ये बात बिलकुल सही है क्योंकि हमने अपनी आँखों से एकता, एकजुटता की शक्ति को देखा है! फिर चाहे वह युवा संगठन हो या फिर 'अन्नाका समर्थन करने वालों का संगठन, हम सब इसकी ताकत को जानते हैं और हमारे देश की सरकार भी एकता की ताकत से भली-भाँति परिचित है! किन्तु मैं यहाँ बात कर रहा हूँ, अपने पारिवारिक संगठन की, या संयुक्त परिवार की जो अब नाम के बचे हैं! एक समय था जब हम किसी के घर जाते थे, तो वहाँ पर हमारी मुलाकात एक ही परिवार के कई सदस्यों से होती थी! घर में मौजूद घर का सबसे मजबूत स्तम्भ जिस पर पूरा घर-परिवार टिका हुआ होता है और वो हैं उस घर के बुजुर्ग दादाजी-दादीजी, अगर ये नहीं होते तो ऐसा लगता है जैसे हमें सही राह दिखाने वाला कोई  नहीं है! दूसरा मजबूत स्तम्भ माता-पिता जो जीवनभर अपने बच्चों के साथ रहना चाहते हैं, किन्तु अब ऐसा समय आ गया है कि, आज के बच्चे ही अपने माता-पिता के साथ नहीं रहना चाहते! माता-पिता उन्हें किसी बंदिश से कम नहीं लगते! आज घर-घर में, हर घर में चार बर्तन खनकने की आवाजें तेज होती जा रही हैं! हर इंसान के साथ माता-पिता का साथ लम्बे समय तक होना अत्यंत जरुरी होता है! जिन लोगों के लिए माता-पिता बोझ होते हैं उन्हें ये मालूम होना चाहिए जिनके सिर पर माता-पिता का साया नहीं रहता वो बच्चे या तो बहुत अच्छे बनते हैं या फिर? .. वही अन्य रिश्तों में चाचा-चाची,भैया-भाभी ऐसे कई रिश्ते एक ही परिवार में देखने को मिलते थे जिनसे कोई भी घर एक परिवार बनता है ! ऐसे परिवार में जाने से,उनसे मुलाकात करके मन को एक अनूठी खुशी मिलती है  और ऐसे परिवार से मिलता है घर का प्यार, अपनापन, मान-सम्मान, और सच्चे रिश्तों की महक! किन्तु जैसे-जैसे समय तेजी से गुजर रहा है और जब से  इन्सान अपने आप से मतलब रखने लगा है, सिर्फ अपने बारे में सोचने लगा है, परिवार के अन्य सदस्यों की परवाह नहीं उनके लिए मान-सम्मान नहीं तो ऐसी स्थिति में शुरू हो जाता है विघटन और बदलाव उस परिवार की एकता में ! आज की भागमभाग में अगर इंसान के पास कुछ नहीं है तो वो है सब्र और संयम, जो किसी भी इंसान की सबसे बड़ी ताकत होती है ! किन्तु आज हम देख रहे हैं कि, इंसान आज कितनी जल्दी अपना सब्र खो देता  है, जिस कारण से आये दिन घर परिवार में लड़ाई झगड़े की स्थिति बन रही है और यही स्थिति आयेदिन होने वाले  झगड़ों के कारण इंसान अपनों से अपने परिवार से दूर होता जा रहा है या मजबूरी बश अपने ही घर परिवार के बीच दीवारें खींच रहा है! जब किसी परिवार के बीच दीवारें खींचती है तो क्या स्थिति होती है उस घर परिवार की? एक बड़ा सा घर बदल जाता है  चिड़ियों के छोटे-छोटे घोंसलों के जैसा, जिसे हम घर नहीं  पत्थर से निर्मित एक मकान कहते है! आज इस विघटन और बदलाव से हमारा कितना अहित हो रहा है शायद हम  यह सब जानते है फिर भी जानकार अनजान हैं! हमें परिवारों में हुए विघटन और बदलाव का असर अब देखने को मिल रहा है!  अपने बच्चों में क्षीण होते संस्कार के रूप में, माता-पिता के खोते हुए सम्मान के रूप में, बदलती रिश्तों की परिभाषा और उनकी महक के रूप में, खत्म होती अपनों के प्रति अपनत्व की भावना के रूप में, पथभ्रष्ट होती युवा पीढ़ी के रूप में, और ये सब कुछ हुआ हमारे घर-परिवार के बँटने से उनके बीच मनमुटाव की दीवार से! जब से इंसान ने अकेले रहना शुरू किया है, सिर्फ अपने बारे में सोचा है तब से बदल गयी हर  घर-परिवार की कहानी! आज घर-परिवार की बात करना बड़ी बेमानी सी लगती है ...... और ऐसा लगता है जैसे हमें अपना जीवन सिर्फ अपने लिए जीना है ...... किन्तु जब हम अपने भरे-पूरे परिवार के साथ बिताए लम्हों को याद करते हैं तो मन बड़ा ही दुखी होता है और महसूस होता है कि, जो मजा अपनों के साथ है वो अकेले में नहीं ....... किन्तु आज ये संभव भी तो नहीं है क्योंकि माता-पिता अपना घर नहीं छोड़ना चाहते और बच्चों को अपना भविष्य बनाने के लिए घर से बाहर निकलना ही होता है ....... क्या उचित है क्या अनुचित, क्या सही है क्या गलत?  इस बात का जवाब शायद ही किसी के पास हो, सभी के पास अपने-अपने तर्क हैं जिन पर बहस करना बेकार है!  फिर भी एक कटु सत्य हमारे सामने हैं, और वो ये है की ....... हमारे घर-आँगन खत्म हो गए या फिर आज बदल रहे हैं  छोटी-छोटी कोठरियों में ।


