August 14, 2013

नींद में खलल और याददाश्त

 नींद में खलल और याददाश्त
गहरी नींद में विघ्न और याददाश्त के बीच सीधा सम्बंध है। अर्थात जिन लोगों में धीमी गति की मस्तिष्क तरंगों की सक्रियता सबसे कम रही, उन्हें सबसे कम शब्द भी याद रहे। और इन दोनों चीज़ों, यानी गहरी नींद की कमी और याददाश्त की कमज़ोरी का सम्बंध दिमाग के एक हिस्से में ग्रे मैटर की कमी के साथ देखा गया। 
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नेचर न्यूरोसाइन्स में प्रकाशित एक ताज़ा शोध पत्र में बताया गया है कि उम्र बढऩे के साथ दिमाग के एक खास हिस्से में क्षति के चलते नींद में विघ्न पैदा होता है और याददाश्त भी कमज़ोर पड़ती है।
यह तो सर्वविदित है कि उम्र बढऩे के साथ मस्तिष्क की कोशिकाएँ धीरे-धीरे कम होती हैं, नींद में खलल पड़ता है और याददाश्त कमज़ोर होती है मगर सवाल यह है कि इन तीन चीज़ों के बीच कोई सम्बंध है क्या? और यदि कोई सम्बंध है, तो किस तरह का?
कैलिफोर्निया विश्वविद्यालय के तंत्रिका वैज्ञानिक ब्रायस मैंडर और उनके साथियों ने इस सवाल का जवाब पाने के लिए एक अध्ययन किया। उन्होंने 33 स्वस्थ वयस्कों को इस अध्ययन में शामिल किया- इनमें से 18 तो करीब 20 वर्ष उम्र के थे जबकि 15 उम्र के सातवें दशक में थे। इन सबके दिमाग ठीक-ठाक थे।
इन वालंटियर्स को शब्दों की कुछ जोडिय़ाँ याद करने को कहा गया और दस मिनट बाद वही शब्द याद करने को कहा गया। इसके बाद उन्हें रात भर सोने दिया गया। जब वे सो रहे थे तब शोधकर्ता उनके दिमाग की गतिविधियों को रिकॉर्ड करते रहे। अगले दिन सुबह वालंटियर्स को एक बार उसी सूची के शब्द याद करने को कहा गया। इस अभ्यास के दौरान उनके दिमाग का स्कैन भी जारी रहा।
जैसा कि पूर्व में किए गए अध्ययनों में देखा गया था, युवा वालंटियर्स के मुकाबले उम्रदराज़ वयस्क कम शब्द याद कर पाए। उम्रदराज़ लोगों में नींद के दौरान धीमी मस्तिष्क तरंगों में भी कमी देखी गई। धीमी मस्तिष्क तरंगें गहरी नींद से सम्बंधित होती हैं।
विश्लेषण में यह देखा कि गहरी नींद में विघ्न और याददाश्त के बीच सीधा सम्बंध है। अर्थात जिन लोगों में धीमी गति की मस्तिष्क तरंगों की सक्रियता सबसे कम रही, उन्हें सबसे कम शब्द भी याद रहे। और इन दोनों चीज़ों, यानी गहरी नींद की कमी और याददाश्त की कमज़ोरी का सम्बंध दिमाग के एक हिस्से में ग्रे मैटर की कमी के साथ देखा गया। दिमाग के इस हिस्से को मध्यम प्री-फ्रंटल कॉर्टेक्स कहते हैं। शोधकर्ताओं का मत है कि उनके अध्ययन से पता चलता है कि गहरी नींद का अभाव, याददाश्त की कमज़ोरी और मध्यम प्री-फ्रंटल कॉर्टेक्स में ग्रे मैटर में कमी एक-दूसरे से स्वतंत्र नहीं हैं।
यह तो पहले से पता रहा है कि नींद आपको नई-नई बातों को याददाश्त में सहेजने में मदद करती है। यह भी पता रहा है कि धीमी मस्तिष्क तरंगें जानकारी को हिप्पोकैम्पस से मस्तिष्क के अन्य हिस्सों में स्थानांतरित करने में मददगार होती हैं जहाँ उन्हें दीर्घावधि याददाश्त में संजोया जाता है।
ताज़ा शोध से पता चलता है कि मध्यम प्री-फ्रंटल कॉर्टेक्स में क्षति के चलते धीमी मस्तिष्क तरंगें कम हो जाती हैं जिसका असर गहरी नींद और याददाश्त दोनों पर पड़ता है।
शोधकर्ताओं को उम्मीद है कि उनके इस अध्ययन से इस मामले में सार्थक हस्तक्षेप के कुछ रास्ते खुल सकते हैं। (स्रोत फीचर्स)

