December 18, 2012

बॉवरबर्ड


घोंसला सजाने वाला पक्षी
हाल में एक अध्ययन के नतीजे प्रकाशित हुए हैं, जिनसे लगता है कि एक पक्षी है जो अपने घोंसले के आसपास पौधे उगाता है। और इस 'जंगलसे तय होता है कि वह नर पक्षी साथी ढूँढने में कितना सफल होगा। अभी यह कहना मुश्किल है कि क्या वह जानबूझकर यह जंगल रोपता है।
धब्बेदार बॉवरबर्ड का नर तिनके जोड़-जोड़कर एक घोंसला बनाता है। घोंसले को बॉवर कहते हैं। यह कुटिया बनाने के बाद वह इसे तरह-तरह की चीजों से सजाता है ताकि किसी मादा को रिझा सके। सजावट की सबसे महत्त्वपूर्ण वस्तु सोलेनम एलिप्टिकम नामक पौधे की बेरियाँ होती हैं। और लगता है कि अपने घोंसले को सजाने के चक्कर में यह पक्षी उस इलाके में पौधों के वितरण को बदल रहा है।
यूके के एक्सेटर विश्वविद्यालय के जोआ मैडन ने ऑस्ट्रेलिया के क्वींसलैण्ड क्षेत्र में सोलेनम एलिप्टिकम के वितरण का अध्ययन किया। यह क्षेत्र धब्बेदार बॉवर पक्षी का प्राकृतवास है। हालाँकि ये पक्षी अपना घोंसला उन जगहों पर नहीं बनाते जहाँ सोलेनम एलिप्टिकम की बहुतायत हो, मगर घोंसला बनाने के एक साल बाद हर घोंसले के आस-पास औसतन 40 सोलेनम एलिप्टिकम पौधे पाए गए। जिन पक्षियों के घोंसलों के आस-पास ज़्यादा पौधे थे उनके घोसलों में बेरियाँ भी ज़्यादा पाई गर्इं। मैडन यह तो पहले ही देख चुके थे कि बेरियों की संख्या के आधार पर नर पक्षी की संतानोत्पत्ति में सफलता का अच्छा अनुमान लगाया जा सकता है। तो मैडन का अनुमान है कि मुख्य काम घोंसले में बेरियाँ इकट्ठी करना है। जो बेरियाँ मुरझा जाती हैं उन्हें यह पक्षी घोंसले से बाहर फेंक देता होगा और वे वहाँ उग आती होंगी।

इस तरह से बॉवर पक्षी इलाके में सोलेनम एलिप्टिकम के वितरण को बदल रहा है। मगर क्या इसे खेती करना कहेंगे? खुद मैडन मानते हैं कि उक्त परिणामों के आधार पर यह तो नहीं कहा जा सकता कि यह पक्षी जानबूझकर पौधे रोप रहा है। मगर साथ ही वे यह भी कहने से नहीं चूकते कि मनुष्य द्वारा खेती की शुरुआत अनायास ही हुई थी। तो फिर बॉवर पक्षी के क्रियाकलापों को भी प्रारंभिक खेती क्यों नहीं माना जा सकता? (स्रोत फीचर्स)

0 Comments:

लेखकों से अनुरोध...

उदंती.com एक सामाजिक- सांस्कृतिक वेब पत्रिका है। पत्रिका में सम- सामयिक मुद्दों के साथ पर्यावरण को बचाने तथा पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए उठाए जाने वाले कदमों को प्राथमिकता से प्रकाशित किया जाता है। समाजिक जन जागरण के विभिन्न मुद्दों को शामिल करने के साथ ऐतिहासिक सांस्कृतिक धरोहर से जुड़े लेखों और साहित्य की विभिन्न विधाओं जैसे कहानी, कविता, गीत, गजल, व्यंग्य, निबंध, लघुकथाएं और संस्मरण आदि का भी समावेश किया गया है। उपर्युक्त सभी विषयों पर मौलिक अप्रकाशित रचनाओं का स्वागत है। आप अपनी रचनाएँ Email-udanti.com@gmail.comपर प्रेषित करें।

माटी समाज सेवी संस्था का अभिनव प्रयास
एक बच्चे की जिम्मेदारी आप भी लें...
माटी समाज सेवी संस्था, समाज के विभिन्न जागरुकता अभियान के क्षेत्र में काम करती रही है। पिछले वर्षों में संस्था ने समाज से जुड़े विभिन्न विषयों जैसे शिक्षा, स्वास्थ्य,पर्यावरण, प्रदूषण आदि क्षेत्रों में काम करते हुए जागरुकता लाने का प्रयास किया है। इसी कड़ी में गत कई वर्षों से यह संस्था बस्तर के जरुरतमंद बच्चों की शिक्षा के लिए धन एकत्रित करने का अभिनव प्रयास कर रही है।
बस्तर कोण्डागाँव जिले के कुम्हारपारा ग्राम में बरसों से कारीगर आदिवासियों के बीच काम रही “साथी समाज सेवी संस्था” द्वारा संचालित स्कूल “साथी राऊंड टेबल गुरूकुल” में ऐसे आदिवासी बच्चों को शिक्षा दी जाती है जिनके माता-पिता उन्हें पढ़ाने में असमर्थ होते हैं। प्रति वर्ष एक बच्चे की शिक्षा में लगभग चार हजार रुपए तक खर्च आता है। शिक्षा सबको मिले इस विचार से सहमत अनेक लोग पिछले कई सालों से माटी संस्था के माध्यम से “साथी राऊंड टेबल गुरूकुल” के बच्चों की शिक्षा की जिम्मेदारी लेते आ रहे हैं। पिछले कई वर्षों से माटी समाज सेवी संस्था उक्त स्कूल के लगभग 15 से 20 बच्चों के लिए शिक्षा शुल्क एकत्रित कर रही है। अनुदान देने वालों में शामिल हैं- प्रियंका-गगन सयाल, लंदन मैनचेस्टर, डॉ. प्रतिमा-अशोक चंद्राकर रायपुर, तरुण खिचरिया, दुर्ग (पत्नी श्रीमती कुमुदिनी खिचरिया की स्मृति में), श्री राजेश चंद्रवंशी (पिता श्री अनुज चंद्रवंशी की स्मृति में), क्षितिज चंद्रवंशी (पिता श्री राकेश चंद्रवंशी की स्मृति में)। अरुणा-नरेन्द्र तिवारी रायपुर, पी. एस. राठौर- अहमदाबाद। इस मुहिम में नए युवा सदस्य जुड़ें हैं- आयुश चंद्रवंशी रायपुर, जिन्होंने अपने पहले वेतन से एक बच्चे की शिक्षा की जिम्मेदारी उठायी है, जो स्वागतेय पहल है। इस प्रयास में यदि आप भी शामिल होना चाहते हैं तो आपका तहे दिल से स्वागत है। आपके इस अल्प सहयोग से एक बच्चा शिक्षित होकर राष्ट्र की मुख्य धारा में शामिल तो होगा ही साथ ही देश के विकास में भागीदार भी बनेगा। तो आइए देश को शिक्षित बनाने में एक कदम हम भी बढ़ाएँ। सम्पर्क- माटी समाज सेवी संस्था, पंडरी, रायपुर (छग) 492 004, मोबा.94255 24044, Email- drvermar@gmail.com

उदंती.com तकनीकि सहयोग - संजीव तिवारी

टैम्‍पलैट - आशीष