September 27, 2012

तीसरा वर्ष

उदंती का सफर... 
 आप सबके आशीर्वाद, सहयोग और प्रोत्साहन का परिणाम है कि हिन्दी मासिक पत्रिका उदंती नियमानुसार तीसरे वर्ष में प्रवेश कर रही है। इस पत्रिका के साथ न केवल प्रदेश बल्कि पूरे देश के साथ विदेशों में बसे हमारे हिन्दी प्रेमी भारतीय भी लगातार जुड़ते चले गये हैं। अपने आरंभिक काल 2008 अगस्त से ही यह पत्रिका उदंती.com के नाम से वेब पर भी उपलब्ध है। आप सबसे मिले भरपूर स्नेह का प्रतिफल है कि उदंती ने संपूर्ण रंगीन पत्रिका के रूप में अपनी विशिष्ट पहचान बनाते हुए एक मुकाम हासिल कर लिया है।
लोग अक्सर एक सवाल खड़ा करते हैं कि आपकी पत्रिका का मुख्य उद्देश्य क्या है। सच भी है कोई भी रचनात्मक कलात्मक कार्य किसी खास उद्देश्य से ही किया जाता है। चाहे वह अपनी निजी व्यक्तिगत रचनात्मकता को बढ़ावा देने के लिए हो या फिर समाज और देश के किसी बेहतर कार्य को अंजाम देने के लिए। उदंती भी अपनी रचनात्मक कला को बढ़ावा देने के साथ-साथ समाज से जुड़े गंभीर समसामयिक मुद्दों को सामने लाने का एक छोटा सा प्रयास है। इस प्रयास में हम पर्यावरण, प्रदूषण, गरीबी, बेरोजगारी, स्वास्थ्य, शिक्षा, महिला- बच्चों आदि समाज से जुड़ी समस्याओं को भी आगे लाने का प्रयास करते हैं ताकि इस दिशा में पर्याप्त जागरूकता का संदेश फैला सकें। मात्र इतना ही नहीं उदंती अपने देश की समृद्ध कला-संस्कृति, पुरातत्व-पर्यटन, इतिहास आदि से संबंधित जानकारी संजो कर रखने का कार्य भी कर रही है। आरंभ में हमने उदंती में साहित्य को ज्यादा स्थान नहीं दिया था पर पाठकों और स्नेहीजन गुरुजनों के सुझाव पर इसमें साहित्य को भी स्थान देना आरंभ कर दिया है जिसमें साहित्य की सभी विधाओं यथा- कहानी, कविता, गीत-ग़ज़ल, हाइकु, निबंध, लघुकथा, संस्मरण, पुस्तक समीक्षा आदि शामिल हैं। यद्यपि पत्रिका में पृष्ठों की संख्या कम है पर हम इन कम पृष्ठों में ही गागर में सागर भरने का प्रयास करते हैं। हर माह एक रंगीन पत्रिका निकाल पाना आज के दौर में कितना मुश्किल है इससे आप सब वाकिफ हैं ही।  
पिछले वर्ष से तो माह का पूरा अंक किसी विषय विशेष पर केंद्रित किया जाने लगा है। जैसे एक अंक हमने छत्तीसगढ़ी की पहली फिल्म कहि देबे संदेस पर केन्द्रित किया था। एक अंक बारिश पर तो एक अंक पुरातत्व पर.... जो संग्रहणीय अंक बन गए हैं।  
उदंती का आगे का सफर यूं ही जारी रहे इसके लिए आप सबका स्नेह, संबल और प्रोत्साहन मिलता रहेगा इसका पूरा विश्वास है। उदंती में रचनात्मक सहयोग के साथ आपके अमूल्य सुझाव, सलाह और समालोचना का हमेशा स्वागत है। 
शुभकामनाओं के साथ
संपादक 

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एक बच्चे की जिम्मेदारी आप भी लें

अभिनव प्रयास- माटी समाज सेवी संस्था, जागरुकता अभियान के क्षेत्र में काम करती रही है। इसी कड़ी में गत कई वर्षों से यह संस्था बस्तर के जरुरतमंद बच्चों की शिक्षा के लिए धन एकत्रित करने का अभिनव प्रयास कर रही है। बस्तर कोण्डागाँव जिले के कुम्हारपारा ग्राम में बरसों से आदिवासियों के बीच काम रही 'साथी समाज सेवी संस्था' द्वारा संचालित स्कूल 'साथी राऊंड टेबल गुरूकुल' में ऐसे आदिवासी बच्चों को शिक्षा दी जाती है जिनके माता-पिता उन्हें पढ़ाने में असमर्थ होते हैं। इस स्कूल में पढऩे वाले बच्चों को आधुनिक तकनीकी शिक्षा के साथ-साथ परंपरागत कारीगरी की नि:शुल्क शिक्षा भी दी जाती है। प्रति वर्ष एक बच्चे की शिक्षा में लगभग चार हजार रुपये तक खर्च आता है। शिक्षा सबको मिले इस विचार से सहमत अनेक जागरुक सदस्य पिछले कई सालों से माटी समाज सेवी संस्था के माध्यम से 'साथी राऊंड टेबल गुरूकुल' के बच्चों की शिक्षा की जिम्मेदारी लेते आ रहे हैं। प्रसन्नता की बात है कि नये साल से एक और सदस्य हमारे परिवार में शामिल हो गए हैं- रामेश्वर काम्बोज 'हिमांशु' नई दिल्ली, नोएडा से। पिछले कई वर्षों से अनुदान देने वाले अन्य सदस्यों के नाम हैं- प्रियंका-गगन सयाल, मेनचेस्टर (यू.के.), डॉ. प्रतिमा-अशोक चंद्राकर रायपुर, सुमन-शिवकुमार परगनिहा, रायपुर, अरुणा-नरेन्द्र तिवारी रायपुर, डॉ. रत्ना वर्मा रायपुर, राजेश चंद्रवंशी, रायपुर (पिता श्री अनुज चंद्रवंशी की स्मृति में), क्षितिज चंद्रवंशी, बैंगलोर (पिता श्री राकेश चंद्रवंशी की स्मृति में)। इस प्रयास में यदि आप भी शामिल होना चाहते हैं तो आपका तहे दिल से स्वागत है। आपके इस अल्प सहयोग से एक बच्चा शिक्षित होकर राष्ट्र की मुख्य धारा में शामिल तो होगा ही साथ ही देश के विकास में भागीदार भी बनेगा। तो आइए देश को शिक्षित बनाने में एक कदम हम भी बढ़ाएँ। सम्पर्क- माटी समाज सेवी संस्था, रायपुर (छ. ग.) 492 004, मोबा. 94255 24044, Email- drvermar@gmail.com

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लेखकों सेः उदंती.com एक सामाजिक- सांस्कृतिक वेब पत्रिका है। पत्रिका में सम- सामयिक लेखों के साथ पर्यावरण, पर्यटन, लोक संस्कृति, ऐतिहासिक- सांस्कृतिक धरोहर से जुड़े लेखों और साहित्य की विभिन्न विधाओं जैसे कहानी, व्यंग्य, लघुकथाएँ, कविता, गीत, ग़ज़ल, यात्रा, संस्मरण आदि का भी समावेश किया गया है। आपकी मौलिक, अप्रकाशित रचनाओं का स्वागत है। रचनाएँ कृपया Email-udanti.com@gmail.com पर प्रेषित करें।

उदंती.com तकनीकि सहयोग - संजीव तिवारी

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