October 23, 2010

रंग- बिरंगी दुनिया

चिम्पांजी बने दूल्हा दुल्हन
भारत में बारिश न होने पर टोटके के रुप में मेंढक- मेंढकी का ब्याह रचाने के समाचार तो आते ही रहते हैं पर पिछले दिनों पूर्वी चीन के एन्हुई प्रांत की राजधानी हेफी के वाइल्डपार्क में दो चिम्पांजियों का पार्क के सदस्यों ने मिलकर बाकायदा विधिवत ब्याह रचाकर एक शानदार पार्टी का आयोजन किया। दुल्हन बनी मादा चिम्पांजी का नाम वेंनजिंग है जो एन्हुई प्रांत में पैदा होने वाली पहली चिम्पांजी है तथा दूल्हा बने चिम्पांजी को गिनीया से कुछ साल पहले लाया गया था। इस शादी से बाराती और घराती तो खुश थे ही लेकिन सबसे ज्यादा खुश नजर आ रहे थे यह नवविवाहित जोड़ा। जरा देखिए तो हाथों में हाथ डाले यह जोड़ा एक- दूसरे का साथ पाकर खुशी से फूला नहीं समा रहा है। आइए हम सब मिलकर इनके सफल दामपत्य जीवन की कामना करें।
मोटर साइकिल देवता का मंदिर!
जब आस्था की बात आती है तो फिर चाहे वह पत्थर की मूरत हो या फिर कोई मशीनी वस्तु, मानव की भक्ति देखते ही बनती है। ऐसी ही आस्था और भक्ति का केन्द्र बन गया है राजस्थान के जोधपुर मार्ग में पाली से 20 किलोमीटर की दूरी पर स्थित चोटिला गांव के नजदीक 'बुलेट बाबा' के नाम से मशहूर एक मंदिर, जहां 350 सीसी की एक रॉयल इनफील्ड मोटर साइकिल बुलेट देवता के रूप में विराजमान है। विश्वास तो नहीं होता पर है यह सत्य, क्योंकि इस मंदिर में प्रतिदिन सैकड़ों श्रद्धालु अपनी सुरक्षित यात्रा के लिए प्रार्थना करने आते हैं।
इस मोटर साइकिल के मालिक का नाम ओम सिंह था। गांव वाले बताते हैं कि 21 साल पहले गर्मियों की एक रात ओम बाबा पाली से चोटिला लौट रहे थे तभी उनकी मोटर साइकिल फिसलकर एक पेड़ से टकरा गई और घटनास्थल पर ही उनकी मौत हो गई।
ओम बाबा की मौत के बाद उनकी मोटर साइकिल को पुलिस स्टेशन ले जाया गया, लेकिन दूसरे दिन वह मोटर साइकिल फिर उसी दुर्घटना स्थल पर पाई गई। इसे एक चमत्कार मान कर तब से ही गांव वाले अपनी सकुशल यात्रा के लिए इस मोटरसाइकिल की पूजा करने लगे। मंदिर में मोटर साइकिल के पीछे ओम सिंह की एक बड़ी सी तस्वीर लगा दी गई है। मान्यता है कि जो व्यक्ति इस मंदिर में रुककर प्रार्थना नहीं करता वह एक खतरनाक यात्रा पर होता है।
रोटी खाते ही शेरू बन गया अछूत!
इस दुनिया के ढंग निराले हैं। मालिक के लिए वफादार कहलाने वाले एक कुत्ते को भी जाति भेदभाव का शिकार होना पड़ा। मध्य प्रदेश के मुरैना जिले में एक राजपूत परिवार के पालतू कुत्ते, 'शेरू' को मानिकपुर गांव की एक दलित महिला सुनीता जाटव ने अमृतलाल किरार के पालतू कुत्ते को रोटी क्या खिला दी उसका मालिक अपने पालतू शेरू को घर ले जाने को तैयार ही नहीं हुआ।
किस्सा कुछ इस तरह है- रोज की तरह सुनीता खेतों में काम कर रहे अपने पति चंदन जाटव के लिए खाना लेकर गई थी। चंदन के खाना खाने के बाद एक रोटी बच गई तो उसकी पत्नी ने वह रोटी शेरू को खिला दी। लेकिन शेरू को यह रोटी खिलाना सुनीता के लिए मुसीबत की जड़ बन गया। शेरू के मालिक अमृतलाल ने उसे रोटी खिलाते देख लिया था वह सुनीता पर भड़क गया। अमृतलाल का कहना था कि रोटी खिलाकर सुनीता ने उसके कुत्ते को अछूत बना दिया है। इसके बाद मामले ने इतना तूल पकड़ा कि कुत्ते पर फैसला करने के लिए गांव की पंचायत बुलानी पड़ी, जिसने यह फैसला दिया कि एक दलित महिला ने कुत्ते को अछूत बनाया है इसलिए अब उसे ही कुत्ते को पालना होगा। पंचायत ने महिला पर 15,000 हजार रूपए का जुर्माना भी लगाया। पंचायत के आदेश के मुताबिक शेरु को अब इस दलित महिला सुनीता के साथ ही रहना होगा। अब बेचारे शेरू को क्या पता था कि एक रोटी का टुकड़ा खाते ही उसे अछूत की तरह जिंदगी गुजारनी पड़ेगी।

