August 12, 2016

लघुकथा

एक बड़ा सवाल 
- मनीषा सक्सेना
स्कूल में मध्यांतर हुआ ।सब बच्चे अपने अपने टिफिन बॉक्स लेकर मैदान में जमा थे।रीना बड़े चाव से दादी के हाथ के बने आलू के पराठे खा रही थी।उसकी सहेली कुहू टिफिन खोल कर चुपचाप बैठी थी ।
कुहू जल्दी से टिफिन ख़त्म करो, घंटी बजने वाली है।
रीना मुझे गणित का सवाल नहीं आया।देखना, मुझे शून्य अंक मिलेगा और घर पर मम्मी की डाँट पड़ेगी| “
हाँ कल मुझे भी नहीं आ रहा था । तुमने नेट पर सर्च किया था?”
किया था।अर्जुन अकादमी व मैथ्स ऑन लाइन दोनों पर उदाहरण देखे थे।मैं बार बार गलती कर जाती थी ।ठीक से समझ में नहीं आया ।
अरे ये तो मेरी मम्मी ने भी बताईं थीं ।उन्होंने कहा था इन दोनों साइट्स पर अच्छा समझाया है।”  
तुम्हें समझ में आया ?”
नहीं कुहू ,रात डिनर लगने तक सवाल किए, पर सारे सवाल सही नहीं लग पाते थे।खाने के समय मैंने दादाजी से पूछा कि 3 मजदूर 4 दिन में एक दीवार बनाते हैं तो 6 मजदूर उस दीवार को कितने दिन में बनायेंगे ?दादाजी ने बताया कम लोग काम करेंगे  ,तो उन्हें ज्यादा समय लगेगा, अतः गुणा करेंगे। ज्यादा लोग मिलकर काम करेंगे ,तो जल्दी कर लेंगे, अतः भाग करना होगा। है न आसान ।
कुहू की आँखें भर आईं, घर में किससे पूछे अपने सवाल ?
सम्पर्कः जी 17 बेलवेडियर प्रेस कम्पाउंड
मोतीलाल नेहरु रोड, इलाहाबाद, manisha.mail61@gmail.com

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लेखकों से अनुरोध...

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माटी समाज सेवी संस्था का अभिनव प्रयास

एक बच्चे की जिम्मेदारी आप भी लें
माटी समाज सेवी संस्था, समाज के विभिन्न जागरुकता अभियान के क्षेत्र में काम करती रही है। पिछले वर्षों में संस्था ने समाज से जुड़े विभिन्न विषयों जैसे शिक्षा, स्वास्थ्य,पर्यावरण, प्रदूषण आदि क्षेत्रों में काम करते हुए जागरुकता लाने का प्रयास किया है। इसी कड़ी में गत कई वर्षों से यह संस्था बस्तर के जरुरतमंद बच्चों की शिक्षा के लिए धन एकत्रित करने का अभिनव प्रयास कर रही है।
बस्तर कोण्डागाँव जिले के कुम्हारपारा ग्राम में बरसों से कारीगर आदिवासियों के बीच काम रही साथी समाज सेवी संस्थाद्वारा संचालित स्कूलसाथी राऊंड टेबल गुरूकुल में ऐसे आदिवासी बच्चों को शिक्षा दी जाती है जिनके माता-पिता उन्हें पढ़ाने में असमर्थ होते हैं। प्रति वर्ष एक बच्चे की शिक्षा में लगभग चार हजार रुपए तक खर्च आता है।
शिक्षा सबको मिले इस विचार से सहमत अनेक लोग पिछले कई सालों से माटी संस्था के माध्यम से साथी राऊंड टेबल गुरूकुलके बच्चों की शिक्षा की जिम्मेदारी लेते आ रहे हैं। पिछले कई वर्षों से माटी समाज सेवी संस्था उक्त स्कूल के लगभग 15 से 20बच्चों के लिए शिक्षा शुल्क एकत्रित कर रही है।
अनुदान देने वालों में शामिल हैं- प्रियंका-गगन सयाल, लंदन मैनचेस्टर, डॉ. प्रतिमा-अशोक चंद्राकर रायपुर,तरुण खिचरिया, दुर्ग (पत्नी श्रीमती कुमुदिनी खिचरिया की स्मृति में), श्री राजेश चंद्रवंशी (पिता श्री अनुज चंद्रवंशी की स्मृति में),क्षितिज चंद्रवंशी (पिता श्री राकेश चंद्रवंशी की स्मृति में)। अरुणा-नरेन्द्र तिवारी रायपुर,पी. एस. राठौर- अहमदाबाद। इस मुहिम में नए युवा सदस्य जुड़ें हैं- आयुश चंद्रवंशी रायपुर,जिन्होंने अपने पहले वेतन से एक बच्चे की शिक्षा की जिम्मेदारी उठायी है, जो स्वागतेय पहल है। इस प्रयास में यदि आप भी शामिल होना चाहते हैं तो आपका तहे दिल से स्वागत है। आपके इस अल्प सहयोग से एक बच्चा शिक्षित होकर राष्ट्र की मुख्य धारा में शामिल तो होगा ही साथ ही देश के विकास में भागीदार भी बनेगा। तो आइए देश को शिक्षित बनाने में एक कदम हम भी बढ़ाएँ।
सम्पर्क- माटी समाज सेवी संस्था, पंडरी,रायपुर (छ. ग.) 492 004, मोबाइल नं.94255 24044, Email- drvermar@gmail.com

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