May 10, 2016

दो ग़ज़लें

उनकी आँखों में

- डॉ.ब्रह्मजीत गौतम

(1)
   उन की आँखों में ऐसी तासीर है
  जो देखे सँवरे उसकी तक़दीर है

  कहते हैं कविता होती है पीर से
     कविता से कवि भी हो जाता पीर है

     जिस के पास नहीं दो दाने प्यार के
     राजा हो कर भी वो शख़्स फ़क़ीर है

     क्या रक्खा है मंदिर मस्ज़िद चर्च में
   घट-घट के अंदर उसकी तस्वीर है

    सब ने मैली कर दी चादर ओढ़ कर
     ज्यों की त्यों धर दे वो दास कबीर है

 धूल धरो माथे पर अपने देश की
  धूल नहीं यह चंदन और अबीर है

         'जीत' ग़ज़ल वह कहलाती है पुरअसर  
      जिसका हर इक श़ेर लगे ज्यों तीर है 

        क्यों हो गया ख़फ़ा
     (2)
     यार क्यों हो गया ख़फ़ा मुझसे
    ऐसी क्या हो गई ख़ता मुझसे

    जख़्म ये दिल पे मेरे कैसे हुए
 हाल कोई तो पूछता मुझसे

    वक़्त की बेरुखी का क्या कहि
   साथ हो कर भी है जुदा मुझसे

      कोई क़ातिल है उनके रुख़ का तिल
               जान मेरी तो ले गया मुझसे

               नींव ने यूँ कहा कंगूरे से
               ये बुलंदी हुई अता मुझसे

               मंज़िलें ख़ुद ही पास आएँगी
               ले के चल हौसला ज़रा मुझसे

               हार में ग़म न 'जीत' में ख़ुशियाँ
               सीख लीजे ये फ़ल्सफ़ा मुझसे                                                

     युक्का- 206, पैरामाउंट सिम्फनी, क्रासिंग रिपब्लिक, गाज़ियाबाद- 201016मो. 9760007838, 9425102154   

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एक बच्चे की जिम्मेदारी आप भी लें

अभिनव प्रयास- माटी समाज सेवी संस्था, जागरुकता अभियान के क्षेत्र में काम करती रही है। इसी कड़ी में गत कई वर्षों से यह संस्था बस्तर के जरुरतमंद बच्चों की शिक्षा के लिए धन एकत्रित करने का अभिनव प्रयास कर रही है। बस्तर कोण्डागाँव जिले के कुम्हारपारा ग्राम में बरसों से आदिवासियों के बीच काम रही 'साथी समाज सेवी संस्था' द्वारा संचालित स्कूल 'साथी राऊंड टेबल गुरूकुल' में ऐसे आदिवासी बच्चों को शिक्षा दी जाती है जिनके माता-पिता उन्हें पढ़ाने में असमर्थ होते हैं। इस स्कूल में पढऩे वाले बच्चों को आधुनिक तकनीकी शिक्षा के साथ-साथ परंपरागत कारीगरी की नि:शुल्क शिक्षा भी दी जाती है। प्रति वर्ष एक बच्चे की शिक्षा में लगभग चार हजार रुपये तक खर्च आता है। शिक्षा सबको मिले इस विचार से सहमत अनेक जागरुक सदस्य पिछले कई सालों से माटी समाज सेवी संस्था के माध्यम से 'साथी राऊंड टेबल गुरूकुल' के बच्चों की शिक्षा की जिम्मेदारी लेते आ रहे हैं। प्रसन्नता की बात है कि नये साल से एक और सदस्य हमारे परिवार में शामिल हो गए हैं- रामेश्वर काम्बोज 'हिमांशु' नई दिल्ली, नोएडा से। पिछले कई वर्षों से अनुदान देने वाले अन्य सदस्यों के नाम हैं- प्रियंका-गगन सयाल, मेनचेस्टर (यू.के.), डॉ. प्रतिमा-अशोक चंद्राकर रायपुर, सुमन-शिवकुमार परगनिहा, रायपुर, अरुणा-नरेन्द्र तिवारी रायपुर, डॉ. रत्ना वर्मा रायपुर, राजेश चंद्रवंशी, रायपुर (पिता श्री अनुज चंद्रवंशी की स्मृति में), क्षितिज चंद्रवंशी, बैंगलोर (पिता श्री राकेश चंद्रवंशी की स्मृति में)। इस प्रयास में यदि आप भी शामिल होना चाहते हैं तो आपका तहे दिल से स्वागत है। आपके इस अल्प सहयोग से एक बच्चा शिक्षित होकर राष्ट्र की मुख्य धारा में शामिल तो होगा ही साथ ही देश के विकास में भागीदार भी बनेगा। तो आइए देश को शिक्षित बनाने में एक कदम हम भी बढ़ाएँ। सम्पर्क- माटी समाज सेवी संस्था, रायपुर (छ. ग.) 492 004, मोबा. 94255 24044, Email- drvermar@gmail.com

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