October 23, 2010

बगैर सीमेंट और कॉन्क्रीट की इमारत

जर्मनी का शहर आखन अपने तकनीकी विश्वविद्यालय के लिए मशहूर है। यहां के टेक्सटाइल टेकनीक इंस्टीट्यूट की जो नई इमारत है, इसमें एक खास बात है। जो शायद सामने से देखने पर जान नहीं पड़ती। लेकिन इस इमारत की जो डिजाइन है वो सिविल इंजीनियरिंग के क्षेत्र में क्रांति है। इसमें सीमेंट और कॉन्क्रीट का इस्तेमाल नहीं किया गया है बल्कि इसे संस्थान में विकसित किए गए खास बिल्डिंग मटेरियल से बनाया गया है। ये दीवारें टेक्सटाइल से बनी हैं।

कपड़े नहीं- टेक्सटाइल सुनते ही हमारे दिमाग में कपड़े, पुलोवर, चादरें, पैंट्स शर्ट्स आते हैं लेकिन टेक्सटाइल का मतलब है कार्बन, कार्बन फाइबर या फिर ग्लास यानी कांच से बनाया गया मिश्रण। सिविल इंजीनियर मीरा एकर्स बताती हैं, 'इस टेक्सटाइल की संरचना भी अलग होती है। ग्लास का फाइबर अलग होता है उन्हें एक दूसरे के ऊपर रखा जाता है इसके बाद इसे खास प्रक्रिया से मजबूत किया जाता है जोड़ा जाता है।'
इस जाली पर फिर एक तरल मिश्रण डाला जाता है जिसे कड़ा होने के लिए छोड़ दिया जाता है। इस कड़े टेक्सटाइल मिश्रण की क्षमता पारंपरिक सीमेंट कॉन्क्रीट जैसी ही हो सकती है।
उतना ही मजबूत- शुरुआत में कई देशों में पूरी इमारत इस नए मिश्रण से नहीं बनाई गई कुछ- कुछ हिस्से ही इस टेक्सटाइल मिश्रण से बनाए गए। अमेरिका, इस्राएल, ग्रीस, जापान में इस नए तरीके से इमारतें बनाई जा रही हैं पर कुछ ही हिस्से। जर्मनी की कोशिश है कि पूरी इमारतें ही इस नई सामग्री से बने। यही प्रयोग आखन में किया गया। इंजीनियर स्टेफन यानेत्स्को ने बताया, 'हमने इस नई इमारत की डिजाइन आर्किटेक्चर्स के साथ मिल कर बनाई थी। इसलिए हमने सोचा कि क्यों नहीं नए मिश्रण का इस्तेमाल कर ये इमारत बनाई जाए। इससे हम इस नए मिश्रण की क्षमता भी आसानी से दिखा सकते हैं। इस संस्थान इनोटेक्स की ये पहली इमारत है जिसकी हर दीवार टेक्सटाइल वाले मिश्रण से बनी है।' इसके बाद कई इमारतों में सफलतापूर्वक इस तकनीक का इस्तेमाल किया गया। आखन में राइनलैंड वेस्टफेलिया के तकनीकी संस्थान आरडबल्यूटीएच के प्रोफेसर योसेफ हेगर ने बताया कि 'अब हमने 10 से 12 इमारतों में इस नए मिश्रण का उपयोग किया है हमें उम्मीद है कि आने वाले समय में नए प्रोजेक्ट हम बनाएंगे और व्यापक तौर पर टेक्सटाइल वाले सीमेंट का इस्तमाल होने लगेगा। ये पहले प्रोटोटाइप हैं। हालांकि ये तकनीक अभी सस्ती नहीं लेकिन आने वाले समय में हम और बड़े प्रोजेक्ट्स बनाएंगे तो अपने आप ये सस्ती होने लगेगी।'
नो टेंशन- टेक्सटाइल से बनने वाले इस सीमेंट की कुछ खास बातें हैं। जैसे कि ये भारी नहीं होता। चूंकि इसमें पत्थर चूना लोहा इस्तेमाल नहीं होता इसलिए इससे बनी दीवारें मोटी भी नहीं होंगी। सामान्य सीमेंट की दीवारें जहां 10 सेंटीमीटर की होती हैं वहीं इस नए मिश्रण से बनी दीवार सिर्फ ढाई तीन सेंटीमीटर की होगी। लोहा जंग खा जाता है। इस मटेरियल में वो समस्या ही नहीं है 'लोहे को जंग से बचाने के लिए सीमेंट की आठ दस सेंटीमीटर की परत उस पर चढ़ानी पड़ती है। लेकिन टेक्सटाइल वाले मिश्रण के इस्तमाल से दो ढाई सेंटीमीटर की ही दीवार बनेगी। इससे महीन कंस्ट्रक्शन किया जा सकता है। ये मुख्य बात है।'
बढ़ती जनसंख्या के साथ दुनिया भर में मकानों की संख्या भी बढ़ रही है। स्टील महंगा हो रहा है और सीमेंट भी। तो घर भी महंगे हो रहे हैं और घर बनाने का सपना भी। तो कीमत को कम करने के लिए ये नया सीमेंट या कहें टेक्सटाइल का मिश्रण बहुत स्तर पर कीमत घटाएगा पर मजबूती बनी रहेगी वैसी ही।

