November 27, 2010

समय की जरूरत है छत्तीसगढ़ रेजीमेंट

- डॉ. परदेशीराम वर्मा

छत्तीसगढ़ के बेहद लोकप्रिय कलाकार हैं शिवकुमार दीपक वे प्रथम छत्तीसगढ़ी फिल्म से लेकर आज तक की फिल्मों में अपना महत्व बनाए हुए हैं। वे मंच पर छत्तीसगढ़ रेजीमेंट के जनरल का एकाभिनय करते हैं। छत्तीसगढ़ के दर्द को हल्के-फुल्के अंदाज में व्यक्त करते हुए वे छत्तीसगढ़ रेजीमेंट की कमी को प्रभावशाली ढंग से रेखांकित करते हैं।
अव्वल और विश्वसनीय छत्तीसगढ़ के नाम पर सेना का कोई रेजीमेंट नहीं है। जाट रेजीमेंट, आसाम राइफल, सिक्ख रेजीमेंट, बिहार, बंगाल, राजस्थान, डोगरा इस तरह सब के नाम पर रेजीमेंट्स हैं। मैं स्वयं 1966 से 1969 तक आसाम राइफल्स में राइफलमैन आपरेटर रेडियो एंड लाइन के पद पर काम कर चुका हूं। किसी प्रदेश या समुदाय के नाम पर गठित सेना से संबंधित लोगों का गर्वित होना स्वाभाविक है। उसी तरह उसके अभाव में हतोत्साहित होना भी स्वाभाविक है। अभी हाल ही में रायपुर पुलिस परेड ग्राउंड में सेना का सम्बलकारी प्रदर्शन हुआ। इससे प्रदे और देश का मनोबल ऊपर उठता है। यह संदेश जाता है कि हम शक्तिशाली हैं। देश हर स्थिति, आपदा, संकट से निपटने में सक्षम है।
छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह के नेतृत्व के इन सात वर्षों में कई यादगार और इतिहास में सदा के लिए अमिट छाप छोडऩे वाली उपलब्धियां छत्तीसगढ़ के नाम दर्ज हुई हंै।
उन्होंने 23.10.10 को अपने उद्बोधन में छत्तीसगढ़ की चिरसंचित अभिलाषा को स्पष्ट करते हुए कहा कि सेना बनाए छत्तीसगढ़ रेजीमेंट। उनके उद्बोधन का यह ऐसा अंश है जिससे उनकी अध्ययन प्रियता और छत्तीसगढ़ के यश के लिए निरंतर प्रयास परिलक्षित होता है। छत्तीसगढ़ रेजीमेंट क्यों हो, यह चिंता डॉ. खूबचंद बघेल अपने नाटक 'जनरैल सिंह' में व्यक्त कर हम सबको आंदोलित करते रहे हैं। यह नाटक खूब लोकप्रिय हुआ।
संत कवि पवन दीवान की पंक्तियां हैं ...
छत्तीसगढ़ में सब कुछ है, पर एक कमी है स्वाभिमान की, मुझसे सही नहीं जाती है, ऐसी चुप्पी वर्तमान की।
संत कवि पवन दीवान, डॉ. खूबचंद बघेल छत्तीसगढ़ भातृसंघ के स्वतंत्र एवं विशिष्ट चिंतक थे।
छत्तीसगढ़ रेजीमेंट के निर्माण की चिंता
छत्तीसगढ़ के स्वाभिमान की चिंता ही है।
अंग्रेजों ने लड़ाका जातियों और दबंग प्रदेशों के नाम पर रेजीमेंटों का निर्माण किया। छत्तीसगढ़ एक शांत और अल्प संतोषी प्रदेश है। लेकिन छत्तीसगढ़ राज्य के विकास का एक दशक पूरा हो रहा है। ऐसे अवसर पर निश्चित रूप से छत्तीसगढ़ रेजीमेंट के गठन की दिशा में विचार देकर मुख्यमंत्री जी ने महत्वपूर्ण कार्य किया है।
डॉ. खूबचंद बघेल ने 1967 के अपने भाषण में कहा है कि एक बात निश्चित है कि ऐसे मौके पर हमारे कदम विपरीत दिशा में पड़े तो इसका अनुचित लाभ शोषक और विघटनकारी वर्ग उठाएगा।
