March 24, 2018

जीवन दर्शन

टाटा संस्कृति 
- विजय जोशी
(पूर्व ग्रुप महाप्रबंधक, भेल, भोपाल)
पारसी समुदाय के लिए मेरे मन में गहरी श्रद्धा है। यह एक सिद्धांतप्रिय कौम है। आज से कई वर्ष पूर्व जब ईरान  से चलकर यह कौम अपने बुज़ुर्गों सहित भारत आई तो गुजरात में काठियावाड़ तट पर उनकी नाव लगी। काठियावाड़ नरेश से उन्होंने जब शरण हेतु संदेश भेजा तो राजा ने उन्हें दूध से पूरा भरा गिलास भिजवा दिया यानी यह पहले से भरा हुआ है, कोई गुजाइंश नहीं है। तब एक पारसी बुजुर्ग ने उसमें चीनी मिलाकर लौटाया कि हम बगैर अतिरिक्त जगह की चाह के दूध में शक्कर की मिठास सदृश्य मिलजुल कर रहेंगे।
सबसे बड़ी बात तो यह है कि उसी दौर में नरेश को दिए गए 3 वचनों पर वे आज भी कायम है। पहला धर्म परिवर्तन का प्रयास नहीं करेंगे। दूसरा यहाँ की भाषा अंगीकार करेंगे तथा तीसरा देश के उत्थान के प्रति समर्पित रहेंगे।
इसीलिए आपने देखा ही होगा कि पारसी केवल जन्मजात होता हैं, परिवर्तित नहीं। दूसरा वे भाषा गुजराती बोलते हैं। और तीसरा जहाँगीर रतनजी दादाभाई टाटा से लेकर रतन टाटा तक सबका योगदान सर्वविदित है।
किसी भी कार्य की संस्कृति का आधार होती है उसकी संस्कृति और सिद्धांतों के प्रति समर्पण। संरचना तो केवल माध्यम हैं। आत्मा तो उसके मूल मूल्यों में बसी रहती हैं। लंबे दौर तक केवल वे ही बने रहते हैं, जो अच्छे, सच्चे  और ईमानदार तरीके से अपने कार्य को अंजाम देते हैं।
इसका सबसे बड़ा उदारण ही टाटा समूह का है जो वर्षों से समर्पण, उदारता व परोपकार की भावना से न केवल खुद आगे बढ़ा है, अपितु देश और सहयोगियों की उन्नति का आधार भी बना है।
टाटा समूह के चारों अक्षरों का अपने आप में अर्थ निहित है। वे उसकी संस्कृति अंग बन गए है पहले टी का अर्थ है ट्रस्ट यानी विश्वास, दूसरा कहलाता है एटीट्युड अर्थात मानसिकता। तीसरी टी का अर्थ है टेलेंट यानी प्रतिभा और अंतिम अक्षर ए ठहरता है एप्टीट्यूड या क्षमता पर।

T / टी :  विश्वास (Trust)
A /  :  मानसिकता (Attitude)
T / टी :  प्रतिभा  (Talent)
A / ए :  क्षमता (Aptitude)

कहा जाता है न कि कुछ चीजें कभी नहीं बदलतीं। टाटा समूह की नौकरी तब से लेकर आज तक के सारे दौर के दरमियान सर्वश्रेष्ठ मानी गई है। बचपन में सुनी एक कहावत आज भी मेरे जेहन में गूंजती है -
नौकरी हो टाटा
जूता हो बाटा
26 / 11 मुबई हमले में तबाह ताज होटल इसी भावना के तहत एक वर्ष के भीतर पूरी साज सज्जा के साथ पुन: देश के समक्ष अवतरित हो गया। आपको यह जानकर भी आश्चर्य होगा कि न केवल अपने कर्मचारियों वरन होटल के सामने बैठकर व्यवसाय करने वाले, घायल खोमचाधारी व्यक्तियों तक को पूरी आर्थिक सहायता प्रदान कर पुन: व्यवस्थापित किया गया।
ऐसे उदात्त, दरियादिली और परोपकार की ओर कितने उदारण हमारे सामने हैं। यही भाव आदमी को ऊपर उठाता है और समाज में सफलता के साथ सम्मान की निधि भी प्रदान करता हैं।
सम्पर्क- 8/ सेक्टर-2, शांति निकेतन (चेतक सेतु के पास) भोपाल- 462023, मो. 09826042641, E-mail- v.joshi415@gmail.com

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एक बच्चे की जिम्मेदारी आप भी लें

अभिनव प्रयास- माटी समाज सेवी संस्था, जागरुकता अभियान के क्षेत्र में काम करती रही है। इसी कड़ी में गत कई वर्षों से यह संस्था बस्तर के जरुरतमंद बच्चों की शिक्षा के लिए धन एकत्रित करने का अभिनव प्रयास कर रही है। बस्तर कोण्डागाँव जिले के कुम्हारपारा ग्राम में बरसों से आदिवासियों के बीच काम रही 'साथी समाज सेवी संस्था' द्वारा संचालित स्कूल 'साथी राऊंड टेबल गुरूकुल' में ऐसे आदिवासी बच्चों को शिक्षा दी जाती है जिनके माता-पिता उन्हें पढ़ाने में असमर्थ होते हैं। इस स्कूल में पढऩे वाले बच्चों को आधुनिक तकनीकी शिक्षा के साथ-साथ परंपरागत कारीगरी की नि:शुल्क शिक्षा भी दी जाती है। प्रति वर्ष एक बच्चे की शिक्षा में लगभग चार हजार रुपये तक खर्च आता है। शिक्षा सबको मिले इस विचार से सहमत अनेक जागरुक सदस्य पिछले कई सालों से माटी समाज सेवी संस्था के माध्यम से 'साथी राऊंड टेबल गुरूकुल' के बच्चों की शिक्षा की जिम्मेदारी लेते आ रहे हैं। प्रसन्नता की बात है कि नये साल से एक और सदस्य हमारे परिवार में शामिल हो गए हैं- रामेश्वर काम्बोज 'हिमांशु' नई दिल्ली, नोएडा से। पिछले कई वर्षों से अनुदान देने वाले अन्य सदस्यों के नाम हैं- प्रियंका-गगन सयाल, मेनचेस्टर (यू.के.), डॉ. प्रतिमा-अशोक चंद्राकर रायपुर, सुमन-शिवकुमार परगनिहा, रायपुर, अरुणा-नरेन्द्र तिवारी रायपुर, डॉ. रत्ना वर्मा रायपुर, राजेश चंद्रवंशी, रायपुर (पिता श्री अनुज चंद्रवंशी की स्मृति में), क्षितिज चंद्रवंशी, बैंगलोर (पिता श्री राकेश चंद्रवंशी की स्मृति में)। इस प्रयास में यदि आप भी शामिल होना चाहते हैं तो आपका तहे दिल से स्वागत है। आपके इस अल्प सहयोग से एक बच्चा शिक्षित होकर राष्ट्र की मुख्य धारा में शामिल तो होगा ही साथ ही देश के विकास में भागीदार भी बनेगा। तो आइए देश को शिक्षित बनाने में एक कदम हम भी बढ़ाएँ। सम्पर्क- माटी समाज सेवी संस्था, रायपुर (छ. ग.) 492 004, मोबा. 94255 24044, Email- drvermar@gmail.com

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