February 02, 2014

आपके पत्र/ मेल बॉक्स


मौलिकता का अहसास

उदंती का वेब संस्करण के पिछले कुछ अंकों पर सरसरी नज़र डालने का मौका मिला। प्रकाशन, सामग्री व गेटअप, मुद्रण आदि सभी दृष्टिकोणों से पत्रिका ने प्रभावित किया। अनकही, लोकपर्व, कलाकार, परम्परा, प्रेरक, पूजापर्व जैसे स्तंभों के अन्तर्गत प्रकाशित रचनाएँ मौलिकता का अहसास कराती हैं। सभी अंकों पर संपादक की पकड़ और मेहनत साफ झलकती है। पत्रिका के उज्जवल भविष्य के लिये मेरी हार्दिक शुभकामनाएँ।
             - किशोर श्रीवास्तव(संपादक-समाज कल्याण, भारत सरकार)

सुन्दर अंक
वेब पत्रिका उदंती का दिसम्बर अंक पढ़ा। खूबसूरत साज सज्जा के साथ पठनीय सामग्रियों का चयन उत्कृष्टता को बनाए हुए है। सामयिक विषय पर आपका लेख पढऩा अच्छा लगा। निरन्तर अग्रसर रहते हुए पत्रिका अपना कलेवर यूँ ही बनाये रखे, हार्दिक शुभकामनाएँ!
                  -जेन्नी शबनम, Jenny.Shabnam@gmail.com

प्रकृति और संगीत
डॉ. अरविन्द गुप्ते का लेख, पक्षी क्यों गाते हैं, बहुत सारी जानकारी समेटे हुए है। अनुपम मिश्र जी का लेख-तलाश अपनी जड़ों की समस्याओं की पूरी पड़ताल करने वाला है। रेखा मैत्र की कविताएँ और चेखव की कहानी मर्मस्पर्शी हैं। सचमुच उदंती गागर में सागर है। छोटे से कलेवर में सारी सामग्री स्तरीय और रोचक!
             -रामेश्वर काम्बोज 'हिमांशु' rdkamboj@gmail.com

तेजाब हमलों के खिलाफ़ मुहिम
अनकही एक मानवीय फैसला  में आपने बिल्कुल सही मुद्दा उठाया है।  इसी प्रकार आठ साल पहले लक्ष्मी दिल्ली में बुकस्टोर जहाँ वो काम किया करती थीं, काम पर जाने के दौरान उस पर किसी ने तेजाब उड़ेल दिया था। कानपुर के रहने वाले आलोक दीक्षित जो पेशे से पत्रकार हैं की मुलाकात लक्ष्मी से तेजाब हमलों को रोकने की एक मुहिम के दौरान हुई और फिर वे एक-दूसरे को पसन्द करने लगे। अब ये दोनों दिल्ली के पास एक इलाके में रहते हैं और दोनों तेजाब हमलों के खिलाफ मुहिम चला रहे हैं। उनकी इस मुहिम से तेजाब हमलों के शिकार लगभग 50 पीडि़ताएँ जुड़ी हुई हैं। लक्ष्मी इस मुहिम का चेहरा है, जो एसिड अटैक की पीडि़तों को मदद और आर्थिक सहायता मुहैया कराती है। 
     - सुजाता साहा, रायपुर
प्रयास
प्रेरक कथा आखरी सफ़र दिल को छू गई। मानवीय संवेदनाएँ जो आजकल मर चुकी हैं इस कथा को पढ़कर पुन: जागृत होंगी। मुख पृष्ठ पर प्रकाशित पूर्वा खिचरिया की फोटोग्राफी लाजवाब है।
        - डॉ. अशोक चन्द्राकर, रायपुर


1 Comment:

Devi Nangrani said...

udanti ka indradhanushi ank saamne ate hi pathaneey samagri aapne aapko padhwa hi leti hai..Kahnai kalash mein adbhut charnatmak oorja paai.Padma Mishr aur Bhavna saxena ki kalam kuch tejaabi tewar hain jo kirdaar ke antarman mein dhansne ko majboor karte hain...Agle ank ka intezaar eahega.Ratna ji aapke sampadan kshamata ko meri badhai v shubhkamnayein
Devi Nangrani

लेखकों से अनुरोध...