लेखक स्वयं 1966 से 1969 तक आसाम राइफल्स में राइफलमैन आपरेटर रेडियो एंड लाइन के पद पर काम कर चुके हैं। उनकी यह तस्वीर उसी समय की है।
आज विघटनकारी वर्ग अपना चेहरा बदलकर पूरी योजना के साथ काम कर रहा है। पंजाब में लोगों ने विघटनकारियों का बुना हुआ जाल समाप्त किया। आसाम, मिजोहिल, नागालैंड में शांति की बहाली हुई। इन प्रांतों ने अंधकार भरा दौर तो देखा मगर धीरे- धीरे वे अंधकार के सुरंग से रोशनी के जनपथ की ओर बढ़ गए। संयोग देखिए कि इन राज्यों के नाम पर रेजीमेंट भी हैं। सिक्ख और पंजाब दोनों ही नाम से रेजीमेंट हैं। राजपुताना, जाट, महार इत्यादि समुदायों के नाम पर भी रेजीमेंट हैं। छत्तीसगढ़ रेजीमेंट नहीं है, इस व्यथा को न केवल डॉ. बघेल ने व्यक्त किया बल्कि लगातार अन्य लोगों ने भी इस दर्द को अपने- अपने माध्यम से अभिव्यक्त किया।
छत्तीसगढ़ के बेहद लोकप्रिय कलाकार हैं शिवकुमार दीपक वे प्रथम छत्तीसगढ़ी फिल्म से लेकर आज तक की फिल्मों में अपना महत्व बनाए हुए हैं। वे मंच पर छत्तीसगढ़ रेजीमेंट के जनरल का एकाभिनय करते हैं। छत्तीसगढ़ के दर्द को हल्के-फुल्के अंदाज में व्यक्त करते हुए वे छत्तीसगढ़ रेजीमेंट की कमी को प्रभावशाली ढंग से रेखांकित करते हैं।
प्रदेश अब तमाम उपलब्धियों के लिए चिन्हित हो रहा है। समृद्ध भाषा छत्तीसगढ़ी का अपना गौरवशाली स्थान है। छत्तीसगढ़ के कलमकार, साहित्यकार, चिकित्सक, सामजसेवी उल्लेखनीय योगदान के लिए राष्ट्रीय सम्मान से लगातार नवाजे जा रहे हैं। छत्तीसगढ़ के जवान पुलिस में भर्ती होकर संकट के इस दौर में अपना पराक्रम दिखाकर सिद्ध कर रहे हैंं कि अगर उनके प्रदेश के नाम पर भी सेना हो तो वह भी गौरवशाली रेजीमेंट के रूप में स्थापित होगा। प्रदेश के नाम पर रेजीमेंट बनने से अंचल के लोगों को प्रोत्साहन मिलता है। राष्ट्रीय एकता की मिसाल भी ऐसे रेजीमेंट पेश करते हैं। हर रेजीमेंट में दूसरे प्रांतों के जवान भी होते हैं मगर प्रांत विशेष के जवानों के लिए उसे अधिक अनुकूल पाया जाता है। अफसर तो प्राय: दूसरे प्रांत और जाति के ही पाये जाते हैं। प्रांत या जाति के नाम पर बने रेजीमेंट संस्कृति, खानपान, जीवन के भिन्न- भिन्न रंगों को भी व्यक्त करते हैं।
देश को आजाद हुए बासठ वर्ष हो गए। इस बासठ वर्षों में कई ताकतवार रेजीमेंटों का विकास हुआ। खुद आसाम राइफल्स, नागा बटालियन जैसे जाने कितने रेजीमेंट्स आजादी के बाद बने।
नागा लोगों की जाबांजी से छत्तीसगढ़ खूब परीचित है। उसी तरह छत्तीसगढ़ रेजीमेंट बनने का अवसर अब आ गया है। दस वर्षों में पाई गई गौरवशाली उपलब्धियों में एक यह उपलब्धि भी आगे चलकर जुड़ जाय, वह वक्त का तकाजा भी है और भावनात्मक जरूरत भी।
पता- एल आई जी-18, आमदीनगर, भिलाई 490009, मोबाइल 9827993494

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