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May 1, 2022

कविताएँः 1. चार गुना सुंदर दृश्य

 - केशव शरण

1.

अपनी दो आँखों से देखा

कोई दृश्य मुझे

जितना सुंदर लगता है

उसका चार गुना

चार आँखों से

मुझे दो आँखें ढूंढ़नी हैं

 

चार टांगें होती हैं तो

रास्ता हँसते-बोलते

कट जाता है

और दृश्य भी

चार गुना नज़दीक

नज़र आता है

 

दो टांगों से

दूना दूर

चार गुना सुंदर दृश्य

 

2. कितना दूर कितना क़रीब

 

मैं मुफ़्त में वन देख रहा हूँ

या टिकट लेकर उपवन

या गलियों से होता हुआ

जा रहा हूँ किसी द्वार तक

या बैठा हूँ कहीं

थक-हारकर

 

मैं कितना दूर हूँ

लोगों से

मैं कितना क़रीब हूँ

लोगों के

मुझे कुछ इसका

अनुमान नहीं है

 

शहर अनजान नहीं है

और जगह भी

मैं जहाँ हूँ

सम्पर्कः एस 2/564 सिकरौल, वाराणसी  221002मो. 9415295137

जीवन दर्शन- मार्श मेलो थ्योरी- धैर्य की धारणा

-विजय जोशी
 पूर्व ग्रुप महाप्रबंधक, भेल, भोपाल (म. प्र.)

जीवन में कर्म के पथ पर हमारा प्रयास शीघ्रातिशीघ्र सफलता प्राप्त करने का होता है। पर इसमें अनेक बार अवरोध भी अनिवार्य हैं, जिनका प्रयास हमारे मनोबल को तोड़कर हमें विफलता की ओर धकेलने का होता है। ऐसे पलों में हमारा प्रयास तो होना चाहिए बगैर धैर्य खोए समस्या के समाधान का, लेकिन यह इतना आसान भी तो नहीं है। मुसीबत के समय हम अमूमन बहुत जल्दी घबरा कर धैर्य खोने लगते हैं तथा इस तरह समस्या से पार पाने की क्षमता खो देते हैं।

    एक बार एक शिक्षक ने इस दिशा में प्रयोग के अंतर्गत छात्रों को स्वादिष्ट टॉफी देते हुए कहा कि दस मिनट की प्रतीक्षा के बाद ही इसे छूना है और यह कहते हुए वे बाहर चले गए। कक्षा में सन्नाटा छा गया। टॉफी की सुगंध सर्वत्र व्याप्त थी। खुद को रोक पाने का हर पल कठिन लग रहा था। समय समाप्ति पर जब शिक्षक कक्षा में वापिस लौटे तो पाया कि केवल सात ऐसे छात्र थे जिन्होंने टॉफी को छुआ तक न था। शेष सब स्वाद, सुगंध एवं  रंग की चर्चा में व्यस्त थे। शिक्षक ने जिनका नाम प्रोफेसर वाल्टर था सातों के नाम अपनी डायरी में लिख लिए।

  कुछ वर्षों बाद प्रोफेसर ने जब उन सात छात्रों के बारे में जानकारी एकत्र की तो पता चला कि वे सब अपने अपने क्षेत्र में सफलता प्राप्त कर चुके थे, जबकि शेष सब एक आम आदमी का जीवन जीते हुए कठिनाइयों से बावस्ता थे।

   अब प्रोफेसर वाल्टर ने ने जो निष्कर्ष निकाला वह अद्भुत था और वह यह कि जो आदमी अपने जीवन में दस मिनट तक भी धैर्य नहीं रख सकता वह कभी आगे नहीं बढ़ सकता। इस शोध को मार्श मेलो थ्योरी के नाम से शोहरत प्राप्त हुई, क्योंकि प्रोफेसर वाल्टर ने छात्रों को जो टॉफी दी थी उसका नाम मार्श मेलो था।

    बात का निष्कर्ष मात्र इतना है कि धैर्य का गुण आदमी के सहन करने की सीमा को सहनशक्ति में परिवर्तित कर देता है, जिसके कारण वह कठिन से कठिन परिस्थिति में भी निराश या विचलित नहीं होते हुए एक असाधारण व्यक्तित्व बन जाता है।

यदि बाधाएँ मिलीं हमें तो उन बाधाओं के ही साथ जिनसे बाधा बोध न हो वह सहनशक्ति भी आई हाथ।

सम्पर्क: 8/ सेक्टर-2, शांति निकेतन (चेतक सेतु के पास), भोपाल- 462023, मो. 09826042641, E-mail- v.joshi415@gmail.com

Apr 1, 2022

उदंती.com, अप्रैल- 2022


वर्ष- 14, अंक- 8

शिक्षण एक बहुत ही महान पेशा है, जो किसी व्यक्ति के चरित्र, क्षमता और भविष्य को आकार देता है। अगर लोग मुझे एक अच्छे शिक्षक के रूप में याद करते हैं, तो यह मेरे लिए सबसे बड़ा सम्मान होगा।                                                        - ए. पी. जे. अब्दुल कलाम

इस अंक में  

अनकहीः बच्चे पढ़ना- लिखना भूल गए? - डॉ. रत्ना वर्मा

आलेखः विज्ञान सम्मत है भारतीय काल-गणना -प्रमोद भार्गव

आज़ादी का अमृत महोत्सवः स्व की पुनर्स्थापना -अरुण शेखर

कविताः युद्ध के बीच - डॉ. नूतन गैरोला

विश्व पृथ्वी दिवसः पृथ्वी और मानवता को बचाने के लिए आहार - ज़ुबैर सिद्दिकी

कविता- पृथ्वी दिवसः पेड़ श्रीमद् भगवद् गीता का संदेश सुनाते हैं - समीर उपाध्याय

आधुनिक बोध कथा- 4ः गधे की कीमत - सूरज प्रकाश

कविताः यूक्रेन युद्ध - बसन्त राघव

इतिहास का तथ्यात्मक सत्यः ‘द कश्मीर फाइल्स’-प्रमोद भार्गव

कहानीः फ़ैसला - प्रेम गुप्ता ‘मानी’

यात्रा- संस्मरणः नेतरहाट- बाँस के जंगल या चीड़वन - रश्मि शर्मा

दो लघुकथाः 1. वात्सल्य की हिलोरें, 2. धन्ना सेठ - सुधा भार्गव

लघुकथाः मिल्कियत - संदीप तोमर

उर्दू व्यंग्यः कस्टम डिपार्टमेंट में मुशायरा - मूल रचना – इब्ने इंशा, अनुवाद – अखतर अली

बाल कविताः मैं भी झूमूँ गाऊँ - श्याम सुन्दर श्रीवास्तव ‘कोमल’

किताबेंः  डॉक्टर साहिबा का डॉगीज़ बीमार है  - नूतन मिश्रा

कविताः मेरी धरती  - मंगला शर्मा

विज्ञानः साफ-सफाई की अति हानिकारक हो सकती है - स्रोत फीचर्स

प्रेरकः लाल फूल वाला पेड़ – निशांत

जीवन दर्शनः मुडा: एक जापानी मंत्र- काल करे सो आज कर -विजय जोशी