October 29, 2011

आपको भी पसंद है चॉकलेट आईसक्रीम?

चॉकलेट से बच्चों में ग्लूकोज की मात्रा भी बढ़ जाती है, जो एक तरह से कम उम्र में मधुमेह को न्यौता देने जैसा है। हालांकि सप्ताह में एकाध बार चॉकलेट आईसक्रीम का स्वाद लेने में कोई परेशानी नहीं है, लेकिन इसकी ज्यादा मात्रा मोटापे और वजन बढऩे के लिए भी जिम्मेदार हो सकती है।
बच्चों को यूं तो आईसक्रीम हर मौसम में अच्छी लगती है, लेकिन गर्मियों में उनके लिए इसका मजा दोगुना हो जाता है। और फिर यदि बात चॉकलेट आइसक्रीम की हो तो कहने ही क्या। लेकिन, विशेषज्ञों की मानें तो इसके फायदे कम नुकसान ज्यादा हैं।
बाल रोग विशेषज्ञ बच्चों की चॉकलेट आईसक्रीम खाने की आदत को उनके लिए खतरनाक मानते हैं।
बाल चिकित्सक डॉ. संजीव सूरी कहते हैं कि चॉकलेट आईसक्रीम की आदत बच्चों में लत का रूप ले लेती है, क्योंकि इसमें कैफीन जैसे रासायनिक तत्व होते हैं, जिससे दिमाग को इसकी आदत पड़ जाती है। ऐसे में बार- बार इसे खाने का मन
करता है।
उन्होंने बताया कि चॉकलेट से बच्चों में ग्लूकोज की मात्रा भी बढ़ जाती है, जो एक तरह से कम उम्र में मधुमेह को न्यौता देने जैसा है। हालांकि सप्ताह में एकाध बार चॉकलेट आईसक्रीम का स्वाद लेने में कोई परेशानी नहीं है, लेकिन इसकी ज्यादा मात्रा मोटापे और वजन बढऩे के लिए भी जिम्मेदार हो सकती है।
शिशु रोग विशेषज्ञ डॉ. विद्या साहू कहती हैं कि चॉकलेट आईसक्रीम के सेवन से मस्तिष्क की कार्यक्षमता धीमी हो सकती है। इसका अधिक सेवन सिरदर्द का कारण भी बन सकता है। इसमें कृत्रिम चीनी होने की वजह से मोटापा भी बढ़ता है और मधुमेह, रक्तचाप, धमनियों का कड़ा होना जैसी समस्याएं भी हो सकती हैं।
डॉ. विद्या ने बताया कि बच्चों में चॉकलेट आईसक्रीम के ज्यादा सेवन से एकाग्रता न हो पाने की समस्या हो जाती है। इसके अलावा, स्वाद और ताजगी के लिए इसमें मिलाए जाने वाले कई तत्व और रसायन जिगर तथा गुर्दे के लिए नुकसानदायक हो सकते हैं।
हृदय रोग विशेषज्ञ डॉक्टर रामेन्द्र सिंह ने कहा कि चॉकलेट खाना सेहत के लिए फायदेमंद कम और नुकसानदायक अधिक होता है। चॉकलेट आईसक्रीम को इससे अलग नहीं कहा जा सकता। उन्होंने कहा कि बहुत ज्यादा तनाव में होने पर थोड़ी चॉकलेट खाना बहुत अच्छा होता है। इससे तनाव बढ़ाने वाले हार्मोन का स्राव नियंत्रित होता है। मगर तनाव में सिर्फ सादी चॉकलेट ही फायदेमंद होती है। इसमें आइसक्रीम चॉकलेट की कोई भूमिका नहीं होती।
बहरहाल, डॉ. सिंह ने कहा कि स्वाद की वजह से अक्सर बच्चे चॉकलेट आईसक्रीम पसंद करते हैं पर इससे उनको नुकसान हो सकता है। कैफीन तत्व सेहत के लिए हानिकारिक होता है और चॉकलेट आईसक्रीम में कैफीन होता है। जाहिर है कि बच्चों को इससे नुकसान होगा। इसीलिए अभिभावकों को सतर्क रहना चाहिए।

