February 12, 2019

जिज्ञासा से सँवरे जीवन

जिज्ञासा से सँवरे जीवन
- विजय जोशी
(पूर्व ग्रुप महाप्रबंधक, भेल, भोपाल)
इंसानी भूख दो किस्म की होती है। एक आंतरिक या जिस्मानी जैसे रोटी, कपड़ा, मकान और दूसरी आंतरिक या रूहानी जिसे आप जिज्ञासा का नाम दे सकते हैं।  दरअसल जिज्ञासा की जमीन पर ही ज्ञान का पौधा पनपता है। जो जिज्ञासु नहीं वह जीवन  में कुछ नहीं जान पाता। यह प्रतिभाशाली इंसान  की सबसे महत्त्वपूर्ण विशेषता  है।
जिज्ञासा जीवन का सबसे महत्त्वपूर्ण अंग है। इसके अभाव में इंसान तो जागरूक रह पाता है और ही ज़िंदादिल। यह उसे सदैव सजग रखती है। हर चीज को बारीकी से देखकर उसके हल का हिस्सा बनना मन में उमंग एवं उत्साह का सृजन करती है। इतिहास प्रसिद्ध सारे महापुरुषों को देखि यदि ऐसा होता तो तो राजकुमार सिद्धार्थ गौतम बुद्ध बन पाते और ही वर्धमान महावीर स्वामी। जीवन के प्रति जिज्ञासा ने ही उन्हें केवल इस स्थान तक पहुँचाया;बल्कि वे सारे संसार के पथ प्रदर्शक बनकर भी उभर सके।
अब प्रश्न यह उपस्थित होता है कि इसे कैसे विकसित किया जाए। तो प्रस्तुत हैं कुछ उपाय-
सक्रिय मानस- एक्टिव माइंड,यह आपके मस्तिष्क को निष्क्रिय के बजाय सक्रिय  रखता है। जिज्ञासु व्यक्ति सदैव प्रश्न पूछता है और अपने मस्तिष्क में उनके उत्तर खोजता है। यह मस्तिष्क को उसी प्रकार क्रियाशील रखता है जैसे कि व्यायाम, जिससे आपकी मांसपेशियाँ मजबूत रहती हैं। इसी तर्ज पर जिज्ञासा मस्तिष्क का व्यायाम है जो उसे जाग्रत, सक्रिय एवं क्रियाशील बनाकर जीवंत रखती है।
चौकस मन- आब्सर्वेंट माइंड,जो नए आइडिया या सुझावों के लिये आपको सतत सजग रखता है। जब आप किसी चीज के बारे में उत्सुक होते हैं तब आपका दिमाग नए नए आयडिया की उम्मीद रखते हुए खोजी बन जाता है और जैसे ही कोई आयडिया मानस पटल पर उभरता है आपका मस्तिष्क तुरंत लपक लेता है। इसके विपरित जब आपका मानस उन्हें पहचानने के लिये तैयार या तत्पर नहीं, तब वह आपके सामने से गुजर जाता है और आप उसे खो देते हैं। इसलिये जरा सोचिये कितने सारे आयडिया आपने जिज्ञासा के अभाव में खो दिये होंगे।
संभावनाएँ - पासिबिलिटिज, जिज्ञासु होते ही आपके सामने होता है एक नया संसार पूरी संभावनाओं के साथ, जो अन्यथा दृष्टिगत नहीं होता। संभावनाएँ हमारे नार्मल जीवन की सतह के नीचे रहतीं हैं और उसके नीचे जाकर गहराई में देखने के लिये आपको गहरे पानी में पैठना या उतरना होगा। अपार संभावनाओं की कोलंबसी खोज ही आपको लक्ष्य तक पहुँचा सकती है।
जीवन में उत्तेजना- एक्साइटमेंट, जिज्ञासु व्यक्ति के जीवन में बोरियत का कोई स्थान नहीं। यह तो सुस्तीपूर्ण और ही सामान्य प्रक्रिया है। ऐसे इंसान को हर चीज नई और आकर्षक लगती है। वैसे ही जैसे बच्चे के लिये नए खिलौने। ऐसे व्यक्तियों का जीवन एकरसता से दूर साहसिक जीवन का मार्ग प्रशस्त करता है।
मस्तिष्क को खुला रखें - यह नितांत आवश्यक है कि आपका मानस जिज्ञासु हो। सीखने, भूलने तथा पुन: सीखने के प्रति दिमाग के दरवाजे खुले हों। कुछ चीजों को आप जानते हैं और विश्वास रखते हैं कि वे गलत हैं, लेकिन फिर भी उन्हीं संभावनाओं स्वीकार कर पाने के परिवर्तन के लिये तैयार रहें।
अस्वीकारें- यदि आप संसार को वैसा ही स्वीकार करते हैं कि जैसा कि वह है, बगैर गहराई में जाकर खोज करने के तो यह वह स्थिति है जिसमें आप अपनी पवित्र जिज्ञासा को खो देंगे। चीजों को वैसा ही स्वीकरें, जैसी वे दिखती हैं बल्कि गहराई में उतरकर देखने की प्रतिभा का स्वयं में विकास करें।
प्रश्न पूछें अविराम- गहराई तक उतरने का सबसे सरल शर्तिया सूत्र है प्रश्न पूछना। यह क्या है? यह ऐसे ही क्यों बना है? यह कब बना था? किसने बनाया? यह कहां से आता है ? कैसे कार्य करता है ? क्या, क्यों, कब, कौन, कहां और कैसे इत्यादि जिज्ञासु जन के सबसे सही मित्र हैं। 
उकतानाजब आप  किसी चीज को बोरिंग कहते हैं तो वह संभावनाओं के द्वार बंद कर देती है। जिज्ञासु किसी भी चीज को कभी बोरिंग नहीं कहेगा। दरअसल वे तो इसे नये संसार का प्रवेश द्वार मानते हैं और यदि उनके पास समय का अभाव हो तो भी इस दरवाजे को खुला ही रखेंगे।
मजाक में सीखना- यदि आप किसी भी चीज को बोरिंग मानते हैं तो फिर उसकी गहराई तक कभी नहीं उतर पाएँगे। लेकिन यदि आप सीखने को फन मानते हैं तो फिर अवश्य ही तल तक पहुँच पाएँगे। अत: चीजों को स्वाभाविक और फन के नज़रिये से देखने की आदत डालिये और सीखने की कला का आनंद लीजिये।
विविध अध्ययन- केवल एक ही चीज पर केंद्रित मत रहिये। आँखें खुली रखते हुए सब ओर सब कुछ देखें। यह दृष्टिकोण आपके लिये दूसरे संसार के द्वार खोलेगा एवं संभावनाओं से परीचित कराते हुए  आपके अंदर जिज्ञासा की चाहत की अग्नि को प्रज्वलित करेगा। इसका सबसे सुलभ  और सरल और उत्तम उपाय है अलग अलग विषय की पुस्तकों का अध्ययन करना। हर बार एक नये विषय पर पुस्तक उठाएँ एवं अपने मन मस्तिष्क में आत्मसात करने का प्रयास करें। इसकी सहायता से आपको एक नये संसार का दिग्दर्शन होगा।
यही है जीवन में जिज्ञासा का सूत्र। आप देखिये बालक में ज्ञान गृहण करने की शक्ति कितनी अपार होती है। जन्म लेते ही वह हर चीज का उत्सुकता की नज़र से अवलोकन करता है; इसीलिए मस्तिष्क का विकास भी आरंभिक अवस्था में ही सर्वाधिक होता है। बाद के वर्षों में तो जिज्ञासा के अभाव में मस्तिष्क कुंद होने लगता है।  
यही हैं वे छोटे मोटे उपाय जो जिज्ञासा से ज्ञान और ज्ञान से अनुभव के मार्ग पर चलने में आपकी सहायता करेंगे। हर नया प्रयोग आरंभ में थोड़ा कठिन लगता है, लेकिन यदि आपने उसे अपने मन और मानस में स्वीकार कर लिया तो फिर संतोष तथा सफलता के अपार द्वार आपके लिये खुल जाएँगे।
सम्पर्क: 8/ सेक्टर-2, शांति निकेतन (चेतक सेतु के पास), भोपाल- 462023, मो। 09826042641E-mail- vjoshi415@gmailcom

