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Jan 19, 2009

ग़ज़लें




नया साल हमसे दगा न करे
नया साल हमसे दगा न करे
गए साल जैसी ख़ता न करे
अभी तक छलनी है हमारा शहर
नया ज़ख्म खाए खुदा न करें
नए साल में रब से मांगें दुआ
किसी को किसी से जुदा न करें
मेरी जिंदगी तो है सबके लिए
भले कोई मुझसे वफ़ा न करे
फरिश्ता तुझे मान लेगा जहां
अगर तू किसी का बुरा न करे
मोहब्बत से कह दो परे वो रहे
मेरी जिंदगी  बेमज़ा न करे
झमेले बहुत जिंदगानी के हैं
तुझे भूल जाऊं खुदा न करे
न टूटे कोई ख्वाब इसके सबब
कुछ ऐसा ये बादे-सबा न करे
तो ख्वाबों की ताबीर मुमकिन नहीं
अगर जिंदगानी वफ़ा न करे
अमीरों के दर से न पाएगा कुछ
भिखारी से कह दो दुआ न करे
ख्यालों में तुम्हारें ...
ख्यालों में तुम्हारे जब कभी मैं डूब जाता हूं
जिधर देखूं नजऱ के सामने तुमको ही पाता हूं
मोहब्बत दो दिलों में फ़ासला रहने नहीं देती
मैं तुमसे दूर रहकर भी तुम्हें नज़दीक पाता हूं
किसी लम्हा किसी भी पल ये दिल तनहा नहीं होता
तेरी यादों के फूलों से मैं तनहाई सजाता हूं
तेरी चाहत का जादू चल गया है इस तरह मुझ पर
खुशी में रक्स करता हूं मैं ग़म में मुसकराता हूं
तुझे छूकर तेरी ख़ुशबू हवा जब लेके आती है
कोई दिलकश गज़ल लिखता हूं लिखकर गुनगुनाता हूं
मेरे दिल पर मेरे एहसास पर यूं छा गए हो तुम
तुम्हें जब याद करता हूं मैं सब कुछ भूल जाता हूं
मेरी आंखों में तू ही तू मेरी धडक़न में तू ही तू
मैं हर इक सांस अपनी नाम तेरे लिखता जाता हूं

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