November 17, 2018

प्रेरक

सोशल मीडिया के साथ
 सबसे बड़ी समस्या?
-निशांत मिश्रा
मुझे लगता है कि हमारी मीडिया और सोशल मीडिया को सिर्फ सफल लोगों की कहानियाँ  चाहिए। इसे असफल लोगों से कोई मतलब नहीं है।
सफल लोगों की कहानियाँ  कैसी होती हैं? लोग पैसे वाले हो जाते हैं, लोग फेमस हो जाते हैं, लोग बहुत सारा वजन कम कर लेते हैं, लोगों को वह मिल जाता है जिसकी उन्होंने कभी कोई उम्मीद भी नहीं की होती।
इनमें से बहुत सारी कहानियाँ प्रेरक होती हैं और पढ़ने वाले में आशा का संचार भी करती हैं। हम ऐसी कहानियों को पढ़ना पसंद करते हैं और उन्हें नेट पर देखते भी हैं। हम इन कहानियों को अपने मित्रों के साथ शेयर करते हैं जिसके परिणाम स्वरुप वे वायरल हो जाती हैं और बहुत बड़े वर्ग तक उनका प्रसार हो जाता है।
तो इसमें इसमें समस्या क्या है?
इसमें समस्या यह है कि यह हर चीज को बहुत आसान बताती है।
कभी-कभी हमें सिर्फ़ दो फोटो दिखाए जाते हैं ,जिसमें से पहले फोटो में एक बहुत मोटे व्यक्ति को देखते हैं और दूसरे फोटो में हमें कुछ शब्दों में यह बताया जाता है कि इस व्यक्ति ने इतने दिनों में इतने सारा किलो वजन कम कर लिया।
कभी-कभी हमें एक छोटा -सा एक पेज का आर्टिकल पढ़ने को मिलता है, जिसमें यह बताया जाता है कि एयरबीएनबी नामक एक कंपनी इतने छोटे स्तर से शुरू हुई और देखते ही देखते वह बहुत बड़ी और सफल कंपनी में बदल गई और उसके संस्थापक अरबपति बन गए।
कभी हमें एक छोटा सा वीडियो देखने को मिलता है जिसमें कोई सफल इंटरप्रेन्योर यह बताता है कि उसने कैसे एक शानदार प्रोडक्ट बेचकर अपना पहला मिलियन डॉलर कमा लिया।
ये कहानियाँ छोटी-छोटी होती हैं। इनमें ज्यादा डिटेल्स नहीं होते। ये उस दुख, दर्द, असफलता, संघर्ष, त्याग और परिश्रम के बारे में हमें नहीं बताती ,जिनका सामना करना पड़ा। सफलता पाने के लिए किए गए प्रयासों के बारे में भी बहुत कुछ नहीं बताया जाता।
इनमें बस इतना बताया जाता है कि शुरूआत कितनी कठिन थी और सफलता कितनी गौरवशाली रही।
और यही इनकी प्रमुख समस्या है।
इन कहानियों को पढ़ने और देखने के बाद कुछ लोगों को लगने लगता है कि सफलता प्राप्त करना बहुत आसान है इसलिए वे भी मैदान में कूद पड़ते हैं और संघर्ष करने लगते हैं।
इनमें से कुछ लोग जल्दी हार मानकर छोड़ देते हैं और कुछ लोग डाइट पिल की तरह लाइफ़हैक आजमाने लगते हैं। वे सफल व्यक्तियों द्वारा लिखी गई रातों रात करोड़पति कैसे बनेंजैसी ईबुक्स माँगगाकर पढ़ते हैं और उन्हें लगता है कि इन किताबों में दिए गए शॉर्टकट आजमाने पर वे भी रातोंरात करोड़पति बन जाएँगे।
लेकिन सफलता का कोई हैक या शॉर्टकट नहीं होता। हमें सफल होने के लिए अपना सबकुछ झोंकना पड़ता है। हमें अपना पूरा समय, पैसा, परिश्रम लगाना पड़ता है और घनघोर प्रयास करना पड़ता है। हमें अपने दिल पर पत्थर रखकर बहुत बड़े त्याग करने पड़ते हैं। हमें किसी बोझा ढोने वाले जानवर की तरह जीते रहकर एक-एक कदम आगे बढ़ना होता है। हमें यह जानते हुए भी हर बाधा को पार करते रहना पड़ता है कि हमें सफलता मिलने की संभावना कभी-कभी न-के-बराबर होती है।
हमारे समाज के साथ आज सबसे बड़ी समस्या यह है कि इसमें बिना किसी परिश्रम, प्रयास, समर्पण और त्याग के ही सफलता प्राप्त करने की इच्छा रखने वालों की संख्या बहुत अधिक हो गई है, और इससे होने वाला सबसे बड़ा नुकसान यह है कि हमारे समाज में ऐसे लोगों की बहुतायत हो गई है जो सफल होने के सपने देखते रहते हैं और इसके लिए हर तरह के शॉर्टकट आजमाते रहते हैं।(हिन्दी ज़ेन से)

