February 02, 2014

घर-परिवार

       नये साल में निखारिए 
       अपना घर
अपने घर और परिवेश को व्यवस्थित रखना एक हुनर है जो नियमित अभ्यास से और अधिक निखरता है। आधुनिक जीवनशैली मे दिनों दिन बढ़ती आपाधापी के कारण घर-गृहस्थी में जो समस्याएँ पहले महानगरों में आम थीं वे अब छोटे शहरों में भी पैर पसार रहीं हैं। भारतीय परिवार में घर-परिवार की देखरेख करना स्त्रियों का एक अनिवार्य गुण माना जाता रहा है। बदलते माहौल और जागरूकता के कारण अब बहुत से घरों में पुरुष भी कई कामों में स्त्रियों की सहायता करने लगे हैं। जिन घरों में स्त्री भी नौकरी करती हो वहाँ या तो नौकर के सहारे या आपसी तालमेल से सभी ज़रूरी काम निपटाना ही समय की माँग है। रोज़मर्रा के कुछ काम ऐसे होते हैं जिनको करना निहायत ही ज़रूरी होता है। आप चाहें तो कपड़े सप्ताह में एक या दो दिन नियत करके धो सकते हैं लेकिन खाना बनाना और घर को व्यवस्थित रखना ऐसे काम हैं जिन्हें एक दिन के लिए भी टाला नहीं जा सकता। घर की सफाई को टाल देने पर दूसरे दिन और अधिक गंदगी से दो-चार होना पड़ता है। ऐसे में किसी अतिथि के अनायास आ जाने पर शर्मिंदगी का सामना भी करना पड़ता है। इसलिए बेहतर यही रहता है कि सामने दिख रही गंदगी या अव्यवस्था को फौरन दुरुस्त कर दिया जाए। किसी भी काम को और अधिक अच्छे से करने के लिए यह ज़रूरी होता है कि उसके सभी पक्षों के बारे में अपनी जानकारी को परख लिया जाए। घर के बाहर और भीतर बिखरी अव्यवस्था को दूर करने के लिए रोज़-रोज़ की परेशानियों का सामना करने से बेहतर यह है कि घर को यथासंभव हमेशा ही सुरुचिपूर्ण तरीके से जमाकर रखें। ऐसा करने पर हर दिन की मेहनत से भी बचा जा सकता है और इस काम में खटने से बचने वाले समय का सदुपयोग किन्हीं अन्य कामों में किया जा सकता है। घर को कायदे से रखने सिर्फ हाउसवाइफ का ही कर्तव्य नहीं है। इस काम में घर के सभी सदस्यों और बच्चों की भागीदारी भी होनी चाहिए. घर के सभी सदस्यों का समझदारी भरा व्यवहार उनके घर को साफ, स्वच्छ और सुंदर बनाता है। घर में कीमती सामान और सजावट का होना ज़रूरी नहीं है बल्कि घर में ज़रूरत के मुताबिक सामान का व्यवस्थित रूप से रखा जाना ही घर को तारीफ़ के काबिल बनाता है। सफाई तथा व्यवस्था को नज़र अंदाज करने और उससे जी चुराने वाले कई तरह के बहाने बनाते हैं और यथास्थिति बनाए रखने के लिए कई तर्क देते हैं, जिनका समाधान नीचे क्रमवार दिया जा रहा है।
1. समझ में नहीं आता कि शुरुआत कहाँ से करू? - किसी भी काम को करने के लिए कहीं से तो शुरुआत करनी ही पड़ेगी, इसलिए यदि आप तय नहीं कर पा रहे हों तो किसी भी एक कोने को चुन लें। उस स्थान को साफ और व्यवस्थित करते हुए आगे बढ़ें। एक ही जगह पर एक घंटा लगा देने में कोई तुक नहीं है। एक कोने को पांच-दस मिनट दें, ताकि पूरे घर को घंटे भर के भीतर जमाया जा सके। आज पर्याप्त सफाई कर दें, कल थोड़ी और करें। एक दिन सिर्फ किताबों के ऊपर की धूल झाड़ दें, दूसरे दिन उन्हें क्रमवार जमा दें। यदि आप थोड़ा-थोड़ा करके काम करेंगे तो यह पहाड़ -सा प्रतीत नहीं होगा।
