August 12, 2015

सत्यवादी

    धर्म की परिभाषा
    - डॉ. बच्चन पाठक 'सलिल

सन् 1964 ईस्वी में जमशेदपुर में साम्प्रदायिक दंगा हुआ। लोग हिंसा, आक्रोश, भय और संदेह के साये में पल रहे थे। सैकड़ों लोगों की जानें गईं । रात में पूरी तरह कर्फ्यू लागू थे। बिष्टुपुर के एक मंदिर में पंडित रामानंद जी पुजारी थे। वे सत्यवादी और पक्के सनातनी थे। मंदिर में बीसों कच्चे घर थे जिनमे किरायेदार रहते थे।  मंदिर मैटी की ओर से पंडित जी ही कमरे आवंटित करते थे और किराया वसूलते थे।
एक दिन उनके गाँव का रहमान नाम का एक मुसलमान आया। वह शास्त्रीनगर से भाग कर आया था जहाँ दर्जनों हत्याएँ हो चुकी थी ।
उसने पंडित जी से पनाह माँगी । पंडित जी ने उसे एक कमरा दे दिया और कहा कि अपना नाम रघुवर बताना । असली नाम बताओगे तो बवाल खड़ा हो जागा ।
दो दिनों के बाद किसी तरह भेद खुल गया कि वह मुसलमान है। रात को करीब एक दस बजे कुछ लोग आए और बोले कि यहाँ एक मुसलमान छिपा है। हम उसे मैदान में ले जाकर काट डालेंगे।
पंडित जी घबराए। बोले- यहाँ सभी पुराने लोग हैं। एक रघुवर आया है, वह नया है , मैं उसे जानता हूँ। 
रघुवर बुलाया गया। वह थर- थर काँप रहा था। पंडित जी ने कहा- यह रघुवर है और यादव है। मैं इसे जानता हूँ । एक यादव पहलवान ने कहा- अगर पंडित जी इसका छुआ पानी पी लेंगे तो हम लोग मान जायेंगे।
पंडित जी धर्म-संकट में पड़े। उन्हें मानस की याद आई - पर हित सरिस धर्म नहि भाई। उन्होंने रघुवर के हाथ का पानी पी लिया। लोग चले गए।
दो चार दिनों के बाद दंगा शान्त हुआ। पंडित जी आश्वस्त थे कि मैंने धर्म का सही पालन किया है। जीव-रक्षा रुढ़ी पालन से अधिक महत्त्वपूर्ण होता है। 

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लेखकों से अनुरोध...

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माटी समाज सेवी संस्था का अभिनव प्रयास
एक बच्चे की जिम्मेदारी आप भी लें...
माटी समाज सेवी संस्था, समाज के विभिन्न जागरुकता अभियान के क्षेत्र में काम करती रही है। पिछले वर्षों में संस्था ने समाज से जुड़े विभिन्न विषयों जैसे शिक्षा, स्वास्थ्य,पर्यावरण, प्रदूषण आदि क्षेत्रों में काम करते हुए जागरुकता लाने का प्रयास किया है। इसी कड़ी में गत कई वर्षों से यह संस्था बस्तर के जरुरतमंद बच्चों की शिक्षा के लिए धन एकत्रित करने का अभिनव प्रयास कर रही है।
बस्तर कोण्डागाँव जिले के कुम्हारपारा ग्राम में बरसों से कारीगर आदिवासियों के बीच काम रही “साथी समाज सेवी संस्था” द्वारा संचालित स्कूल “साथी राऊंड टेबल गुरूकुल” में ऐसे आदिवासी बच्चों को शिक्षा दी जाती है जिनके माता-पिता उन्हें पढ़ाने में असमर्थ होते हैं। प्रति वर्ष एक बच्चे की शिक्षा में लगभग चार हजार रुपए तक खर्च आता है। शिक्षा सबको मिले इस विचार से सहमत अनेक लोग पिछले कई सालों से माटी संस्था के माध्यम से “साथी राऊंड टेबल गुरूकुल” के बच्चों की शिक्षा की जिम्मेदारी लेते आ रहे हैं। पिछले कई वर्षों से माटी समाज सेवी संस्था उक्त स्कूल के लगभग 15 से 20 बच्चों के लिए शिक्षा शुल्क एकत्रित कर रही है। अनुदान देने वालों में शामिल हैं- प्रियंका-गगन सयाल, लंदन मैनचेस्टर, डॉ. प्रतिमा-अशोक चंद्राकर रायपुर, तरुण खिचरिया, दुर्ग (पत्नी श्रीमती कुमुदिनी खिचरिया की स्मृति में), श्री राजेश चंद्रवंशी (पिता श्री अनुज चंद्रवंशी की स्मृति में), क्षितिज चंद्रवंशी (पिता श्री राकेश चंद्रवंशी की स्मृति में)। अरुणा-नरेन्द्र तिवारी रायपुर, पी. एस. राठौर- अहमदाबाद। इस मुहिम में नए युवा सदस्य जुड़ें हैं- आयुश चंद्रवंशी रायपुर, जिन्होंने अपने पहले वेतन से एक बच्चे की शिक्षा की जिम्मेदारी उठायी है, जो स्वागतेय पहल है। इस प्रयास में यदि आप भी शामिल होना चाहते हैं तो आपका तहे दिल से स्वागत है। आपके इस अल्प सहयोग से एक बच्चा शिक्षित होकर राष्ट्र की मुख्य धारा में शामिल तो होगा ही साथ ही देश के विकास में भागीदार भी बनेगा। तो आइए देश को शिक्षित बनाने में एक कदम हम भी बढ़ाएँ। सम्पर्क- माटी समाज सेवी संस्था, पंडरी, रायपुर (छग) 492 004, मोबा.94255 24044, Email- drvermar@gmail.com

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