October 29, 2011

याददाश्त कम होती है टुकड़ों में नींद लेने से

आप क्या अपनी नींद को टुकड़ों में पूरा करते हैं। यदि हां, तो आपको डॉक्टर से सलाह- मशविरा करने का समय आ गया है क्योंकि टुकड़ों- टुकड़ों में नींद लेने से याददाश्त बनने की क्षमता प्रभावित होती है और इससे आगे डिमेंशिया भी हो सकता है। एक ताजा अध्ययन में कहा गया है कि इस प्रकार नींद लेना स्मरण शक्ति को कमजोर करता है। स्टेनफोर्ड यूनिवर्सिटी द्वारा करवाए गए इस शोध के प्रमुख डॉ. लुइस डे लेका ने कहा कि लगातार नींद सेहत के लिए बेहद मायने रखती है पर इसका अभाव अलजाइमर तथा अन्य उम्र संबंधी बीमारियों को निमंत्रण दे सकता है। शोधकर्ताओं ने प्रयोगशाला में चूहों पर किए गए परीक्षण के बाद यह निष्कर्ष निकाला है। इस अध्ययन को 'प्रोसिडिंग्स ऑफ दी नेशनल एकेडमी ऑफ साइंस' जर्नल में प्रकाशित किया गया है। अपने शोध में शोधकर्ताओं ने पाया कि नींद में बाधा आने से चूहों को रोजमर्रा की पहचानी हुई वस्तुओं को भी पहचानने में परेशानी हुई। यह अध्ययन टुकड़ों- टुकड़ों में ली गई नींद पर आधारित था। शोधकर्ताओं ने अपने अध्ययन में चूहों के सोने के क्रम में ऑप्टोजेनेटिक तकनीक का सहारा लिया जिसमें एक तरह का प्रकाश चूहे के मस्तिष्क में भेजा गया। यह प्रकाश मस्तिष्क की एक खास कोशिका को उद्दीपित करता है जिसका नियंत्रण प्रकाश से ही होता है। शोधकर्ताओं ने चूहों के नींद में होने के दौरान उनके मस्तिष्क में सीधे प्रकाश तरंगें भेजीं। इसका मतलब यह था चूहों में पूरी तरह नींद बाधित नहीं हुई बल्कि उनकी नींद को टुकड़ों- टुकड़ों में बाधित किया गया। इस प्रयोग के बाद चूहों को दो अलग- अलग प्रकार की चीजें दिखाई गईं। उनमें एक वह चीज भी थी जिसे वह रोज देखते थे लेकिन नींद की कमी के कारण वे उसे पहचान नहीं पाए।


अवसाद से मुक्ति के लिए दयालु बनें

क्या आप अवसाद से पीडि़त हैं तो अब चिंता करने की कोई बात नहीं। इसके लिए सिर्फ अपने जीव में थोड़ा बदलाव लाइए और अवसाद से मुक्त हो जाइए।
जी हां, शोधकर्ताओं ने अपने ताजा अध्ययन के आधार पर दावा किया है कि दयालुता और करुणा अवसाद पर काबू पाने का सबसे कारगर हथियार है। विश्व स्वास्थ्य संगठन के मुताबिक दुनिया में अवसाद से पीडि़त लोगों की संख्या 10 करोड़ है। हालांकि एंटीडिप्रेशन की दवा कुछ लोगों के जीवन को बचाता है लेकिन प्रारंभिक दवा से 30 से 40 प्रतिशत मरीजों को ही अवसाद से छुटकारा मिल पाता है। विविध तरह के दवाइयों के इस्तेमाल के बावजूद एक तिहाई लोग अवसाद के साथ जीने को विवश हैं। कैलीफोर्निया यूनिवर्सिटी के शोधकर्ताओं ने अपने गहन जांच- पड़ताल में पाया है कि दयालुता और करुणामय जैसे गुण अवसाद को भगाने के लिए प्रभावकारी इलाज है।
अध्ययन के मुताबिक अवसाद के इलाज के लिए नई खोज यानी पोजीटिव एक्टीविटी इंटरवेंशन अवसाद के इलाज के लिए बेहद कारगर साबित हो सकता है। पोजीटिव एक्टीविटी इंटरवेंशन में सकारात्मक सोच और दयालुता के गुण शामिल हैं।


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एक बच्चे की जिम्मेदारी आप भी लें

अभिनव प्रयास- माटी समाज सेवी संस्था, जागरुकता अभियान के क्षेत्र में काम करती रही है। इसी कड़ी में गत कई वर्षों से यह संस्था बस्तर के जरुरतमंद बच्चों की शिक्षा के लिए धन एकत्रित करने का अभिनव प्रयास कर रही है। बस्तर कोण्डागाँव जिले के कुम्हारपारा ग्राम में बरसों से आदिवासियों के बीच काम रही 'साथी समाज सेवी संस्था' द्वारा संचालित स्कूल 'साथी राऊंड टेबल गुरूकुल' में ऐसे आदिवासी बच्चों को शिक्षा दी जाती है जिनके माता-पिता उन्हें पढ़ाने में असमर्थ होते हैं। इस स्कूल में पढऩे वाले बच्चों को आधुनिक तकनीकी शिक्षा के साथ-साथ परंपरागत कारीगरी की नि:शुल्क शिक्षा भी दी जाती है। प्रति वर्ष एक बच्चे की शिक्षा में लगभग चार हजार रुपये तक खर्च आता है। शिक्षा सबको मिले इस विचार से सहमत अनेक जागरुक सदस्य पिछले कई सालों से माटी समाज सेवी संस्था के माध्यम से 'साथी राऊंड टेबल गुरूकुल' के बच्चों की शिक्षा की जिम्मेदारी लेते आ रहे हैं। प्रसन्नता की बात है कि नये साल से एक और सदस्य हमारे परिवार में शामिल हो गए हैं- रामेश्वर काम्बोज 'हिमांशु' नई दिल्ली, नोएडा से। पिछले कई वर्षों से अनुदान देने वाले अन्य सदस्यों के नाम हैं- प्रियंका-गगन सयाल, मेनचेस्टर (यू.के.), डॉ. प्रतिमा-अशोक चंद्राकर रायपुर, सुमन-शिवकुमार परगनिहा, रायपुर, अरुणा-नरेन्द्र तिवारी रायपुर, डॉ. रत्ना वर्मा रायपुर, राजेश चंद्रवंशी, रायपुर (पिता श्री अनुज चंद्रवंशी की स्मृति में), क्षितिज चंद्रवंशी, बैंगलोर (पिता श्री राकेश चंद्रवंशी की स्मृति में)। इस प्रयास में यदि आप भी शामिल होना चाहते हैं तो आपका तहे दिल से स्वागत है। आपके इस अल्प सहयोग से एक बच्चा शिक्षित होकर राष्ट्र की मुख्य धारा में शामिल तो होगा ही साथ ही देश के विकास में भागीदार भी बनेगा। तो आइए देश को शिक्षित बनाने में एक कदम हम भी बढ़ाएँ। सम्पर्क- माटी समाज सेवी संस्था, रायपुर (छ. ग.) 492 004, मोबा. 94255 24044, Email- drvermar@gmail.com

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