उदंती.com एक सामाजिक- सांस्कृतिक वेब पत्रिका है। पत्रिका में सम- सामयिक मुद्दों के साथ पर्यावरण को बचाने तथा पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए उठाए जाने वाले कदमों को प्राथमिकता से प्रकाशित किया जाता है। समाजिक जन जागरण के विभिन्न मुद्दों को शामिल करने के साथ ऐतिहासिक सांस्कृतिक धरोहर से जुड़े लेखों और साहित्य की विभिन्न विधाओं जैसे कहानी, कविता, गीत, गजल, व्यंग्य, निबंध, लघुकथाएं और संस्मरण आदि का भी समावेश किया गया है। उपर्युक्त सभी विषयों पर मौलिक अप्रकाशित रचनाओं का स्वागत है। आप अपनी रचनाएँ Email-udanti.com@gmail.comपर प्रेषित करें।

माटी समाज सेवी संस्था का अभिनव प्रयास
एक बच्चे की जिम्मेदारी आप भी लें...
माटी समाज सेवी संस्था, समाज के विभिन्न जागरुकता अभियान के क्षेत्र में काम करती रही है। पिछले वर्षों में संस्था ने समाज से जुड़े विभिन्न विषयों जैसे शिक्षा, स्वास्थ्य,पर्यावरण, प्रदूषण आदि क्षेत्रों में काम करते हुए जागरुकता लाने का प्रयास किया है। इसी कड़ी में गत कई वर्षों से यह संस्था बस्तर के जरुरतमंद बच्चों की शिक्षा के लिए धन एकत्रित करने का अभिनव प्रयास कर रही है।
बस्तर कोण्डागाँव जिले के कुम्हारपारा ग्राम में बरसों से कारीगर आदिवासियों के बीच काम रही “साथी समाज सेवी संस्था” द्वारा संचालित स्कूल “साथी राऊंड टेबल गुरूकुल” में ऐसे आदिवासी बच्चों को शिक्षा दी जाती है जिनके माता-पिता उन्हें पढ़ाने में असमर्थ होते हैं। प्रति वर्ष एक बच्चे की शिक्षा में लगभग चार हजार रुपए तक खर्च आता है। शिक्षा सबको मिले इस विचार से सहमत अनेक लोग पिछले कई सालों से माटी संस्था के माध्यम से “साथी राऊंड टेबल गुरूकुल” के बच्चों की शिक्षा की जिम्मेदारी लेते आ रहे हैं। पिछले कई वर्षों से माटी समाज सेवी संस्था उक्त स्कूल के लगभग 15 से 20 बच्चों के लिए शिक्षा शुल्क एकत्रित कर रही है। अनुदान देने वालों में शामिल हैं- प्रियंका-गगन सयाल, लंदन मैनचेस्टर, डॉ. प्रतिमा-अशोक चंद्राकर रायपुर, तरुण खिचरिया, दुर्ग (पत्नी श्रीमती कुमुदिनी खिचरिया की स्मृति में), श्री राजेश चंद्रवंशी (पिता श्री अनुज चंद्रवंशी की स्मृति में), क्षितिज चंद्रवंशी (पिता श्री राकेश चंद्रवंशी की स्मृति में)। अरुणा-नरेन्द्र तिवारी रायपुर, पी. एस. राठौर- अहमदाबाद। इस मुहिम में नए युवा सदस्य जुड़ें हैं- आयुश चंद्रवंशी रायपुर, जिन्होंने अपने पहले वेतन से एक बच्चे की शिक्षा की जिम्मेदारी उठायी है, जो स्वागतेय पहल है। इस प्रयास में यदि आप भी शामिल होना चाहते हैं तो आपका तहे दिल से स्वागत है। आपके इस अल्प सहयोग से एक बच्चा शिक्षित होकर राष्ट्र की मुख्य धारा में शामिल तो होगा ही साथ ही देश के विकास में भागीदार भी बनेगा। तो आइए देश को शिक्षित बनाने में एक कदम हम भी बढ़ाएँ। सम्पर्क- माटी समाज सेवी संस्था, पंडरी, रायपुर (छग) 492 004, मोबा.94255 24044, Email- drvermar@gmail.com

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