June 14, 2016

जीवन-दर्शन


सीटी बजाओ
कचरा हटाओ
- विजय जोशी
जीवन में दैनिक कार्य उसे गतिवान रखने के साथ ही साथ ज़िन्दा (( Survival) रहने के लिए आवश्यक हैं। ये कार्य आदत का अभिन्न अंग हो जाते हैं। इनके म्पादन से न केवल आपके अंदर ऊर्जा बनी रहती है, अपितु उद्देश्य के प्रति ललक भी अन्तस् में कायम रहती है। लेकिन एक बात जो इससे अधिक संतोष व स्फूर्ति में अभिवृद्धि कर सकती है वह है,  कुछ ऐसा मूल्य वृद्धि (Value Addition) वाला कार्य जिसमें बहुत अधिक संसाधन, सुविधा की आवश्यकता भी न हो और जो आपको गहन संतोष के भाव से अभिभूत कर सके।
     पिछले दिनों अपने गोवा प्रवास के दौरान मुझे यह अनुभव प्राप्त हुआ। गोवावासी बेहद शांतिप्रिय एवं कर्मठ कौम हैं, देश के अन्यान्य प्रदेशों में फैले दुर्गुणों से कोसों दूर, पर्यावरण के प्रति पूरी तरह समर्पित।
     अपवाद हर जगह संभव हैं। यह मूलत: इंसानी फितरत है। सो कुछ लोग पर्यावरण प्रदूषण में भी सहभागी हैं। सौ नौजवानों के एक छोटे से समूह ने पर्यावरण संरक्षण के प्रति सजग करने के लिए एक अभिनव प्रयास के रूप में  ‘‘सीटी बजाओ कचरा हटाओं ‘‘ समूह का गठन किया है। ये लोग संध्या समय समुद्र तट पर स्थित होटलों, खोमचाधारी स्टालों के पास  ‘‘कचरा हटाओ ‘‘ लिखे प्ले कार्ड के साथ पहुँचकर पूरे क्षेत्र में फैल जाते हैं। समूह के हर सदस्य के पास एक सीटी होती है।
     आगे का योगदान बहुत अभिनव है। वे सब ओर निगाह रखते हैं और जैसे ही किसी ने खाने के पश्चात अपनी जूठी प्लेट जमीन पर फेंकी, वालंटियर सीटी बजाते हुए तुरंत उसके पास पहुँच जाता है। सीटी सुनते ही शेष सब नौजवान भी उन सज्जन के पास इकट्ठे हो जाते हैं और समवेत स्वर में सीटी बजाने लगते हैं। और वह तब तक जब तक कि वह व्यक्ति शर्मिंदा होकर अपनी जूठी प्लेट खुद उठाकर निर्धारित जगह पर न रख दे। इससे होटल व खोमचेवालों को भी सबक मिल जाता है।
     अब तो इस समूह से अनेक बच्चे, छात्राएँ, वरिष्ठ एवं जागरूक नागरिक भी जुड़ चुके हैं, जो शाम को इस तरह अपने अतिरिक्त समय का सार्थक उपयोग कर पा रहे हैं। एक दिन तो समुद्र तट पर घूमने आई छात्राओं का समूह स्वप्रेरित होकर खुद ब खुद इस अभियान से जुड़ गया।
      मुख्य बात यह है कि अब इस अभियान से नगर निगम प्रशासक एस. रोड्रिक्स एवं पेट्रिशिया पिंटो न केवल प्रभावित हुए, बल्कि समूह के साथ सम्मिलित हो गए।
      सारांश में यह कि यदि आपके आस पास घटित हो रही किसी अवांछित गतिविधि देखकर आपके मन में यदि कोई बात उभरे, तो तुरंत उसके निदान हेतु जुट जाएँ । काम कोई भी छोटा या बड़ा नहीं  होता,  बल्कि करने वाला उसे महान बनाता है। महात्मा गाँधी ने नमक कानून तोडऩे जैसे छोटे से मिशन में मात्र 79 साथियों सहित दांडी मार्च आरंभ किया था, जिसमें अंतत: लाखों लोग जुड़ गए। यही है सत्कार्य की महिमा।
मैं अकेला ही चला था, जानिबे- मंजि़ल मगर
लोग साथ आते गए और कारवां बनता गया।
सम्पर्क: 8/ सेक्टर-2, शांति निकेतन (चेतक सेतु के पास) भोपाल- 462023, मो. 09826042641,
Email- v.joshi415@gmail.com

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लेखकों से अनुरोध...