0 Comments:

एक बच्चे की जिम्मेदारी आप भी लें

अभिनव प्रयास- माटी समाज सेवी संस्था, जागरुकता अभियान के क्षेत्र में काम करती रही है। इसी कड़ी में गत कई वर्षों से यह संस्था बस्तर के जरुरतमंद बच्चों की शिक्षा के लिए धन एकत्रित करने का अभिनव प्रयास कर रही है। बस्तर कोण्डागाँव जिले के कुम्हारपारा ग्राम में बरसों से आदिवासियों के बीच काम रही 'साथी समाज सेवी संस्था' द्वारा संचालित स्कूल 'साथी राऊंड टेबल गुरूकुल' में ऐसे आदिवासी बच्चों को शिक्षा दी जाती है जिनके माता-पिता उन्हें पढ़ाने में असमर्थ होते हैं। इस स्कूल में पढऩे वाले बच्चों को आधुनिक तकनीकी शिक्षा के साथ-साथ परंपरागत कारीगरी की नि:शुल्क शिक्षा भी दी जाती है। प्रति वर्ष एक बच्चे की शिक्षा में लगभग चार हजार रुपये तक खर्च आता है। शिक्षा सबको मिले इस विचार से सहमत अनेक जागरुक सदस्य पिछले कई सालों से माटी समाज सेवी संस्था के माध्यम से 'साथी राऊंड टेबल गुरूकुल' के बच्चों की शिक्षा की जिम्मेदारी लेते आ रहे हैं। प्रसन्नता की बात है कि नये साल से एक और सदस्य हमारे परिवार में शामिल हो गए हैं- रामेश्वर काम्बोज 'हिमांशु' नई दिल्ली, नोएडा से। पिछले कई वर्षों से अनुदान देने वाले अन्य सदस्यों के नाम हैं- प्रियंका-गगन सयाल, मेनचेस्टर (यू.के.), डॉ. प्रतिमा-अशोक चंद्राकर रायपुर, सुमन-शिवकुमार परगनिहा, रायपुर, अरुणा-नरेन्द्र तिवारी रायपुर, डॉ. रत्ना वर्मा रायपुर, राजेश चंद्रवंशी, रायपुर (पिता श्री अनुज चंद्रवंशी की स्मृति में), क्षितिज चंद्रवंशी, बैंगलोर (पिता श्री राकेश चंद्रवंशी की स्मृति में)। इस प्रयास में यदि आप भी शामिल होना चाहते हैं तो आपका तहे दिल से स्वागत है। आपके इस अल्प सहयोग से एक बच्चा शिक्षित होकर राष्ट्र की मुख्य धारा में शामिल तो होगा ही साथ ही देश के विकास में भागीदार भी बनेगा। तो आइए देश को शिक्षित बनाने में एक कदम हम भी बढ़ाएँ। सम्पर्क- माटी समाज सेवी संस्था, रायपुर (छ. ग.) 492 004, मोबा. 94255 24044, Email- drvermar@gmail.com

-0-

लेखकों सेः उदंती.com एक सामाजिक- सांस्कृतिक वेब पत्रिका है। पत्रिका में सम- सामयिक लेखों के साथ पर्यावरण, पर्यटन, लोक संस्कृति, ऐतिहासिक- सांस्कृतिक धरोहर से जुड़े लेखों और साहित्य की विभिन्न विधाओं जैसे कहानी, व्यंग्य, लघुकथाएँ, कविता, गीत, ग़ज़ल, यात्रा, संस्मरण आदि का भी समावेश किया गया है। आपकी मौलिक, अप्रकाशित रचनाओं का स्वागत है। रचनाएँ कृपया Email-udanti.com@gmail.com पर प्रेषित करें।

उदंती.com तकनीकि सहयोग - संजीव तिवारी

टैम्‍पलैट - आशीष