2. पुराने अखबारों और पत्रिकाओं में कोई काम की चीज हुई तो? - मेरे एक मित्र के घर दो-तीन साल पुराने अखबारों और पत्रिकाओं का ढेर लगा रहता था। उसे यही लगता था कि उनमें कोई काम की चीज होगी जिसकी ज़रूरत पड़ सकती है; लेकिन ऐसा कभी नहीं हुआ कि किसी अखबार या पत्रिका को खोजने की ज़रूरत पड़ी हो। बहुत लंबे समय तक पड़े रहने के कारण उस रद्दी का सही मोल भी नहीं मिलता था। कुछ घरों में ऐसा ही होता है। यह एक मनोदशा है जिसके कारण लोग पुराने कागजों का अम्बार सँजोए रहते हैं। इसका सीधा-सरल उपाय यह है कि पढ़ चुकने के फौरन बाद ही यह तय कर लिया जाए कि उस अखबार या पत्रिका को रखना है या रद्दी में बेचना है। जिन अखबार या पत्रिका को सहेजना ज़रूरी लग रहा हो, उनका एक अलग ढेर बना लिया जाए। मेरा अनुभव यह कहता है कि यह ढेर भी अंतत: रद्दी में ही मर्ज हो जाता है। प्रारंभ से ही ज़रूरी और गैर-ज़रूरी अखबार या पत्रिका का ढेर बनाने लगें ताकि बाद में रद्दी का अंबार न लगे।
3. मैं तो तैयार हूँ; लेकिन घर के सदस्य ही नहीं मानते! - दूसरों पर जिम्मेदारी डालने से पहले खुद शुरुआत करें। अपनी निजी चीजों को अपनी जगह पर व्यवस्थित रखें और दूसरों को बताएँ कि ऐसा करना क्यों ज़रूरी है। नकारात्मक नज़रिया रखते हुए कोई समझाइश देंगे तो इसका सही प्रभाव नहीं पड़ेगा। उन्हें अपने काम में शामिल करें। छोटे बच्चों को बताएँ कि वे अपने बस्ते और कपास को सही तरीके से रखें, पेंसिल की छीलन जमीन पर नहीं गिराएँ, अपने गंदे टिफिन को धुलने के लिए रखें। अपने परिवेश को साफ रखना व्यक्तिगत अनुशासन का अंग है और छुटपन से ही बच्चों को इसकी शिक्षा देनी चाहिए। प्रारंभ में लोग आनाकानी और अनमने तरीके से काम करते हैं लेकिन उसका लाभ दिखने और प्रोत्साहन मिलने पर यह आदत में शुमार हो जाता है।
4. क्या पता किस चीज की कब ज़रूरत पड़ जाए! - इस मनोदशा का जिक्र ऊपर किया गया है। यदि आप इससे निजात पाने की कोशिश नहीं करेंगे तो आपका घर कचराघर बन जाएगा। इसका सीधा समाधान यह है कि एक बक्सा लें और ऐसे सामान को उसमें डालते जाएँ जिसके बारे में आप आश्वस्त नहीं हों। छह महीने या साल भर के बाद उस बक्से का मुआयना करें। यदि इस बीच किसी सामान की ज़रूरत नहीं पड़ी हो तो उससे छुटकारा पाना ही सही है।