0 Comments:

एक बच्चे की जिम्मेदारी आप भी लें

अभिनव प्रयास- माटी समाज सेवी संस्था, जागरुकता अभियान के क्षेत्र में काम करती रही है। इसी कड़ी में गत कई वर्षों से यह संस्था बस्तर के जरुरतमंद बच्चों की शिक्षा के लिए धन एकत्रित करने का अभिनव प्रयास कर रही है। बस्तर कोण्डागाँव जिले के कुम्हारपारा ग्राम में बरसों से आदिवासियों के बीच काम रही 'साथी समाज सेवी संस्था' द्वारा संचालित स्कूल 'साथी राऊंड टेबल गुरूकुल' में ऐसे आदिवासी बच्चों को शिक्षा दी जाती है जिनके माता-पिता उन्हें पढ़ाने में असमर्थ होते हैं। इस स्कूल में पढऩे वाले बच्चों को आधुनिक तकनीकी शिक्षा के साथ-साथ परंपरागत कारीगरी की नि:शुल्क शिक्षा भी दी जाती है। प्रति वर्ष एक बच्चे की शिक्षा में लगभग चार हजार रुपये तक खर्च आता है। शिक्षा सबको मिले इस विचार से सहमत अनेक जागरुक सदस्य पिछले कई सालों से माटी समाज सेवी संस्था के माध्यम से 'साथी राऊंड टेबल गुरूकुल' के बच्चों की शिक्षा की जिम्मेदारी लेते आ रहे हैं। प्रसन्नता की बात है कि नये साल से एक और सदस्य हमारे परिवार में शामिल हो गए हैं- रामेश्वर काम्बोज 'हिमांशु' नई दिल्ली, नोएडा से। पिछले कई वर्षों से अनुदान देने वाले अन्य सदस्यों के नाम हैं- प्रियंका-गगन सयाल, मेनचेस्टर (यू.के.), डॉ. प्रतिमा-अशोक चंद्राकर रायपुर, सुमन-शिवकुमार परगनिहा, रायपुर, अरुणा-नरेन्द्र तिवारी रायपुर, डॉ. रत्ना वर्मा रायपुर, राजेश चंद्रवंशी, रायपुर (पिता श्री अनुज चंद्रवंशी की स्मृति में), क्षितिज चंद्रवंशी, बैंगलोर (पिता श्री राकेश चंद्रवंशी की स्मृति में)। इस प्रयास में यदि आप भी शामिल होना चाहते हैं तो आपका तहे दिल से स्वागत है। आपके इस अल्प सहयोग से एक बच्चा शिक्षित होकर राष्ट्र की मुख्य धारा में शामिल तो होगा ही साथ ही देश के विकास में भागीदार भी बनेगा। तो आइए देश को शिक्षित बनाने में एक कदम हम भी बढ़ाएँ। सम्पर्क- माटी समाज सेवी संस्था, रायपुर (छ. ग.) 492 004, मोबा. 94255 24044, Email- drvermar@gmail.com

-0-

लेखकों सेः उदंती.com एक सामाजिक- सांस्कृतिक वेब पत्रिका है। पत्रिका में सम- सामयिक लेखों के साथ पर्यावरण, पर्यटन, लोक संस्कृति, ऐतिहासिक- सांस्कृतिक धरोहर से जुड़े लेखों और साहित्य की विभिन्न विधाओं जैसे कहानी, व्यंग्य, लघुकथाएँ, कविता, गीत, ग़ज़ल, यात्रा, संस्मरण आदि का भी समावेश किया गया है। आपकी मौलिक, अप्रकाशित रचनाओं का स्वागत है। रचनाएँ कृपया Email-udanti.com@gmail.com पर प्रेषित करें।

उदंती.com तकनीकि सहयोग - संजीव तिवारी

टैम्‍पलैट - आशीष