May 15, 2020

कुंडली

कुंडली
-डॉ.अशोक भाटिया  
आज फैसले का दिन है; लेकिन समझ नहीं आता, कैसे क्या किया जाए!’ करमचंद सोचता जा रहा है।
दरअसल उसकी बेटी के लिए एक रिश्ता आया है। सब चीज़ें ठीक लग रही हैं । उम्र, कद-काठी, देखने में भी अच्छा है।  पढ़ाई और सैलरी के बारे उनके पड़ोसी चावला जी से भी सारी रिपोर्ट ठीक-ठाक मिली है।
चाय पीते हुए दोनों सोच रहे हैं –कैसे क्या करें? पहला रिश्ता है, वो भी बेटी का।
रीना ने कहा –शुकर है, सब कुछ ओ.के. हो गया है। मेरा विचार है कि अब देर न करें। बस एक बार आप पं. रामप्रसाद से मिल आओ। गुण तो मिला लिये थे, अब बारीकी से जाँच लें। तभी अगला कदम उठाएँ।’
करमचंद ने कहा –लड़के वालों ने कुंडली मिलाकर ओ.के. कर दिया –बहुत है। तुम जानती हो, अपना इन चीज़ों में विश्वास नहीं है।’
-देखो, पहला रिश्ता है। उम्र-भर का साथ होता है। मन में कोई वहम नहीं रहना चाहिए’-रीना ने बिस्कुट की प्लेट आगे बढ़ाते हुए कहा था। यही बात बेटी भी दोनों से कह चुकी थी ।
करमचंद सोच में पड़ गया था। सरदार कौन-सी कुंडली मिलाते हैं ? वो क्या तरक्की नहीं कर रहे ? सब गुण और कुंडलियाँ धरी रह जाती हैं । वह रीना से बोला –तुम्हें मालूम है न ! हमारे पिचाली वाले सब गुण वगैरा मिलाकर ही बहू लाए थे। फिर भी तलाक हो गया। बताओ, क्या मतलब है कुंडली मिलाने का?’
रीना ने भी फौरन कहा था –‘उन्होंने ऐरे-गैरे को कुंडली दिखाई होगी। रामप्रसाद तो जाना-माना ज्योतिषी है ’-वह चाय का आखरी घूँट पीकर बोली थी –‘बस आप अभी चले जाओ। आधे घंटे का ही रस्ता है।’
आज फैसले का दिन है। करमचंद सोचता जा रहा है- उसके लिए यह सबसे मुश्किल काम है। आज तक वह समाज में इसे पाखंड कहकर इसकी खिलाफत करता रहा है . . . कोई जान-पहचान का मिल गया तो क्या कहेगा ?... क्या-क्या पापड़ बेलने पड़ते हैं. . . ! रिश्ता तो अच्छा है, लेकिन वह कुंडली. . .
वह ज्योतिषी के यहाँ पहुँचा तो भीड़ न पाकर हैरान भी हुआ और खुश भी। नमस्ते करके उसने अनमने भाव से दोनों बच्चों की कुंडली के कागज़ उनके सामने रख दिए और हाथ बाँधकर बैठ गया।
पं. रामप्रसाद ने कागज़ उलटे-पलते, फिर उँगलियों पर गिनती करने लगे। तभी भीतर से उनकी बेटी पानी लेकर आई। उसे सफेद कपड़ों में देख करमचंद को ताज्जुब हुआ।
-पंडित जी यह क्या ? बिटिया की तो पिछले साल ही शादी हुई थी !’
रामप्रसाद पीड़ा से दहल गए- ‘आप देख ही रहे हैं। विधि का विधान कौन टाल सकता है ?’
करमचंद सोच में पड़ गया। क्या कहे, क्या करे ? वह सिर खुजलाने लगा। फिर उठकर बोला-‘पंडितजी, बच्चों की कुंडली लौटा दीजिए।’
कागज़ लेकर वह तीर की तरह उनके घर से बाहर निकल आया

