October 03, 2011

दर्द निवारक पेड़ चांदनी

चांदनी भारत में उगने वाला एक आम पेड़ है और इसमें जो दूध जैसा पदार्थ बनता है उसमें दर्द निवारक गुणों का पता चला है।
स्क्रिप्स रिसर्च इंस्टीट्यू, फ्लोरिडा के रसायनज्ञों के एक दल ने चांदनी के तने में से एक ऐसा रसायन प्राप्त किया है जो बढिय़ा दर्द निवारक है। इस रसायन को कोनोलिडीन नाम दिया गया है और इसकी विशेषता यह है कि इसके साइड इफेक्ट भी नहीं होते।
चांदनी भारत में उगने वाला एक आम पेड़ है और इसका वानस्पतिक नाम टेबर्नेमोन्टाना डाईवेरिकेटा है। इसमें जो दूध जैसा पदार्थ बनता है उसमें दर्द निवारक गुणों का पता तो बहुत पहले से था मगर सम्बंधित रसायन को निकालकर उसकी जांच कर पाना संभव नहीं हुआ था क्योंकि इस रसायन की बहुत ही कम मात्रा पेड़ में पाई जाती है। शोधकर्ता बताते हैं कि इसकी छाल में कोनोलिडीन मात्र 0.00014 प्रतिशत ही होता है। वैसे स्क्रिप्स इंस्टीट्यूट के शोधकर्ता ग्लेन मिकेलिजियो की रुचि इस पदार्थ के चिकित्सकीय गुणों में नहीं थी। उन्हें तो इसकी रासायनिक संरचना आकर्षित कर रही थी। मगर एक बार इसकी रासायनिक संरचना का खुलासा करके प्रयोगशाला में इसे बना लेने के बाद उन्होंने संस्थान की लौरा बॉन से इसके चिकित्सकीय असर की जांच करने का अनुरोध किया। बॉन के दल ने पाया कि कोनोलिडीन एक अच्छा दर्द निवारक है। यह भी पता चला कि दर्द निवारण की कोनोलिडीन की क्रियाविधि अन्य दर्द निवारकों से भिन्न है।
जहां मॉर्फीन जैसे नशीले दर्द निवारक मस्तिष्क की कुछ क्रियाओं को सुप्त करते हैं वहीं कोनोलिडीन किसी अन्य विधि से काम करता है। इसके चलते कोलोनिडीन का लंबे समय तक उपयोग करने से लत पडऩे की आशंका नहीं रहेगी। अब बॉन का दल यह पता करने का प्रयास कर रहा है कि कोनोलिडीन काम कैसे करता है। फिर क्लीनिकल ट्रायल की बारी आएगी।

0 Comments:

लेखकों से अनुरोध...

उदंती.com एक सामाजिक- सांस्कृतिक वेब पत्रिका है। पत्रिका में सम- सामयिक मुद्दों के साथ पर्यावरण को बचाने तथा पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए उठाए जाने वाले कदमों को प्राथमिकता से प्रकाशित किया जाता है। समाजिक जन जागरण के विभिन्न मुद्दों को शामिल करने के साथ ऐतिहासिक सांस्कृतिक धरोहर से जुड़े लेखों और साहित्य की विभिन्न विधाओं जैसे कहानी, कविता, गीत, गजल, व्यंग्य, निबंध, लघुकथाएं और संस्मरण आदि का भी समावेश किया गया है। उपर्युक्त सभी विषयों पर मौलिक अप्रकाशित रचनाओं का स्वागत है। आप अपनी रचनाएँ Email-udanti.com@gmail.comपर प्रेषित करें।

माटी समाज सेवी संस्था का अभिनव प्रयास
एक बच्चे की जिम्मेदारी आप भी लें...
माटी समाज सेवी संस्था, समाज के विभिन्न जागरुकता अभियान के क्षेत्र में काम करती रही है। पिछले वर्षों में संस्था ने समाज से जुड़े विभिन्न विषयों जैसे शिक्षा, स्वास्थ्य,पर्यावरण, प्रदूषण आदि क्षेत्रों में काम करते हुए जागरुकता लाने का प्रयास किया है। इसी कड़ी में गत कई वर्षों से यह संस्था बस्तर के जरुरतमंद बच्चों की शिक्षा के लिए धन एकत्रित करने का अभिनव प्रयास कर रही है।
बस्तर कोण्डागाँव जिले के कुम्हारपारा ग्राम में बरसों से कारीगर आदिवासियों के बीच काम रही “साथी समाज सेवी संस्था” द्वारा संचालित स्कूल “साथी राऊंड टेबल गुरूकुल” में ऐसे आदिवासी बच्चों को शिक्षा दी जाती है जिनके माता-पिता उन्हें पढ़ाने में असमर्थ होते हैं। प्रति वर्ष एक बच्चे की शिक्षा में लगभग चार हजार रुपए तक खर्च आता है। शिक्षा सबको मिले इस विचार से सहमत अनेक लोग पिछले कई सालों से माटी संस्था के माध्यम से “साथी राऊंड टेबल गुरूकुल” के बच्चों की शिक्षा की जिम्मेदारी लेते आ रहे हैं। पिछले कई वर्षों से माटी समाज सेवी संस्था उक्त स्कूल के लगभग 15 से 20 बच्चों के लिए शिक्षा शुल्क एकत्रित कर रही है। अनुदान देने वालों में शामिल हैं- प्रियंका-गगन सयाल, लंदन मैनचेस्टर, डॉ. प्रतिमा-अशोक चंद्राकर रायपुर, तरुण खिचरिया, दुर्ग (पत्नी श्रीमती कुमुदिनी खिचरिया की स्मृति में), श्री राजेश चंद्रवंशी (पिता श्री अनुज चंद्रवंशी की स्मृति में), क्षितिज चंद्रवंशी (पिता श्री राकेश चंद्रवंशी की स्मृति में)। अरुणा-नरेन्द्र तिवारी रायपुर, पी. एस. राठौर- अहमदाबाद। इस मुहिम में नए युवा सदस्य जुड़ें हैं- आयुश चंद्रवंशी रायपुर, जिन्होंने अपने पहले वेतन से एक बच्चे की शिक्षा की जिम्मेदारी उठायी है, जो स्वागतेय पहल है। इस प्रयास में यदि आप भी शामिल होना चाहते हैं तो आपका तहे दिल से स्वागत है। आपके इस अल्प सहयोग से एक बच्चा शिक्षित होकर राष्ट्र की मुख्य धारा में शामिल तो होगा ही साथ ही देश के विकास में भागीदार भी बनेगा। तो आइए देश को शिक्षित बनाने में एक कदम हम भी बढ़ाएँ। सम्पर्क- माटी समाज सेवी संस्था, पंडरी, रायपुर (छग) 492 004, मोबा.94255 24044, Email- drvermar@gmail.com

उदंती.com तकनीकि सहयोग - संजीव तिवारी

टैम्‍पलैट - आशीष