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एक बच्चे की जिम्मेदारी आप भी लें

अभिनव प्रयास- माटी समाज सेवी संस्था, जागरुकता अभियान के क्षेत्र में काम करती रही है। इसी कड़ी में गत कई वर्षों से यह संस्था बस्तर के जरुरतमंद बच्चों की शिक्षा के लिए धन एकत्रित करने का अभिनव प्रयास कर रही है। बस्तर कोण्डागाँव जिले के कुम्हारपारा ग्राम में बरसों से आदिवासियों के बीच काम रही 'साथी समाज सेवी संस्था' द्वारा संचालित स्कूल 'साथी राऊंड टेबल गुरूकुल' में ऐसे आदिवासी बच्चों को शिक्षा दी जाती है जिनके माता-पिता उन्हें पढ़ाने में असमर्थ होते हैं। इस स्कूल में पढऩे वाले बच्चों को आधुनिक तकनीकी शिक्षा के साथ-साथ परंपरागत कारीगरी की नि:शुल्क शिक्षा भी दी जाती है। प्रति वर्ष एक बच्चे की शिक्षा में लगभग चार हजार रुपये तक खर्च आता है। शिक्षा सबको मिले इस विचार से सहमत अनेक जागरुक सदस्य पिछले कई सालों से माटी समाज सेवी संस्था के माध्यम से 'साथी राऊंड टेबल गुरूकुल' के बच्चों की शिक्षा की जिम्मेदारी लेते आ रहे हैं। प्रसन्नता की बात है कि नये साल से एक और सदस्य हमारे परिवार में शामिल हो गए हैं- रामेश्वर काम्बोज 'हिमांशु' नई दिल्ली, नोएडा से। पिछले कई वर्षों से अनुदान देने वाले अन्य सदस्यों के नाम हैं- प्रियंका-गगन सयाल, मेनचेस्टर (यू.के.), डॉ. प्रतिमा-अशोक चंद्राकर रायपुर, सुमन-शिवकुमार परगनिहा, रायपुर, अरुणा-नरेन्द्र तिवारी रायपुर, डॉ. रत्ना वर्मा रायपुर, राजेश चंद्रवंशी, रायपुर (पिता श्री अनुज चंद्रवंशी की स्मृति में), क्षितिज चंद्रवंशी, बैंगलोर (पिता श्री राकेश चंद्रवंशी की स्मृति में)। इस प्रयास में यदि आप भी शामिल होना चाहते हैं तो आपका तहे दिल से स्वागत है। आपके इस अल्प सहयोग से एक बच्चा शिक्षित होकर राष्ट्र की मुख्य धारा में शामिल तो होगा ही साथ ही देश के विकास में भागीदार भी बनेगा। तो आइए देश को शिक्षित बनाने में एक कदम हम भी बढ़ाएँ। सम्पर्क- माटी समाज सेवी संस्था, रायपुर (छ. ग.) 492 004, मोबा. 94255 24044, Email- drvermar@gmail.com

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