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एक बच्चे की जिम्मेदारी आप भी लें

अभिनव प्रयास- माटी समाज सेवी संस्था, जागरुकता अभियान के क्षेत्र में काम करती रही है। इसी कड़ी में गत कई वर्षों से यह संस्था बस्तर के जरुरतमंद बच्चों की शिक्षा के लिए धन एकत्रित करने का अभिनव प्रयास कर रही है। बस्तर कोण्डागाँव जिले के कुम्हारपारा ग्राम में बरसों से आदिवासियों के बीच काम रही 'साथी समाज सेवी संस्था' द्वारा संचालित स्कूल 'साथी राऊंड टेबल गुरूकुल' में ऐसे आदिवासी बच्चों को शिक्षा दी जाती है जिनके माता-पिता उन्हें पढ़ाने में असमर्थ होते हैं। इस स्कूल में पढऩे वाले बच्चों को आधुनिक तकनीकी शिक्षा के साथ-साथ परंपरागत कारीगरी की नि:शुल्क शिक्षा भी दी जाती है। प्रति वर्ष एक बच्चे की शिक्षा में लगभग चार हजार रुपये तक खर्च आता है। शिक्षा सबको मिले इस विचार से सहमत अनेक जागरुक सदस्य पिछले कई सालों से माटी समाज सेवी संस्था के माध्यम से 'साथी राऊंड टेबल गुरूकुल' के बच्चों की शिक्षा की जिम्मेदारी लेते आ रहे हैं। प्रसन्नता की बात है कि नये साल से एक और सदस्य हमारे परिवार में शामिल हो गए हैं- रामेश्वर काम्बोज 'हिमांशु' नई दिल्ली, नोएडा से। पिछले कई वर्षों से अनुदान देने वाले अन्य सदस्यों के नाम हैं- प्रियंका-गगन सयाल, मेनचेस्टर (यू.के.), डॉ. प्रतिमा-अशोक चंद्राकर रायपुर, सुमन-शिवकुमार परगनिहा, रायपुर, अरुणा-नरेन्द्र तिवारी रायपुर, डॉ. रत्ना वर्मा रायपुर, राजेश चंद्रवंशी, रायपुर (पिता श्री अनुज चंद्रवंशी की स्मृति में), क्षितिज चंद्रवंशी, बैंगलोर (पिता श्री राकेश चंद्रवंशी की स्मृति में)। इस प्रयास में यदि आप भी शामिल होना चाहते हैं तो आपका तहे दिल से स्वागत है। आपके इस अल्प सहयोग से एक बच्चा शिक्षित होकर राष्ट्र की मुख्य धारा में शामिल तो होगा ही साथ ही देश के विकास में भागीदार भी बनेगा। तो आइए देश को शिक्षित बनाने में एक कदम हम भी बढ़ाएँ। सम्पर्क- माटी समाज सेवी संस्था, रायपुर (छ. ग.) 492 004, मोबा. 94255 24044, Email- drvermar@gmail.com

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