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एक बच्चे की जिम्मेदारी आप भी लें

अभिनव प्रयास- माटी समाज सेवी संस्था, जागरुकता अभियान के क्षेत्र में काम करती रही है। इसी कड़ी में गत कई वर्षों से यह संस्था बस्तर के जरुरतमंद बच्चों की शिक्षा के लिए धन एकत्रित करने का अभिनव प्रयास कर रही है। बस्तर कोण्डागाँव जिले के कुम्हारपारा ग्राम में बरसों से आदिवासियों के बीच काम रही 'साथी समाज सेवी संस्था' द्वारा संचालित स्कूल 'साथी राऊंड टेबल गुरूकुल' में ऐसे आदिवासी बच्चों को शिक्षा दी जाती है जिनके माता-पिता उन्हें पढ़ाने में असमर्थ होते हैं। इस स्कूल में पढऩे वाले बच्चों को आधुनिक तकनीकी शिक्षा के साथ-साथ परंपरागत कारीगरी की नि:शुल्क शिक्षा भी दी जाती है। प्रति वर्ष एक बच्चे की शिक्षा में लगभग चार हजार रुपये तक खर्च आता है। शिक्षा सबको मिले इस विचार से सहमत अनेक जागरुक सदस्य पिछले कई सालों से माटी समाज सेवी संस्था के माध्यम से 'साथी राऊंड टेबल गुरूकुल' के बच्चों की शिक्षा की जिम्मेदारी लेते आ रहे हैं। प्रसन्नता की बात है कि नये साल से एक और सदस्य हमारे परिवार में शामिल हो गए हैं- रामेश्वर काम्बोज 'हिमांशु' नई दिल्ली, नोएडा से। पिछले कई वर्षों से अनुदान देने वाले अन्य सदस्यों के नाम हैं- प्रियंका-गगन सयाल, मेनचेस्टर (यू.के.), डॉ. प्रतिमा-अशोक चंद्राकर रायपुर, सुमन-शिवकुमार परगनिहा, रायपुर, अरुणा-नरेन्द्र तिवारी रायपुर, डॉ. रत्ना वर्मा रायपुर, राजेश चंद्रवंशी, रायपुर (पिता श्री अनुज चंद्रवंशी की स्मृति में), क्षितिज चंद्रवंशी, बैंगलोर (पिता श्री राकेश चंद्रवंशी की स्मृति में)। इस प्रयास में यदि आप भी शामिल होना चाहते हैं तो आपका तहे दिल से स्वागत है। आपके इस अल्प सहयोग से एक बच्चा शिक्षित होकर राष्ट्र की मुख्य धारा में शामिल तो होगा ही साथ ही देश के विकास में भागीदार भी बनेगा। तो आइए देश को शिक्षित बनाने में एक कदम हम भी बढ़ाएँ। सम्पर्क- माटी समाज सेवी संस्था, रायपुर (छ. ग.) 492 004, मोबा. 94255 24044, Email- drvermar@gmail.com

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