उदंती.com एक सामाजिक- सांस्कृतिक वेब पत्रिका है। पत्रिका में सम- सामयिक मुद्दों के साथ पर्यावरण को बचाने तथा पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए उठाए जाने वाले कदमों को प्राथमिकता से प्रकाशित किया जाता है। समाजिक जन जागरण के विभिन्न मुद्दों को शामिल करने के साथ ऐतिहासिक सांस्कृतिक धरोहर से जुड़े लेखों और साहित्य की विभिन्न विधाओं जैसे कहानी, कविता, गीत, गजल, व्यंग्य, निबंध, लघुकथाएं और संस्मरण आदि का भी समावेश किया गया है। उपर्युक्त सभी विषयों पर मौलिक अप्रकाशित रचनाओं का स्वागत है। आप अपनी रचनाएँ Email-udanti.com@gmail.comपर प्रेषित करें।

माटी समाज सेवी संस्था का अभिनव प्रयास
एक बच्चे की जिम्मेदारी आप भी लें...
माटी समाज सेवी संस्था, समाज के विभिन्न जागरुकता अभियान के क्षेत्र में काम करती रही है। पिछले वर्षों में संस्था ने समाज से जुड़े विभिन्न विषयों जैसे शिक्षा, स्वास्थ्य,पर्यावरण, प्रदूषण आदि क्षेत्रों में काम करते हुए जागरुकता लाने का प्रयास किया है। इसी कड़ी में गत कई वर्षों से यह संस्था बस्तर के जरुरतमंद बच्चों की शिक्षा के लिए धन एकत्रित करने का अभिनव प्रयास कर रही है।
बस्तर कोण्डागाँव जिले के कुम्हारपारा ग्राम में बरसों से कारीगर आदिवासियों के बीच काम रही “साथी समाज सेवी संस्था” द्वारा संचालित स्कूल “साथी राऊंड टेबल गुरूकुल” में ऐसे आदिवासी बच्चों को शिक्षा दी जाती है जिनके माता-पिता उन्हें पढ़ाने में असमर्थ होते हैं। प्रति वर्ष एक बच्चे की शिक्षा में लगभग चार हजार रुपए तक खर्च आता है। शिक्षा सबको मिले इस विचार से सहमत अनेक लोग पिछले कई सालों से माटी संस्था के माध्यम से “साथी राऊंड टेबल गुरूकुल” के बच्चों की शिक्षा की जिम्मेदारी लेते आ रहे हैं। पिछले कई वर्षों से माटी समाज सेवी संस्था उक्त स्कूल के लगभग 15 से 20 बच्चों के लिए शिक्षा शुल्क एकत्रित कर रही है। अनुदान देने वालों में शामिल हैं- प्रियंका-गगन सयाल, लंदन मैनचेस्टर, डॉ. प्रतिमा-अशोक चंद्राकर रायपुर, तरुण खिचरिया, दुर्ग (पत्नी श्रीमती कुमुदिनी खिचरिया की स्मृति में), श्री राजेश चंद्रवंशी (पिता श्री अनुज चंद्रवंशी की स्मृति में), क्षितिज चंद्रवंशी (पिता श्री राकेश चंद्रवंशी की स्मृति में)। अरुणा-नरेन्द्र तिवारी रायपुर, पी. एस. राठौर- अहमदाबाद। इस मुहिम में नए युवा सदस्य जुड़ें हैं- आयुश चंद्रवंशी रायपुर, जिन्होंने अपने पहले वेतन से एक बच्चे की शिक्षा की जिम्मेदारी उठायी है, जो स्वागतेय पहल है। इस प्रयास में यदि आप भी शामिल होना चाहते हैं तो आपका तहे दिल से स्वागत है। आपके इस अल्प सहयोग से एक बच्चा शिक्षित होकर राष्ट्र की मुख्य धारा में शामिल तो होगा ही साथ ही देश के विकास में भागीदार भी बनेगा। तो आइए देश को शिक्षित बनाने में एक कदम हम भी बढ़ाएँ। सम्पर्क- माटी समाज सेवी संस्था, पंडरी, रायपुर (छग) 492 004, मोबा.94255 24044, Email- drvermar@gmail.com

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