August 18, 2012

लघुकथाएँ



-आशीष दशोत्तर
खलल
संतो के प्रवचन सुनने का उन्हें शौक था। नियमित प्रवचन सुनते। कोई संत नगर में आता तो रोज सुनने जाते। अब तो ऊपर वाले ने उनकी सुन ली थी। टेलीविजन पर रोज प्रवचन आने लगे। वे सुबह से ले कर शाम तक अपने समय के खाली हिस्सों को इन्हीं प्रवचनों से भरते। उनकी इस भक्ति भावना को देखते हुए उन्हें धार्मिक प्रवृत्ति का व्यक्ति समझा जाने लगा था।
एक दिन वे टेलीविजन पर प्रवचन सुन रहे थे। संत कह रहे थे- बुजुर्गों की सेवा में ही जीवन का सार है। जिसने अपने बुजुर्गों की उपेक्षा की, उसका जीवन नर्क के समान है।
वे प्रवचन में खो चुके थे। संत वाणी को सुन उनकी ऑंखों से अश्रुधारा बह रही थी। तभी खट्-खट् की आवाज से उनका ध्यान भंग हुआ। पीछे के द्वार पर बूढ़े पिता दस्तक दे रहे थे। वे उठे और उनके पास पहुँचे। लगभग चिल्लाते हुए बोले, क्या है? सभी कुछ तो धर दिया है आपके कमरे में। अब तो चैन से रहने दो। यह कहते हुए वे पिता को घसीटते हुए उनके कमरे में छोड़ आए। आते वक्त उन्होंने पिता के कक्ष के द्वार की साँकल बाहर से जड़ दी। अब प्रवचन सुनने में कोई खलल नहीं होगा। यह सोचते हुए वे पुन: टेलीविजन के सामने बैठ गए।
             परम्परा
बहू घर में पहली बार आई तो सास ने बहू को वही साड़ी दी जो उन्हें अपनी सास से मिली थी। यह घर की परम्परा थी। सास अपनी बहू को साड़ी देती, जिसे वह गोदभराई के वक्त पहनती। बहू का जब गोदभराई का समय आया तो सास ने याद दिलाया कि बहू वही साड़ी पहनना।
बहू ने मुँह बिचकाकर कहा- वो साड़ी और मैं पहनूँ? उसे तो मैंने कभी का बर्तन वाली बाई को दे दिया। कितनी ओल्ड फैशन और घिसी-पिटी साड़ी थी। उसे मैं पहन लेती तो मेरा दम ही घुट जाता।
सास, इस वक्त चुपचाप खड़े अपने बेटे और बोलती बहू के बीच खड़ी नई परम्परा से खुद को जोडऩे की असफल कोशिश कर रही थी। 

लेखक के बारे में- जन्म -05 अक्टूबर 1972, शिक्षा एम.एस.सी.(भौतिक शास्त्र) एम.ए.(हिन्दी)ए एम.एल.बी.ए बी.एड ए बी.जे.एम.सी.ए स्नातकोत्तर में हिन्दी पत्रकारिता पर विशेष अध्ययन। प्रकाशन- मध्यप्रदेश साहित्य अकादमी द्वारा काव्य संग्रह-खुशियाँ कैद नहीं होती, ग़ज़ल संग्रह- लकीरें, भगतसिंह की पत्रकारिता पर पुस्तक- समर में शब्द। नवसाक्षर लेखन के तहत पांच कहानी पुस्तकें प्रकाशित, आठ वृत्तचित्रों में संवाद लेखन एवं पाश्र्व स्वर। पुरस्कार- साहित्य अकादमी म.प्र. द्वारा युवा लेखन, साहित्य अमृत द्वारा युवा व्यंग्य लेखन, म.प्र. शासन द्वारा आयोजित अस्पृष्यता निवारणार्थ गीत लेखन स्पर्धा में पुरस्कृत। साहित्य गौरव पुरस्कार। किताबघर प्रकाशन के आर्य स्मृति सम्मान के तहत कहानी, संकलन हेतु चयनित एवं प्रकाशित। सम्प्रति- आठ वर्षों तक पत्रकारिता के उपरान्त अब शासकीय सेवा में।
संपर्क- 39, नागर वास, रतलाम (म.प्र.) 457001, मो. 098270-84966, Email- ashish.dashottar@yahoo.com

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