January 31, 2012

जूते कितने फायदेमंद

लंदन में एक महिला नंगे पांव चलती है। वह अपने साथ कई अन्य लोगों को नंगे पैर चलने की ट्रेनिंग भी देती है। आम लोग इन्हें हैरानी भरी नजरों से देखते हैं। सवाल पूछने पर महिला बताती है कि नंगे पांव चलना सेहत के लिए क्यों फायदेमंद चाहे सर्दी-गर्मी हो, पथरीला रास्ता हो या कोई अन्य मुश्किल एना टूम्ब्स नंगे पांव ही चलना पसंद करती हैं। पर्सनल ट्रेनिंग कंपनी बेयरफुट रनिंग यूके की 35 साल की सह संस्थापक एना अपने ग्राहकों को भी ऐसा ही करने की सलाह और ट्रेनिंग देती हैं। एना के मुताबिक अक्सर लोग उन्हें हैरतभरी नजरों से और खास किस्म का मुंह बनाकर देखते हैं।

इससे बेफिक्र एना और उनके साथी डेविड रॉबिन्सन लंदन के पार्कों में लोगों को नंगे पैर चलने का अभ्यास कराते हैं। इसके फायदे बताते हैं। एक तरफ स्पोर्ट्स का सामान बनाने वाली कंपनियां हैं जो हर साल जूतों के नए मॉडल बाजार में उतारती हैं। शरीर विज्ञान के विशेषज्ञों से सलाह लेकर कंपनियां कोशिश करती हैं कि ऐसे जूते बनाए जाएं जो इंसान को नंगे पैर भागने जैसा एहसास कराएं लेकिन सुरक्षा के साथ।
लेकिन एना टूम्ब्स की राय इससे अलग है। बेयरफुट का आधार क्रिस्टोफर मैकडाउगल की किताब 'बॉर्न टू रनÓ है। किताब में मैकडाउगल ने मेक्सिको के ताराहुमारा कबीले का जिक्र किया है। इस कबीले के लोग नंगे पैर काफी दूरी तक तेज रफ्तार से दौड़ सकते हैं। हैरानी की बात है कि आदिवासियों को ऐसी चोटें भी नहीं आती हैं जैसी तमाम साजोसामान से लैस विकसित देशों के एथलीटों को आती हैं।
विशेषज्ञ एड़ी वाले जूतों पर भी बहस कर रहे हैं। यह बात साफ नहीं हो सकी है कि क्या एड़ी वाले जूते इंसान के लिए अच्छे हैं या फिर जूतों की वजह से इंसान ज्यादा चोटिल होता है। बेयरफुट के समर्थक कहते हैं कि प्राकृतिक ढंग, दौडऩे का सबसे अच्छा तरीका है। पहले गद्देदार पंजा जमीन पर पडऩा चाहिए। इसके बाद तलवे के बीच के खाली हिस्से को मुडऩा चाहिए। फिर हल्की सी एड़ी जमीन को छूएगी लेकिन तब तक पांव अगले कदम के लिए उठ जाना चाहिए। बेयरफुट से जुड़े लोग कहते हैं कि जूते इस प्राकृतिक लय को तोड़ते हैं। जूतों की वजह से एथलीट दौड़ते समय पहले एड़ी को जमीन पर पटकते हैं।
विज्ञान पत्रिका नेचर में 2010 में इस संबंध में एक रिपोर्ट छपी। हावर्ड यूनिवर्सिटी में क्रमिक विकास जीव विज्ञान के प्रोफेसर डेनियल लीबरमान ने पाषाण काल के इंसानों के दौडऩे की प्रवृत्ति का अध्ययन किया। वह यह जानने की कोशिश कर रहे थे कि हमारे पूर्वज कैसे नंगे पैर उबड़- खाबड़ धरती पर दौड़ा करते थे।
लीबरमान और उनके सहयोगियों ने केन्या और ब्रिटेन के धावकों पर शोध किया। शोध में पता चला कि जो धावक नंगे पैर दौड़ते हैं वह हमेशा पहले पंजा जमीन पर रखते हैं, एड़ी बाद में जमीन छूती है। वहीं जो धावक जूतों के साथ दौड़ते हैं उनमें से अधिकतर एड़ी पहले जमीन पर रखते हैं। कड़े, नरम और कई अन्य तरह की सतहों पर जब धावकों के कदमों का असर आंका गया तो पता चला कि जो पंजा पहले रखते हैं, वे कम टकराव बल पैदा करते हैं। एड़ी पहले रखने वाले ज्यादा टकराव बल पैदा करते हैं। नंगे पैर दौडऩे वाले पैरों की मांसपेशियों का भी बेहतर तरीके से इस्तेमाल करते हैं।
बेयरफुट के एक कार्यक्रम के लिए लंदन आए लीबरमान कहते हैं, अभी पर्याप्त आंकड़े नहीं है जिनके आधार पर कहा जाए कि आपके लिए क्या अच्छा है और क्या खराब?