2 Comments:

Anita Lalit (अनिता ललित ) said...

अच्छी जानकारी देने का आभार...

~सादर!!!

Anita Lalit (अनिता ललित ) said...

अच्छी जानकारी देने का आभार...

~सादर!!!

एक बच्चे की जिम्मेदारी आप भी लें

अभिनव प्रयास- माटी समाज सेवी संस्था, जागरुकता अभियान के क्षेत्र में काम करती रही है। इसी कड़ी में गत कई वर्षों से यह संस्था बस्तर के जरुरतमंद बच्चों की शिक्षा के लिए धन एकत्रित करने का अभिनव प्रयास कर रही है। बस्तर कोण्डागाँव जिले के कुम्हारपारा ग्राम में बरसों से आदिवासियों के बीच काम रही 'साथी समाज सेवी संस्था' द्वारा संचालित स्कूल 'साथी राऊंड टेबल गुरूकुल' में ऐसे आदिवासी बच्चों को शिक्षा दी जाती है जिनके माता-पिता उन्हें पढ़ाने में असमर्थ होते हैं। इस स्कूल में पढऩे वाले बच्चों को आधुनिक तकनीकी शिक्षा के साथ-साथ परंपरागत कारीगरी की नि:शुल्क शिक्षा भी दी जाती है। प्रति वर्ष एक बच्चे की शिक्षा में लगभग चार हजार रुपये तक खर्च आता है। शिक्षा सबको मिले इस विचार से सहमत अनेक जागरुक सदस्य पिछले कई सालों से माटी समाज सेवी संस्था के माध्यम से 'साथी राऊंड टेबल गुरूकुल' के बच्चों की शिक्षा की जिम्मेदारी लेते आ रहे हैं। प्रसन्नता की बात है कि नये साल से एक और सदस्य हमारे परिवार में शामिल हो गए हैं- रामेश्वर काम्बोज 'हिमांशु' नई दिल्ली, नोएडा से। पिछले कई वर्षों से अनुदान देने वाले अन्य सदस्यों के नाम हैं- प्रियंका-गगन सयाल, मेनचेस्टर (यू.के.), डॉ. प्रतिमा-अशोक चंद्राकर रायपुर, सुमन-शिवकुमार परगनिहा, रायपुर, अरुणा-नरेन्द्र तिवारी रायपुर, डॉ. रत्ना वर्मा रायपुर, राजेश चंद्रवंशी, रायपुर (पिता श्री अनुज चंद्रवंशी की स्मृति में), क्षितिज चंद्रवंशी, बैंगलोर (पिता श्री राकेश चंद्रवंशी की स्मृति में)। इस प्रयास में यदि आप भी शामिल होना चाहते हैं तो आपका तहे दिल से स्वागत है। आपके इस अल्प सहयोग से एक बच्चा शिक्षित होकर राष्ट्र की मुख्य धारा में शामिल तो होगा ही साथ ही देश के विकास में भागीदार भी बनेगा। तो आइए देश को शिक्षित बनाने में एक कदम हम भी बढ़ाएँ। सम्पर्क- माटी समाज सेवी संस्था, रायपुर (छ. ग.) 492 004, मोबा. 94255 24044, Email- drvermar@gmail.com

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