November 27, 2010

केले के पेड़ से इको फ्रेंडली हेलमेट

केले के उपयोग से भला कौन नहीं वाकिफ है। केला जितना गुणकारी है उतने ही काम का भी। अब तो केले के पेड़ से कई उपयोगी चीजें भी बनाईं जा सकतीं हैं

केरल कोट्टायम के रसायन विज्ञान के एक सेवानिवृत्त प्रोफेसर वी. मैथ्यू ने दावा किया है कि उन्होंने केले के पेड़ के तने और पत्तियों से एक इको- फ्रेंडली हेलमेट, पानी व तेल फिल्टर जैसी कई उपयोगी वस्तुएं बनाई हैं। मैथ्यू पिछले साल ही एक निजी कॉलेज से सेवानिवृत्त हुए हैं। उन्होंने अपने घर को एक प्रयोगशाला में बदल दिया है, जहां वह और उनके दो इंजीनियर मित्र पिछले आठ सालों से प्रयोग कर रहे हैं। मैथ्यू ने बताया, 'हम केले के तने और पत्तियों को छोटे-छोटे भागों में काटकर उन्हें आपस में मिलाकर और पीसकर उनसे जूस निकालते हैं। इसके बाद इस जूस में एक उत्प्रेरक मिलाया जाता है। फिर इस मिश्रण को गर्म करने के बाद ठंडा होने के लिए रख दिया जाता है। इस तरह एक पेस्ट तैयार हो जाता है, जिससे इको- फ्रेंडली हेलमेट और अन्य वस्तुएं जैसे वाटर- फिल्टर, ऑइल- फिल्टर और एयर- फिल्टर बनाए जा सकते हैं।'
मैथ्यू ने अपने उत्पाद का पेटेंट कराने के लिए आवेदन किया है। वे पेस्ट में मिलाए जाने वाले उत्प्रेरक का नाम नहीं बताते हैं, बल्कि कहते हैं 'यह एक राज है और जब तक हमें पेटेंट नहीं मिल जाता हम इस बारे में खुलासा नहीं करना चाहते।' मैथ्यू द्वारा विकसित किए गए उत्पाद को 'सेल्यूलोज नैनो फाइबर' नाम दिया गया है। 'इस उत्पाद को बनाने के लिए कच्चा पदार्थ केला है और इसकी कोई कमी नहीं होने जा रही है, फल को छोड़कर हम इस पेड़ के हर हिस्से का इस्तेमाल कर सकते हैं। हम देश में और देश से बाहर उद्योगों से संपर्क कर रहे हैं, हमें लगता है कि हमारी खोज का इस्तेमाल होना चाहिए।'

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एक बच्चे की जिम्मेदारी आप भी लें

अभिनव प्रयास- माटी समाज सेवी संस्था, जागरुकता अभियान के क्षेत्र में काम करती रही है। इसी कड़ी में गत कई वर्षों से यह संस्था बस्तर के जरुरतमंद बच्चों की शिक्षा के लिए धन एकत्रित करने का अभिनव प्रयास कर रही है। बस्तर कोण्डागाँव जिले के कुम्हारपारा ग्राम में बरसों से आदिवासियों के बीच काम रही 'साथी समाज सेवी संस्था' द्वारा संचालित स्कूल 'साथी राऊंड टेबल गुरूकुल' में ऐसे आदिवासी बच्चों को शिक्षा दी जाती है जिनके माता-पिता उन्हें पढ़ाने में असमर्थ होते हैं। इस स्कूल में पढऩे वाले बच्चों को आधुनिक तकनीकी शिक्षा के साथ-साथ परंपरागत कारीगरी की नि:शुल्क शिक्षा भी दी जाती है। प्रति वर्ष एक बच्चे की शिक्षा में लगभग चार हजार रुपये तक खर्च आता है। शिक्षा सबको मिले इस विचार से सहमत अनेक जागरुक सदस्य पिछले कई सालों से माटी समाज सेवी संस्था के माध्यम से 'साथी राऊंड टेबल गुरूकुल' के बच्चों की शिक्षा की जिम्मेदारी लेते आ रहे हैं। प्रसन्नता की बात है कि नये साल से एक और सदस्य हमारे परिवार में शामिल हो गए हैं- रामेश्वर काम्बोज 'हिमांशु' नई दिल्ली, नोएडा से। पिछले कई वर्षों से अनुदान देने वाले अन्य सदस्यों के नाम हैं- प्रियंका-गगन सयाल, मेनचेस्टर (यू.के.), डॉ. प्रतिमा-अशोक चंद्राकर रायपुर, सुमन-शिवकुमार परगनिहा, रायपुर, अरुणा-नरेन्द्र तिवारी रायपुर, डॉ. रत्ना वर्मा रायपुर, राजेश चंद्रवंशी, रायपुर (पिता श्री अनुज चंद्रवंशी की स्मृति में), क्षितिज चंद्रवंशी, बैंगलोर (पिता श्री राकेश चंद्रवंशी की स्मृति में)। इस प्रयास में यदि आप भी शामिल होना चाहते हैं तो आपका तहे दिल से स्वागत है। आपके इस अल्प सहयोग से एक बच्चा शिक्षित होकर राष्ट्र की मुख्य धारा में शामिल तो होगा ही साथ ही देश के विकास में भागीदार भी बनेगा। तो आइए देश को शिक्षित बनाने में एक कदम हम भी बढ़ाएँ। सम्पर्क- माटी समाज सेवी संस्था, रायपुर (छ. ग.) 492 004, मोबा. 94255 24044, Email- drvermar@gmail.com

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