August 15, 2017

प्राकृतिक आपदा

 बचाव की पूर्व तैयारी 
- भारत डोगरा
मानसून का समय बाढ़, भूस्खलन व भूमि कटाव की दृष्टि से अधिक सावधानियाँ अपनाने का समय होता है। अधिक बाढ़ की संभावना को कम करने के लिए तटबंधों पर पैनी नजर रखना ज़रूरी है। तटबंधों में दरारों पर भी समुचित ध्यान देना होगा। नए तटबंध बनाने की बजाय मौजूदा तटबंधों की सही देख-रेख पर ध्यान देना बेहतर है। और इस मामले में मात्र अपने निरीक्षण से संतुष्ट रहने के स्थान पर गाँववासियों की शिकायतों पर समुचित ध्यान देना चाहिए।
बांध प्रबंधन के बारे में भी बाढ़ नियंत्रण के समुचित दिशा निर्देश ज़रूरी हैं। हाल के वर्षों की विनाशकारी बाढ़ों के बाद चले आरोप-प्रत्यारोप में कई मुद्दे बार-बार सामने आए हैं। एक मुद्दा यह रहा है कि बांध प्रबंधन में प्राय: बाढ़ नियंत्रण को उतना महत्त्व नहीं दिया जाता जितना बिजली उत्पादन को दिया जाता है। पिछले अनुभवों से सीखते हुए बाढ़ से बचाव पर अधिक ध्यान देना चाहिए।
एक मुद्दा यह भी उठा है कि बाँध का पानी छोड़ते समय समुचित चेतावनी नहीं दी गई या चेतावनी लोगों तक समय पर नहीं पहुँची। इस बारे में अधिक सावधानी बरती जा सकती है।
हिमालय व पश्चिम घाट जैसे कुछ अन्य पर्वतीय क्षेत्रों में भूस्खलन को कम करने के लिए पहले से बेहतर प्रयासों की ज़रूरत है। चिंहित गंभीर भूस्खलन स्थानों पर पैनी नजर रखना होगा ताकि स्थिति अधिक विकट होने की आशंका हो तो समुचित सुरक्षा व्यवस्था समय पर की जा सके। दूर-दूराज के पर्वतीय गाँवों से लोग अपनी शिकायत व जानकारी दर्ज कर सकें, इसके लिए सरकारों को व्यवस्था बनानी चाहिए। चिंहित स्थलों के अतिरिक्त कई भूस्खलन स्थल हाल ही में उत्पन्न हुए हैं। इनकी भी उपेक्षा न हो।
भूमि कटाव से पीडि़त लोग कुछ संदर्भों में सबसे अधिक उपेक्षित हैं। जिन परिवारों की भूमि नदी छीन लेती है प्राय: उनका संतोषजनक पुनर्वास नहीं हो पा रहा है। चाहे बहराईच हो या सीतापुर या गज़ीपुर या मालदा या मुर्शिदाबाद, नदी कटान से प्रभावित स्थानों से ऐसे समाचार मिलते ही रहे हैं कि नदी द्वारा भूमि कटान से पीडि़त लोग भूमिहीन और कभी-कभी तो आवासहीन होकर रहने को मजबूर हैं। ऐसा नहीं है कि उनके पुनर्वास के लिए ज़मीन कभी उपलब्ध नहीं होती है। ऐसे कुछ स्थानों पर प्रभावित लोगों ने स्वयं बताया कि उन्हें किन स्थानों पर बसाया जा सकता है। लगता है कि प्रशासन इन लोगों की समस्याओं के प्रति उदासीन रहा है। अथवा उच्च स्तर पर उचित नीति न बनने के कारण वह समय पर निर्णय नहीं ले पाता है। अत: इस बारे में विभिन्न राज्य सरकारों को भी पहल करनी चाहिए अथवा केंद्र सरकार की ओर से ज़रूरी निर्देश आने चाहिए। इस बारे में न्यायसंगत नीति तो बनानी ही चाहिए। साथ में नदी-कटाव की अधिक संभावना वाले क्षेत्रों के प्रशासन को पहले से तैयारी रखनी चाहिए कि जो भी लोग ऐसी त्रासदी से प्रभावित हों उन्हें वर्षा के दिनों में रहने का उचित स्थान मिल सके व अन्य राहत भी उन तक पहुँच सके।
आकाशीय बिजली की आपदा हाल के वर्षों में अधिक जानलेवा हो रही है। इससे जीवन की रक्षा के लिए इसकी अधिक संभावना वाले क्षेत्रों में, विशेषकर स्कूलों जैसे सार्वजनिक स्थानों में तडि़त चालकों की व्यवस्था करनी चाहिए व इनकी उपलब्धता बढ़ानी चाहिए। इसके अतिरिक्त लोगों में बचाव के उपायों का प्रचार करना चाहिए। (स्रोत फीचर्स)

