June 18, 2012

रंग- बिरंगी दुनिया

 रणथम्भोर में प्रकृति का चमत्कार
सृष्टि की जननी जब देखो तब ऐसे अद्भुत कारनामे दिखाती है कि बड़े- बड़े विद्वान उन्हें देखकर हतप्रभ रह जाते हैं। ऐसा ही एक प्रकृति का करिश्मा आजकल रणथम्भोर अभयरण में देश- विदेश के वन्य जीव विशेषज्ञों को अचंभित कर रहा है।
बाघ अकेले जीवन यापन करने वाला प्राणी है। सिर्फ प्रजनन के लिए नर और मादा एक दो दिन के लिए साथ रहते हैं। अन्यथा दोनों अपने- अपने क्षेत्र में स्वतंत्र जीवन व्यतीत करते हैं और अपने क्षेत्र की रक्षा के लिए मरने- मारने को तैयार रहते हैं। मादा अपने बच्चों को अकेले ही 2 वर्ष तक पालती है। बच्चों वाली बाघिन बाघ को भी पास नहीं फटकने नहीं देती क्योंकि बाघ बच्चों को भी मार डालते हैं।
परंतु रणथम्भोर में इन दिनों एक बाघ प्रकृति विरुद्ध आचरण कर रहा है। हुआ यह है कि फरवरी 2011 में 2-4 महीनों की बच्चों की मां बाघिन पूंछ के पास के घांव में जहरबाद हो जाने के कारण मर गई और दोनों बच्चे अनाथ हो गए। अभयारण के कर्मचारियों को भी इन अनाथ बच्चों के बचने की कोई उम्मीद नहीं रही। बाघिन की मृत्यु के बाद दोनों बच्चे कुछ समय के लिए अदृश्य भी हो गए थे। अचानक एक दिन कर्मचारियों ने देखा कि दोनों बाघ शावक एक नर बाघ के साथ हैं और स्वच्थ हैं। अब दोनों शावक सवा साल के हो गए हैं। बाघों की जानी- पहचानी जीवन प्रणाली के अनुसार शावकों का भक्षक बाघ उनका रक्षक बना हुआ है। यथार्थ तो यह है कि जगत जननी प्रकृति की लीला अपरंपार है। 

बुलेट से खेती और प्रेशर कुकर से कॉफी

क्या आपने कभी किसी को रॉयल एनफील्ड बुलेट से खेत की जुताई करते देखा है? या फिर कभी प्रेशर कुकर से झाग वाली कॉफी बनाते देखा है? नहीं न? इसे कहते हैं जुगाड़ और देश में ऐसे ही जुगाड़ को बढ़ावा देने वाली संस्था नेशनल इन्नोवेन फाउंडेशन (एनआईएफ) ने गोवा में कोंकण फल उत्सव में  ऐसे जुगाड़ों की एक प्रदर्शनी लगाई थी। जिसमें गुजरात के मनसुख भाई जगानी का 350 सीसी का वह बुलेट देखा गया जिसके पिछले पहिये को निकालकर उसने एक्सल से जुड़े दो पहिये लगा दिये हैं और उसपर लगा है हल।  जिससे होती है खेत की जुताई। इसी से वह अपने सवा एकड़ के मूंगफली के खेत की जुताई करते हैं।
इसी प्रकार बिहार के पूर्वी चम्पारण के मोहम्मद रोजादीन अपने प्रेशर कुकर को स्टोव पर गर्म करते हैं और उसकी सीटी से जुड़ी हुई नली से निकलने वाले तेज भाप को जग में प्रवाहित कर झाग वाली कॉफी तैयार करते हैं। हैं तो दोनो अजब पर काम के हैं।

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एक बच्चे की जिम्मेदारी आप भी लें

अभिनव प्रयास- माटी समाज सेवी संस्था, जागरुकता अभियान के क्षेत्र में काम करती रही है। इसी कड़ी में गत कई वर्षों से यह संस्था बस्तर के जरुरतमंद बच्चों की शिक्षा के लिए धन एकत्रित करने का अभिनव प्रयास कर रही है। बस्तर कोण्डागाँव जिले के कुम्हारपारा ग्राम में बरसों से आदिवासियों के बीच काम रही 'साथी समाज सेवी संस्था' द्वारा संचालित स्कूल 'साथी राऊंड टेबल गुरूकुल' में ऐसे आदिवासी बच्चों को शिक्षा दी जाती है जिनके माता-पिता उन्हें पढ़ाने में असमर्थ होते हैं। इस स्कूल में पढऩे वाले बच्चों को आधुनिक तकनीकी शिक्षा के साथ-साथ परंपरागत कारीगरी की नि:शुल्क शिक्षा भी दी जाती है। प्रति वर्ष एक बच्चे की शिक्षा में लगभग चार हजार रुपये तक खर्च आता है। शिक्षा सबको मिले इस विचार से सहमत अनेक जागरुक सदस्य पिछले कई सालों से माटी समाज सेवी संस्था के माध्यम से 'साथी राऊंड टेबल गुरूकुल' के बच्चों की शिक्षा की जिम्मेदारी लेते आ रहे हैं। प्रसन्नता की बात है कि नये साल से एक और सदस्य हमारे परिवार में शामिल हो गए हैं- रामेश्वर काम्बोज 'हिमांशु' नई दिल्ली, नोएडा से। पिछले कई वर्षों से अनुदान देने वाले अन्य सदस्यों के नाम हैं- प्रियंका-गगन सयाल, मेनचेस्टर (यू.के.), डॉ. प्रतिमा-अशोक चंद्राकर रायपुर, सुमन-शिवकुमार परगनिहा, रायपुर, अरुणा-नरेन्द्र तिवारी रायपुर, डॉ. रत्ना वर्मा रायपुर, राजेश चंद्रवंशी, रायपुर (पिता श्री अनुज चंद्रवंशी की स्मृति में), क्षितिज चंद्रवंशी, बैंगलोर (पिता श्री राकेश चंद्रवंशी की स्मृति में)। इस प्रयास में यदि आप भी शामिल होना चाहते हैं तो आपका तहे दिल से स्वागत है। आपके इस अल्प सहयोग से एक बच्चा शिक्षित होकर राष्ट्र की मुख्य धारा में शामिल तो होगा ही साथ ही देश के विकास में भागीदार भी बनेगा। तो आइए देश को शिक्षित बनाने में एक कदम हम भी बढ़ाएँ। सम्पर्क- माटी समाज सेवी संस्था, रायपुर (छ. ग.) 492 004, मोबा. 94255 24044, Email- drvermar@gmail.com

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