August 25, 2012

यदि बागडोर होती शासन की मेरे हाथों में ...

खोना और पाना

- सीमा सिंघल

हमारे पास शुरू से ही हर चीज के दो विकल्प रहे हैं ...  खोना और पाना अथवा करो या मरो, जीवन इन्हीं दो विकल्पों के आधार पर टिका हुआ है हर सिक्के के दो पहलू होते हैं... कई बार होता है स्थितियों को हम उसी रूप में स्वीकार कर लें वे जैसी हैं या फिर उन्हें बदलने का उत्तरदायित्व स्वीकार कर लें...
वर्तमान में देश के जो हालात हैं उन्हें हम स्वीकार कर चुके हैं क्योंकि उसे बदलने के लिए एक हाथ एक विचार या किसी एक व्यक्ति की आवश्यकता नहीं बल्कि प्रत्येक व्यक्ति को आगे आना होगा .. देश में समस्याओं की बात करें तो समस्याओं का गढ़ बन चुका है यह चौतरफा लूट-खसोट मची हुई है, यह सब मेरे कहने की जरूरत नहीं न ही किसी को बताने की बल्कि हर जागरूक व्यक्ति यही विचार रखता है अपने मन में लेकिन यहां किसी की तरफ उंगली उठाने के लिए किसी से नहीं कहा जा रहा है ना ही किसी को दोषी ठहरा न्याय-अन्याय की परिधी में उसका आंकलन किया जा रहा है बल्कि एक शक्तिशाली विचार दिया गया है ..
यदि बागडोर होती शासन की मेरे हाथों में .. यह विचार अपने आप में ही एक ऊर्जा देता हुआ सा है एक आम इंसान से हटकर आप स्वयं सत्तासीन होकर अपनी कल्पना को साकार कर सकते हैं जिन खामियों को लेकर आप मन ही मन कुढ़ते रहते हैं सरकार को दोषी ठहराते हैं यदि सुधार करने के लिए एक अवसर मिले तो आप क्या कर सकते हैं देश के लिए ... देश को आज जिस बात से ज्यादा खतरा है वह है भ्रष्टाचार  का। जब तक इसको रोकने के कारगर उपाय नहीं होंगे तब हर व्यवस्था पर पानी फिरता रहेगा चाहे वह शिक्षा का क्षेत्र हो या आतंकवाद को रोकने के उपाय हो..या फिर बढ़ती मँहगाई से निपटने के तरीके सबसे पहले इसके लिए समूह बनाकर भ्रष्टाचार का खात्मा करना ही होगा तभी हर क्षेत्र में विकास संभव है... जैसा कि शुरू में ही मैंने कहा है एक हाथ एक विचार या किसी एक व्यक्ति की आवश्यकता नहीं बल्कि प्रत्येक व्यक्ति को आगे आना होगा... यहां वो स्थिति तो रही नहीं कि हवा जिधर को बह रही हो हम भी उधर हो लें बल्कि हवाओं का रूख बदलने के लिए तैयार हों।

http://sadalikhna.blogspot.in

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लेखकों से अनुरोध...

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माटी समाज सेवी संस्था का अभिनव प्रयास
एक बच्चे की जिम्मेदारी आप भी लें...
माटी समाज सेवी संस्था, समाज के विभिन्न जागरुकता अभियान के क्षेत्र में काम करती रही है। पिछले वर्षों में संस्था ने समाज से जुड़े विभिन्न विषयों जैसे शिक्षा, स्वास्थ्य,पर्यावरण, प्रदूषण आदि क्षेत्रों में काम करते हुए जागरुकता लाने का प्रयास किया है। इसी कड़ी में गत कई वर्षों से यह संस्था बस्तर के जरुरतमंद बच्चों की शिक्षा के लिए धन एकत्रित करने का अभिनव प्रयास कर रही है।
बस्तर कोण्डागाँव जिले के कुम्हारपारा ग्राम में बरसों से कारीगर आदिवासियों के बीच काम रही “साथी समाज सेवी संस्था” द्वारा संचालित स्कूल “साथी राऊंड टेबल गुरूकुल” में ऐसे आदिवासी बच्चों को शिक्षा दी जाती है जिनके माता-पिता उन्हें पढ़ाने में असमर्थ होते हैं। प्रति वर्ष एक बच्चे की शिक्षा में लगभग चार हजार रुपए तक खर्च आता है। शिक्षा सबको मिले इस विचार से सहमत अनेक लोग पिछले कई सालों से माटी संस्था के माध्यम से “साथी राऊंड टेबल गुरूकुल” के बच्चों की शिक्षा की जिम्मेदारी लेते आ रहे हैं। पिछले कई वर्षों से माटी समाज सेवी संस्था उक्त स्कूल के लगभग 15 से 20 बच्चों के लिए शिक्षा शुल्क एकत्रित कर रही है। अनुदान देने वालों में शामिल हैं- प्रियंका-गगन सयाल, लंदन मैनचेस्टर, डॉ. प्रतिमा-अशोक चंद्राकर रायपुर, तरुण खिचरिया, दुर्ग (पत्नी श्रीमती कुमुदिनी खिचरिया की स्मृति में), श्री राजेश चंद्रवंशी (पिता श्री अनुज चंद्रवंशी की स्मृति में), क्षितिज चंद्रवंशी (पिता श्री राकेश चंद्रवंशी की स्मृति में)। अरुणा-नरेन्द्र तिवारी रायपुर, पी. एस. राठौर- अहमदाबाद। इस मुहिम में नए युवा सदस्य जुड़ें हैं- आयुश चंद्रवंशी रायपुर, जिन्होंने अपने पहले वेतन से एक बच्चे की शिक्षा की जिम्मेदारी उठायी है, जो स्वागतेय पहल है। इस प्रयास में यदि आप भी शामिल होना चाहते हैं तो आपका तहे दिल से स्वागत है। आपके इस अल्प सहयोग से एक बच्चा शिक्षित होकर राष्ट्र की मुख्य धारा में शामिल तो होगा ही साथ ही देश के विकास में भागीदार भी बनेगा। तो आइए देश को शिक्षित बनाने में एक कदम हम भी बढ़ाएँ। सम्पर्क- माटी समाज सेवी संस्था, पंडरी, रायपुर (छग) 492 004, मोबा.94255 24044, Email- drvermar@gmail.com

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