November 17, 2018

सरकारी दफ़्तर का गणित

सरकारी दफ़्तर 
का गणित
-संगीता गाँधी
"भाई ये बिजली के गलत बिल कौन साहब ठीक करते हैं?"
क्या काम है?”
मैं एक किराए के कमरे में रहता हूँ ।कमरे में बिजली के नाम पर एक पंखा और एक बल्ब है। इन दो चीजों का बिल इस महीने ' दस हज़ार ' आया ! इसी सिलसिले में साहब से मिलना है।
 
चपरासी ने उसे सुधीर साहब के पास भेजा ।
"
साहब मेरा बिजली का बिल बहुत ज्यादा  आया है ,इसे कृपया ठीक कर दीजिए।"
साहब ने सिर से पाँव तक दीनू को देखा !
"
जितनी जलाते हो उतना ही आएगा न!
"
साहब, एक पंखे, बल्ब का दस हज़ार?"
"
हाँ, तो खाना बिजली के हीटर पर पकाते होंगे? तुम  लोग कटिया डाल बिजली की  चोरी करते हो । इस बार कटिया सही से डली न होगी,  तो ज्यादा बिल आ गया।"
"
साहब, मैं कोई कटिया नहीं डालता। साथ ही खाना भी ढाबे पर खाता हूँ, कमरे में नहीं पकाता।"
"
अरे जाओ, जो आ गया वो तो देना होगा।"
दीनू हैरान, परेशान खड़ा था। तभी  सुधीर साहब ने एक आदमी को आवाज़ दी-"  रमेश, इधर आना।
हाँ बोलो सुधीर।
"
यार घर नया बनवाया है, ऊपर की मंज़िल पर तीन नए ए सी लगवाए हैं, पहले के भी नीचे की मंज़िल पर चल रहे हैं। बाकी बिजली का सामान भी चलता है। तुम देख लेना मेरा बिल ,मेरे एरिया की रीडिंग तो तुम ही करते हो न । मेरा बिल 500 -1000 के बीच ही रखना! " --सुधीर ने आँख मारते हुए रमेश से कहा।
रमेश ने भी उसी अंदाज़ में जवाब दिया-" तुम टेंशन न लो, मैं सब एडजस्ट कर दूँगा। "
चल फिर रात को अपनी तरह की पार्टी में मिलते हैं। दोनों ज़ोर से हँसने लगे।
दीनू एक कोने में खड़ा- एक कमरे के' एक बल्ब, पंखे के दस हज़ार औऱ एक दो मंजिला बड़े मकान के तीन- चार ए सी व बाकी लाइट का 500 -1000 ' - ये गणित समझने की कोशिश कर रहा था ।
email- rozybeta@gmail.com

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एक बच्चे की जिम्मेदारी आप भी लें

अभिनव प्रयास- माटी समाज सेवी संस्था, जागरुकता अभियान के क्षेत्र में काम करती रही है। इसी कड़ी में गत कई वर्षों से यह संस्था बस्तर के जरुरतमंद बच्चों की शिक्षा के लिए धन एकत्रित करने का अभिनव प्रयास कर रही है। बस्तर कोण्डागाँव जिले के कुम्हारपारा ग्राम में बरसों से आदिवासियों के बीच काम रही 'साथी समाज सेवी संस्था' द्वारा संचालित स्कूल 'साथी राऊंड टेबल गुरूकुल' में ऐसे आदिवासी बच्चों को शिक्षा दी जाती है जिनके माता-पिता उन्हें पढ़ाने में असमर्थ होते हैं। इस स्कूल में पढऩे वाले बच्चों को आधुनिक तकनीकी शिक्षा के साथ-साथ परंपरागत कारीगरी की नि:शुल्क शिक्षा भी दी जाती है। प्रति वर्ष एक बच्चे की शिक्षा में लगभग चार हजार रुपये तक खर्च आता है। शिक्षा सबको मिले इस विचार से सहमत अनेक जागरुक सदस्य पिछले कई सालों से माटी समाज सेवी संस्था के माध्यम से 'साथी राऊंड टेबल गुरूकुल' के बच्चों की शिक्षा की जिम्मेदारी लेते आ रहे हैं। प्रसन्नता की बात है कि नये साल से एक और सदस्य हमारे परिवार में शामिल हो गए हैं- रामेश्वर काम्बोज 'हिमांशु' नई दिल्ली, नोएडा से। पिछले कई वर्षों से अनुदान देने वाले अन्य सदस्यों के नाम हैं- प्रियंका-गगन सयाल, मेनचेस्टर (यू.के.), डॉ. प्रतिमा-अशोक चंद्राकर रायपुर, सुमन-शिवकुमार परगनिहा, रायपुर, अरुणा-नरेन्द्र तिवारी रायपुर, डॉ. रत्ना वर्मा रायपुर, राजेश चंद्रवंशी, रायपुर (पिता श्री अनुज चंद्रवंशी की स्मृति में), क्षितिज चंद्रवंशी, बैंगलोर (पिता श्री राकेश चंद्रवंशी की स्मृति में)। इस प्रयास में यदि आप भी शामिल होना चाहते हैं तो आपका तहे दिल से स्वागत है। आपके इस अल्प सहयोग से एक बच्चा शिक्षित होकर राष्ट्र की मुख्य धारा में शामिल तो होगा ही साथ ही देश के विकास में भागीदार भी बनेगा। तो आइए देश को शिक्षित बनाने में एक कदम हम भी बढ़ाएँ। सम्पर्क- माटी समाज सेवी संस्था, रायपुर (छ. ग.) 492 004, मोबा. 94255 24044, Email- drvermar@gmail.com

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