लेखक के बारे में- बचपन से लेकर आज तक जीवन के हर पहलु को बहुत करीब से देखा है मैंने ! आज भी लगा हुआ हूँ 'जीवन की आपाधापी  में! मेरे एक अजीज हैं, जिन्होंने मुझे लिखने के लिए प्रेरित किया! मैं शिवपुरी मध्य-प्रदेश का रहने बाला हूँ! पिछले 15 वर्षों से शेयर मार्केट से जुड़ा हुआ हूँ!
संपर्क: c/o कार्वी स्टॉक ब्रोकिंग लिमिटेड, एक्सिस बैंक के पास आगरा- बोम्बे मार्ग, शिवपुरी (म. प्र.) 473551, मो. 09993228299, Email-sanjaystock07@gmail.com

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माटी समाज सेवी संस्था का अभिनव प्रयास
एक बच्चे की जिम्मेदारी आप भी लें...
माटी समाज सेवी संस्था, समाज के विभिन्न जागरुकता अभियान के क्षेत्र में काम करती रही है। पिछले वर्षों में संस्था ने समाज से जुड़े विभिन्न विषयों जैसे शिक्षा, स्वास्थ्य,पर्यावरण, प्रदूषण आदि क्षेत्रों में काम करते हुए जागरुकता लाने का प्रयास किया है। इसी कड़ी में गत कई वर्षों से यह संस्था बस्तर के जरुरतमंद बच्चों की शिक्षा के लिए धन एकत्रित करने का अभिनव प्रयास कर रही है।
बस्तर कोण्डागाँव जिले के कुम्हारपारा ग्राम में बरसों से कारीगर आदिवासियों के बीच काम रही “साथी समाज सेवी संस्था” द्वारा संचालित स्कूल “साथी राऊंड टेबल गुरूकुल” में ऐसे आदिवासी बच्चों को शिक्षा दी जाती है जिनके माता-पिता उन्हें पढ़ाने में असमर्थ होते हैं। प्रति वर्ष एक बच्चे की शिक्षा में लगभग चार हजार रुपए तक खर्च आता है। शिक्षा सबको मिले इस विचार से सहमत अनेक लोग पिछले कई सालों से माटी संस्था के माध्यम से “साथी राऊंड टेबल गुरूकुल” के बच्चों की शिक्षा की जिम्मेदारी लेते आ रहे हैं। पिछले कई वर्षों से माटी समाज सेवी संस्था उक्त स्कूल के लगभग 15 से 20 बच्चों के लिए शिक्षा शुल्क एकत्रित कर रही है। अनुदान देने वालों में शामिल हैं- प्रियंका-गगन सयाल, लंदन मैनचेस्टर, डॉ. प्रतिमा-अशोक चंद्राकर रायपुर, तरुण खिचरिया, दुर्ग (पत्नी श्रीमती कुमुदिनी खिचरिया की स्मृति में), श्री राजेश चंद्रवंशी (पिता श्री अनुज चंद्रवंशी की स्मृति में), क्षितिज चंद्रवंशी (पिता श्री राकेश चंद्रवंशी की स्मृति में)। अरुणा-नरेन्द्र तिवारी रायपुर, पी. एस. राठौर- अहमदाबाद। इस मुहिम में नए युवा सदस्य जुड़ें हैं- आयुश चंद्रवंशी रायपुर, जिन्होंने अपने पहले वेतन से एक बच्चे की शिक्षा की जिम्मेदारी उठायी है, जो स्वागतेय पहल है। इस प्रयास में यदि आप भी शामिल होना चाहते हैं तो आपका तहे दिल से स्वागत है। आपके इस अल्प सहयोग से एक बच्चा शिक्षित होकर राष्ट्र की मुख्य धारा में शामिल तो होगा ही साथ ही देश के विकास में भागीदार भी बनेगा। तो आइए देश को शिक्षित बनाने में एक कदम हम भी बढ़ाएँ। सम्पर्क- माटी समाज सेवी संस्था, पंडरी, रायपुर (छग) 492 004, मोबा.94255 24044, Email- drvermar@gmail.com

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