January 31, 2012

17 अगस्त 1945:


नेताजी सुभाष चंद बोस  का वह ऐतिहासिक भाषण
खुश रहें और आशावादी बने
भाइयों और बहनों। भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के इतिहास का एक महान अध्याय अब काफी निकट है। पूर्वी एशिया में रह रहे भारत की संतानों को इस अध्याय में एक स्थायी जगह मिलने वाली है।
देश की आजादी के लिए आपने तन- मन- धन से जो योगदान दिया है, वह देशभक्ति और भाईचारे का एक बेमिसाल उदाहरण है। मेरे संगठन के आह्वान पर आपने जो उदारता और उत्साह दिखाया है उसे मैं कभी नहीं भुला सकता। बारहों महीने वसंत की भाँति अपने लाडलों को 'आजाद हिन्द फौज' और 'झाँसी रानी रेजीमेंट' में शामिल होने के लिए भेजा। आपने 'आजाद हिंद फौज' की तत्कालीन सरकार को युद्ध के लिए उदारतापूर्वक धन और जन दान दिए। संक्षेप में कहा जाए तो आपने एक सच्ची संतान की तरह भारत माँ के प्रति अपने कर्तव्यों का पालन किया है। आपके योगदान और बलिदानों का तत्काल कोई परिणाम न मिलने के कारण मैं आपसे कहीं ज्यादा क्षुब्ध हूँ।
ये सारी चीजें कभी भी बेकार नहीं जाएँगी, क्योंकि इसने भारत माता की मुक्ति का मार्ग प्रशस्त किया है, जो विश्व के कोने- कोने में रह रहे भारतीयों के लिए एक प्रेरणा स्रोत होगा। आने वाली पीढिय़ाँ आपको दुआएँ देंगी और भारत की आजादी के लिए आपके बलिदानों की गाथा गर्व के साथ सुनाई जाएंगी और यही आपकी सबसे बड़ी सफलता होगी। इस ऐतिहासिक अवसर पर मैं आप लोगों से कुछ कहना चाहता हूँ- 'अपनी तत्कालीन हार पर निराश न हों। खुश रहें और आशावादी बने। साथ ही कभी भी भारत से अपना विश्वास मत खोना। धरती पर ऐसी कोई ताकत नहीं, जो भारत को बाँध सके। भारत आजाद होगा, जल्द ही होगा।'
जय हिन्द!

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