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एक बच्चे की जिम्मेदारी आप भी लें

अभिनव प्रयास- माटी समाज सेवी संस्था, जागरुकता अभियान के क्षेत्र में काम करती रही है। इसी कड़ी में गत कई वर्षों से यह संस्था बस्तर के जरुरतमंद बच्चों की शिक्षा के लिए धन एकत्रित करने का अभिनव प्रयास कर रही है। बस्तर कोण्डागाँव जिले के कुम्हारपारा ग्राम में बरसों से आदिवासियों के बीच काम रही 'साथी समाज सेवी संस्था' द्वारा संचालित स्कूल 'साथी राऊंड टेबल गुरूकुल' में ऐसे आदिवासी बच्चों को शिक्षा दी जाती है जिनके माता-पिता उन्हें पढ़ाने में असमर्थ होते हैं। इस स्कूल में पढऩे वाले बच्चों को आधुनिक तकनीकी शिक्षा के साथ-साथ परंपरागत कारीगरी की नि:शुल्क शिक्षा भी दी जाती है। प्रति वर्ष एक बच्चे की शिक्षा में लगभग चार हजार रुपये तक खर्च आता है। शिक्षा सबको मिले इस विचार से सहमत अनेक जागरुक सदस्य पिछले कई सालों से माटी समाज सेवी संस्था के माध्यम से 'साथी राऊंड टेबल गुरूकुल' के बच्चों की शिक्षा की जिम्मेदारी लेते आ रहे हैं। प्रसन्नता की बात है कि नये साल से एक और सदस्य हमारे परिवार में शामिल हो गए हैं- रामेश्वर काम्बोज 'हिमांशु' नई दिल्ली, नोएडा से। पिछले कई वर्षों से अनुदान देने वाले अन्य सदस्यों के नाम हैं- प्रियंका-गगन सयाल, मेनचेस्टर (यू.के.), डॉ. प्रतिमा-अशोक चंद्राकर रायपुर, सुमन-शिवकुमार परगनिहा, रायपुर, अरुणा-नरेन्द्र तिवारी रायपुर, डॉ. रत्ना वर्मा रायपुर, राजेश चंद्रवंशी, रायपुर (पिता श्री अनुज चंद्रवंशी की स्मृति में), क्षितिज चंद्रवंशी, बैंगलोर (पिता श्री राकेश चंद्रवंशी की स्मृति में)। इस प्रयास में यदि आप भी शामिल होना चाहते हैं तो आपका तहे दिल से स्वागत है। आपके इस अल्प सहयोग से एक बच्चा शिक्षित होकर राष्ट्र की मुख्य धारा में शामिल तो होगा ही साथ ही देश के विकास में भागीदार भी बनेगा। तो आइए देश को शिक्षित बनाने में एक कदम हम भी बढ़ाएँ। सम्पर्क- माटी समाज सेवी संस्था, रायपुर (छ. ग.) 492 004, मोबा. 94255 24044, Email- drvermar@gmail.com

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