0 Comments:

एक बच्चे की जिम्मेदारी आप भी लें

अभिनव प्रयास- माटी समाज सेवी संस्था, जागरुकता अभियान के क्षेत्र में काम करती रही है। इसी कड़ी में गत कई वर्षों से यह संस्था बस्तर के जरुरतमंद बच्चों की शिक्षा के लिए धन एकत्रित करने का अभिनव प्रयास कर रही है। बस्तर कोण्डागाँव जिले के कुम्हारपारा ग्राम में बरसों से आदिवासियों के बीच काम रही 'साथी समाज सेवी संस्था' द्वारा संचालित स्कूल 'साथी राऊंड टेबल गुरूकुल' में ऐसे आदिवासी बच्चों को शिक्षा दी जाती है जिनके माता-पिता उन्हें पढ़ाने में असमर्थ होते हैं। इस स्कूल में पढऩे वाले बच्चों को आधुनिक तकनीकी शिक्षा के साथ-साथ परंपरागत कारीगरी की नि:शुल्क शिक्षा भी दी जाती है। प्रति वर्ष एक बच्चे की शिक्षा में लगभग चार हजार रुपये तक खर्च आता है। शिक्षा सबको मिले इस विचार से सहमत अनेक जागरुक सदस्य पिछले कई सालों से माटी समाज सेवी संस्था के माध्यम से 'साथी राऊंड टेबल गुरूकुल' के बच्चों की शिक्षा की जिम्मेदारी लेते आ रहे हैं। प्रसन्नता की बात है कि नये साल से एक और सदस्य हमारे परिवार में शामिल हो गए हैं- रामेश्वर काम्बोज 'हिमांशु' नई दिल्ली, नोएडा से। पिछले कई वर्षों से अनुदान देने वाले अन्य सदस्यों के नाम हैं- प्रियंका-गगन सयाल, मेनचेस्टर (यू.के.), डॉ. प्रतिमा-अशोक चंद्राकर रायपुर, सुमन-शिवकुमार परगनिहा, रायपुर, अरुणा-नरेन्द्र तिवारी रायपुर, डॉ. रत्ना वर्मा रायपुर, राजेश चंद्रवंशी, रायपुर (पिता श्री अनुज चंद्रवंशी की स्मृति में), क्षितिज चंद्रवंशी, बैंगलोर (पिता श्री राकेश चंद्रवंशी की स्मृति में)। इस प्रयास में यदि आप भी शामिल होना चाहते हैं तो आपका तहे दिल से स्वागत है। आपके इस अल्प सहयोग से एक बच्चा शिक्षित होकर राष्ट्र की मुख्य धारा में शामिल तो होगा ही साथ ही देश के विकास में भागीदार भी बनेगा। तो आइए देश को शिक्षित बनाने में एक कदम हम भी बढ़ाएँ। सम्पर्क- माटी समाज सेवी संस्था, रायपुर (छ. ग.) 492 004, मोबा. 94255 24044, Email- drvermar@gmail.com

-0-

लेखकों सेः उदंती.com एक सामाजिक- सांस्कृतिक वेब पत्रिका है। पत्रिका में सम- सामयिक लेखों के साथ पर्यावरण, पर्यटन, लोक संस्कृति, ऐतिहासिक- सांस्कृतिक धरोहर से जुड़े लेखों और साहित्य की विभिन्न विधाओं जैसे कहानी, व्यंग्य, लघुकथाएँ, कविता, गीत, ग़ज़ल, यात्रा, संस्मरण आदि का भी समावेश किया गया है। आपकी मौलिक, अप्रकाशित रचनाओं का स्वागत है। रचनाएँ कृपया Email-udanti.com@gmail.com पर प्रेषित करें।

उदंती.com तकनीकि सहयोग - संजीव तिवारी

टैम्‍पलैट - आशीष