May 15, 2020

अम्मा

अम्मा  

रमेश गौतम
‘‘अम्मा, थोड़ी खीर और लाओ,’’ प्रिसिपल ने कहा, ‘‘थोड़ा राजमा, चावल भी ले आना।’’
गेम्स टीचर ने चटकारे लिये, हिन्दी टीचर ने पूरी कचौड़ी और पालक पनीर की फरमाईश की तो इंगलिश टीचर ने डकार लेते हुए आइसक्रीम लाने को कहा ।
अम्मा बहुत हैरान और परेशान उनकी सेवा में जुटी थी ।
अम्मा का मन रो रहा था कि बाल दिवस पर ऐसा क्यों होता है। बच्चों को भूलकर अपना ही पेट भरने में लगे है। पुरानी नौकरानी थी तो बच्चों से सम्बंधित सभी बातों और स्कूली गतिविधियों की अच्छी समझ थी, सारे बच्चे भी उन्हें अम्मा कहते थे। वह थी भी ममतामयी । आठवें तक पढ़ी लिखी अम्मा अब अकेली ही थी । पति को मरे बीस साल हो गए, बच्चा कोई हुआ नहीं, स्कूल के बच्चे ही उनके बच्चे थे। मन में गुस्सा भरे इधर से उधर भाग रही थी, बच्चों का दिन भी बच्चों के लिए नहीं होता । सुबह से बच्चों की प्रतियोगिताएँ हो रही हैं । कोई फैन्सी ड्रेस में, कोई खेल कूद में, कोई आर्ट में और कोई भाषण प्रतियोगिता में अपना हुनर दिखा रहा है । निर्णायकों के लिए चाय नाश्ता सब कुछ है पर बच्चों के भूख की किसी को चिंता नहीं, अब लंच पहले करने बैठ गए, अम्मा बेचैन हो गईं । उन्होंने सोचा नौकरी रहे या न रहे, कुछ तो करना ही होगा । उन्होंने युवा चपरासी को पास बुलाया-‘‘मुकेश बेटा धर्म संकट में हूँ, मदद करो।’’
अम्मा के रुआँसे चेहरे को देखकर मुकेश घबरा गया । अम्मा ने उसे हमेशा अपना बेटा समझा सो बहुत मानता था उन्हें, ‘‘अम्मा बोलो तो क्या हुआ?’’
‘‘बेटा, सारे टीचर लंच ले रहे है और बच्चे पंडाल में भूखे बैठे है, मुझे उनकी बहुत चिंता हो रही है ।’’
अम्मा की बाते सुनकर मुकेश भी व्याकुल हो गया ।
‘‘तुम स्टाफ का खाना देखो, मैं बच्चों को आर्ट रूम में ले जा रही हूँ, वही कमरा भोजनालय के निकट है, चुपचाप उन्हें खाना खिला दूँगी फिर जो होगा देखा जाएगा ।’’
अम्मा का दृढ़ निश्चय देख मुकेश का भी हौसला बढ़ा, ‘‘ठीक है अम्मा, आप जाओ बाकी मैं सँभाल लूँगा।’’
अम्मा ने सब बच्चों को ड्राइगरूम में ले जाकर हाथ धुलवाए, फिर भोजन परोसा। छोटे बच्चों को अपने हाथ से पहला कौर खिलाया तो सारे बच्चे चींख पड़े, ‘‘अम्मा, हमें भी अपने हाथ से खिलाओ हमें भी मुझे भी…’’
सारे बच्चों ने खाना खा लिया, अब अम्मा का चित्त शांत था न कोई डर न कोई आशंका ।
‘‘बाय-बाय अम्मा!’’  खिलखिलाते बच्चे बाहर निकल गए ।
मोबा- 9411470604

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एक बच्चे की जिम्मेदारी आप भी लें

अभिनव प्रयास- माटी समाज सेवी संस्था, जागरुकता अभियान के क्षेत्र में काम करती रही है। इसी कड़ी में गत कई वर्षों से यह संस्था बस्तर के जरुरतमंद बच्चों की शिक्षा के लिए धन एकत्रित करने का अभिनव प्रयास कर रही है। बस्तर कोण्डागाँव जिले के कुम्हारपारा ग्राम में बरसों से आदिवासियों के बीच काम रही 'साथी समाज सेवी संस्था' द्वारा संचालित स्कूल 'साथी राऊंड टेबल गुरूकुल' में ऐसे आदिवासी बच्चों को शिक्षा दी जाती है जिनके माता-पिता उन्हें पढ़ाने में असमर्थ होते हैं। इस स्कूल में पढऩे वाले बच्चों को आधुनिक तकनीकी शिक्षा के साथ-साथ परंपरागत कारीगरी की नि:शुल्क शिक्षा भी दी जाती है। प्रति वर्ष एक बच्चे की शिक्षा में लगभग चार हजार रुपये तक खर्च आता है। शिक्षा सबको मिले इस विचार से सहमत अनेक जागरुक सदस्य पिछले कई सालों से माटी समाज सेवी संस्था के माध्यम से 'साथी राऊंड टेबल गुरूकुल' के बच्चों की शिक्षा की जिम्मेदारी लेते आ रहे हैं। प्रसन्नता की बात है कि नये साल से एक और सदस्य हमारे परिवार में शामिल हो गए हैं- रामेश्वर काम्बोज 'हिमांशु' नई दिल्ली, नोएडा से। पिछले कई वर्षों से अनुदान देने वाले अन्य सदस्यों के नाम हैं- प्रियंका-गगन सयाल, मेनचेस्टर (यू.के.), डॉ. प्रतिमा-अशोक चंद्राकर रायपुर, सुमन-शिवकुमार परगनिहा, रायपुर, अरुणा-नरेन्द्र तिवारी रायपुर, डॉ. रत्ना वर्मा रायपुर, राजेश चंद्रवंशी, रायपुर (पिता श्री अनुज चंद्रवंशी की स्मृति में), क्षितिज चंद्रवंशी, बैंगलोर (पिता श्री राकेश चंद्रवंशी की स्मृति में)। इस प्रयास में यदि आप भी शामिल होना चाहते हैं तो आपका तहे दिल से स्वागत है। आपके इस अल्प सहयोग से एक बच्चा शिक्षित होकर राष्ट्र की मुख्य धारा में शामिल तो होगा ही साथ ही देश के विकास में भागीदार भी बनेगा। तो आइए देश को शिक्षित बनाने में एक कदम हम भी बढ़ाएँ। सम्पर्क- माटी समाज सेवी संस्था, रायपुर (छ. ग.) 492 004, मोबा. 94255 24044, Email- drvermar@gmail.com

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