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एक बच्चे की जिम्मेदारी आप भी लें

अभिनव प्रयास- माटी समाज सेवी संस्था, जागरुकता अभियान के क्षेत्र में काम करती रही है। इसी कड़ी में गत कई वर्षों से यह संस्था बस्तर के जरुरतमंद बच्चों की शिक्षा के लिए धन एकत्रित करने का अभिनव प्रयास कर रही है। बस्तर कोण्डागाँव जिले के कुम्हारपारा ग्राम में बरसों से आदिवासियों के बीच काम रही 'साथी समाज सेवी संस्था' द्वारा संचालित स्कूल 'साथी राऊंड टेबल गुरूकुल' में ऐसे आदिवासी बच्चों को शिक्षा दी जाती है जिनके माता-पिता उन्हें पढ़ाने में असमर्थ होते हैं। इस स्कूल में पढऩे वाले बच्चों को आधुनिक तकनीकी शिक्षा के साथ-साथ परंपरागत कारीगरी की नि:शुल्क शिक्षा भी दी जाती है। प्रति वर्ष एक बच्चे की शिक्षा में लगभग चार हजार रुपये तक खर्च आता है। शिक्षा सबको मिले इस विचार से सहमत अनेक जागरुक सदस्य पिछले कई सालों से माटी समाज सेवी संस्था के माध्यम से 'साथी राऊंड टेबल गुरूकुल' के बच्चों की शिक्षा की जिम्मेदारी लेते आ रहे हैं। प्रसन्नता की बात है कि नये साल से एक और सदस्य हमारे परिवार में शामिल हो गए हैं- रामेश्वर काम्बोज 'हिमांशु' नई दिल्ली, नोएडा से। पिछले कई वर्षों से अनुदान देने वाले अन्य सदस्यों के नाम हैं- प्रियंका-गगन सयाल, मेनचेस्टर (यू.के.), डॉ. प्रतिमा-अशोक चंद्राकर रायपुर, सुमन-शिवकुमार परगनिहा, रायपुर, अरुणा-नरेन्द्र तिवारी रायपुर, डॉ. रत्ना वर्मा रायपुर, राजेश चंद्रवंशी, रायपुर (पिता श्री अनुज चंद्रवंशी की स्मृति में), क्षितिज चंद्रवंशी, बैंगलोर (पिता श्री राकेश चंद्रवंशी की स्मृति में)। इस प्रयास में यदि आप भी शामिल होना चाहते हैं तो आपका तहे दिल से स्वागत है। आपके इस अल्प सहयोग से एक बच्चा शिक्षित होकर राष्ट्र की मुख्य धारा में शामिल तो होगा ही साथ ही देश के विकास में भागीदार भी बनेगा। तो आइए देश को शिक्षित बनाने में एक कदम हम भी बढ़ाएँ। सम्पर्क- माटी समाज सेवी संस्था, रायपुर (छ. ग.) 492 004, मोबा. 94255 24044, Email- drvermar@gmail.com

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