5. मैं उपहारों और स्मृतिचिह्नों का क्या करूँ? - घर में मौजूद बहुत सी चीजों का भावनात्मक मूल्य होता है और वे किसी लम्हे, व्यक्ति या घटना की यादगार के रूप में रखी जातीं हैं। इन चीजों के बारे में यही कहा जा सकता है कि इनसे जुड़ी असल भावना हमारे भीतर होती है। ये सामान उस भावना का प्रतिरूप बनकर उपस्थित रहते हैं। आप उनकी फोटो लेकर एक अल्बम में या टेबल पर लगा सकते हैं, चाहें तो किसी ब्लॉग आ डायरी में उनके जिक्र कर सकते हैं। यदि ऐसी वस्तुएँ जगह घेर रही हों तो उन्हें बक्सा बंद करके रख देने में ही समझदारी है। दूसरों ने आपको उपहार इसलिए नहीं दिए थे कि आप उन्हें बोझ समझकर धूल खाने के लिए छोड़ दें। इन उपहारों ने आपको कभी खुशी दी थी, अब इनको रखे रहना मुनासिब न लग रहा हो तो उन्हें घर से बाहर का रास्ता दिखाने में असमंजस न रखें।
6. ऐसी भी क्या पड़ी है? आज नहीं तो कल कर लेंगे! - आलस्य ऐसी बुरी चीज है कि यदि यही भाग जाए तो बहुत से काम सहज बन जाते हैं। एक बात मन में बिठा लें कि कल कभी नहीं आता। आलस्य को दूर भगाने के लिए प्रेरणा खोजिए। आप जिस काम से जी चुरा रहे हों उसका जिक्र परिवार के सदस्यों और दोस्तों से कर दें। उनके बीच घोषणा कर दें कि आपने साफ-सफाई करने बीड़ा उठा लिया है। यदि आप इस दिशा में कुछ काम करें ,तो उसके बारे में भी सबको बता दें। इसका फायदा यह होगा कि आपको ज़रूरी काम करने के लिए मोटिवेशन मिलता रहेगा और आप कुछ आलस्य कम करेंगे; क्योंकि आपके ऊपर खुद से और दूसरों से किए वादे निभाने का दारोमदार होगा। इन वादों को तोड़कर आप खुद को नाकारा तो साबित नहीं होने देना चाहेंगे न?
7. सारी अनुपयोगी वस्तुओं को यूँही तो फेंक नहीं सकते! - यदि आपके घर में बहुत सारा अनुपयोगी सामान है, तो उनके निबटारे के केवल तीन संभव हल हैं- सामान चालू हालत में हो तो इस्तेमाल करें। इस्तेमाल नहीं करना चाहते हों या आपके पास उससे अच्छा सामान हो तो किसी और को दे दें। यदि सामान खराब हो और ठीक नहीं हो सकता हो ,तो उसे रखे रहने में तभी कोई तुक है जब उसकी कोई विटेज वैल्यू हो।
8. और भी बहुत से ज़रूरी काम हैं। इनके लिए समय ही कहाँ है! - यदि आप चाहें तो बहुत से काम संगीत या समाचार सुनते-सुनते ही निबटा सकते हैं। सही तरीके से करें तो अपने घर और परिवेश को साफ और व्यस्थित रखने के लिए रोज कुछ मिनट ही देने पड़ते हैं। एक आलमारी, एक टेबल, घर का एक कोना- एक दिन में एक बार। घर छोडऩे के पहले और घर लौटने के बाद। जिस सामान को जहाँ रखना नियत किया हो इसे इस्तेमाल के बाद वहीं रखना। जिस चीज की ज़रुरत न हो उसे या तो बक्सा बंद करके रख देना या उसकी कंडीशन के मुताबिक या तो ठीक कराकर इस्तेमाल करना, या बेच देना, या दान में दे देना। ये सभी उपाय सीधे और सरल हैं। इन्हें अमल में लाने पर लोग घर की ही नहीं बल्कि उसमें रहनेवाले सभी सदस्यों की भी तारीफ़ करते हैं। यूँ तो नौकरों के भरोसे भी यह सब किया जा सकता है लेकिन इसे खुद ही सुरूचिपूर्वक करने में आनंद आता है।  (हिन्दी ज़ेन से)

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