August 25, 2012

यदि बागडोर होती शासन की मेरे हाथों में ...

बेटी होना कभी न खलता

 - अनामिका
धर्म- बंधन में हर कोई बंधता
हर प्राणी यहाँ कर्मठ बनता
छोटे बड़ों के करते सम्मान
बड़े  दिखाते बड़प्पन बातों ही बातों में
यदि बागडोर होती शासन की मेरे हाथों में ...

राजा- प्रजा का भेद न होता
कटुता का कोई बीज न बोता
रहते मिलजुल कुटुंब समान
ऊंच- नीच का भाव न पलता लोगों के जज्बातों में
यदि बागडोर होती शासन की मेरे हाथों में ...

अधिक न कोई संचय करता
कभी न कोई भूखों मरता
होता न कोई देश में बेईमान..
अमन- चैन से रहते, होते न शामिल उत्पातों में
यदि बागडोर होती शासन की मेरे हाथों में ...

हंसी- खुशाी से मिलजुल रहते
मानवता की इज्जत करते
मेहनत का सब करते मान
जीते ना झूठे वादों और खैरातों में
यदि बागडोर होती शासन की मेरे हाथों में ...

देह का व्यापार न चलता
बेटी होना कभी न खलता
नर- नारी होते एक समान
दहेज प्रथा का चलन न होता शादी की सौगातों में
यदि बागडोर होती शासन की मेरे हाथों में ...

काले धन का नाम न होता
महंगाई का काम न होता
डालर पर होती रुपए की उड़ान
डीजल- पेट्रोल होता सस्ता, इन मुश्किल हालातों में
यदि बागडोर होती शासन की मेरे हाथों में ...

शिक्षा का कर चहु-मुखी विकास
गरीबी का कर जड़ से विनाश
होता रोटी, कपड़ा और मकान,
मगन न रहते लोग हर पल घातों- प्रतिघातों में
यदि बागडोर होती शासन की मेरे हाथों में ...

मेरे बारे में -  
मेरे पास अपना कुछ नहीं है, जो कुछ है मन में उठी सच्ची भावनाओं का चित्र है और सच्ची भावनाएं चाहे वो दु:ख की हों या सुख की... मेरे भीतर चलती हैं... महसूस होती हैं... और मेरी कलम में उतर आती हैं...! 
संपर्क- C/O सुनीता खुराना, मकान नं. 2513,सेक्टर-16, फरीदाबाद- 121002 हरियाणा

6 Comments:

Anonymous said...

बहुत बहुत शुभकामनायें......आज अनामिका जी का नाम पता चल गया :-)

Kailash Sharma said...

काश ऐसा होता...बहुत सुन्दर प्रस्तुति...

मनोज कुमार said...

इतने अच्छे ख़्यालात हैं, हम तो चाहते हैं कि शासन ऐसे ही हाथों में हो।

प्रतिभा सक्सेना said...

यही तो मुश्किल है ,अपने शासन से खल-जनों को कैसे दूर रखेंगी वे तो बिना काज दाहिने-बायें आ खड़े होंगे?सबसे पहले तो उनसे निबटना है.

संजय भास्‍कर said...

वाह अनामिका दी अति सुन्दर... आज तो छा गयी आप .....!!

गिरिजा कुलश्रेष्ठ said...

उम्मीदों भरी संभावनाएं । काश ऐसा कभी हो । सुन्दर कविता ।

एक बच्चे की जिम्मेदारी आप भी लें

अभिनव प्रयास- माटी समाज सेवी संस्था, जागरुकता अभियान के क्षेत्र में काम करती रही है। इसी कड़ी में गत कई वर्षों से यह संस्था बस्तर के जरुरतमंद बच्चों की शिक्षा के लिए धन एकत्रित करने का अभिनव प्रयास कर रही है। बस्तर कोण्डागाँव जिले के कुम्हारपारा ग्राम में बरसों से आदिवासियों के बीच काम रही 'साथी समाज सेवी संस्था' द्वारा संचालित स्कूल 'साथी राऊंड टेबल गुरूकुल' में ऐसे आदिवासी बच्चों को शिक्षा दी जाती है जिनके माता-पिता उन्हें पढ़ाने में असमर्थ होते हैं। इस स्कूल में पढऩे वाले बच्चों को आधुनिक तकनीकी शिक्षा के साथ-साथ परंपरागत कारीगरी की नि:शुल्क शिक्षा भी दी जाती है। प्रति वर्ष एक बच्चे की शिक्षा में लगभग चार हजार रुपये तक खर्च आता है। शिक्षा सबको मिले इस विचार से सहमत अनेक जागरुक सदस्य पिछले कई सालों से माटी समाज सेवी संस्था के माध्यम से 'साथी राऊंड टेबल गुरूकुल' के बच्चों की शिक्षा की जिम्मेदारी लेते आ रहे हैं। प्रसन्नता की बात है कि नये साल से एक और सदस्य हमारे परिवार में शामिल हो गए हैं- रामेश्वर काम्बोज 'हिमांशु' नई दिल्ली, नोएडा से। पिछले कई वर्षों से अनुदान देने वाले अन्य सदस्यों के नाम हैं- प्रियंका-गगन सयाल, मेनचेस्टर (यू.के.), डॉ. प्रतिमा-अशोक चंद्राकर रायपुर, सुमन-शिवकुमार परगनिहा, रायपुर, अरुणा-नरेन्द्र तिवारी रायपुर, डॉ. रत्ना वर्मा रायपुर, राजेश चंद्रवंशी, रायपुर (पिता श्री अनुज चंद्रवंशी की स्मृति में), क्षितिज चंद्रवंशी, बैंगलोर (पिता श्री राकेश चंद्रवंशी की स्मृति में)। इस प्रयास में यदि आप भी शामिल होना चाहते हैं तो आपका तहे दिल से स्वागत है। आपके इस अल्प सहयोग से एक बच्चा शिक्षित होकर राष्ट्र की मुख्य धारा में शामिल तो होगा ही साथ ही देश के विकास में भागीदार भी बनेगा। तो आइए देश को शिक्षित बनाने में एक कदम हम भी बढ़ाएँ। सम्पर्क- माटी समाज सेवी संस्था, रायपुर (छ. ग.) 492 004, मोबा. 94255 24044, Email- drvermar@gmail.com

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