November 27, 2010

रिश्वत की पाठशाला

रिश्वत की पाठशाला
-डॉ. अशोक गौतम
आपका लाडला रिश्वत देकर छोटी- मोटी नौकरी पाने के बाद हीनता का शिकार हो। आज देश में माना तेजी से रिश्वत लेने का चलन बढ़ा है पर रिश्वत लेने के ये तरीके बिना पाठ्यक्रम के सुरक्षित नहीं।
हर बच्चे के पिता को ईमानदारी के साथ यह मानकर चलना चाहिए कि जैसे- तैसे उनका बच्चा डॉक्टर, इंजीनियर भले ही बन जाए लेकिन उसके बाद भी उसके हाथ में रिश्वत लेने का हुनर नहीं हो तो वह आगे परिवार की तो छोडि़ए अपने खर्चे भी पूरे नहीं कर सकता। नतीजा उसके सपने अधूरे रह जाते हैं और वह खुदकुशी की राह पर चल पड़ता है।
हमारे संस्थान ने इसी बात को ध्यान में रख समाज और देश हित में रिश्वत पर विशेष पाठ्यक्रम चलाए हैं ताकि आपका लाडला रिश्वत देकर छोटी- मोटी नौकरी पाने के बाद हीनता का शिकार न हो। आज देश में माना तेजी से रिश्वत लेने का चलन बढ़ा है पर रिश्वत लेने के ये तरीके बिना पाठ्यक्रम के सुरक्षित नहीं। तभी तो जो लोग बिना किसी पाठ्यक्रम के रिश्वत लेने का दुस्साहस कर देश को गौरवान्वित कर भी रहे हैं, देर सबेर पकड़े जा रहे हैं।
इन पाठ्यक्रमों को पूरा करने के बाद तय है कि आपका लाडला उच्च पद पर न रहकर भी रोज शान से वेतन से चार गुणा अधिक रिश्वत लेकर घर आए। हमारे संस्थान के दरवाजे पर कदम भर रखने के बाद ही एक विभाग में तृतीय श्रेणी पर रिश्वत देने के बाद लगे श्री रजत जी का कहना है कि, 'दो साल पहले मैंने नकल मार बोर्ड के आफिस वालों को खिला- पिला कर दसवीं पास की थी, लेकिन उसके बाद मैं किसी ऐसे पाठ्यक्रम की तलाश में था जिसके बल पर मैं अपने असीमित सपनों को पूरा कर सकंू। संस्थानों की सही जानकारी न होने की वजह से मैं दो साल घर में हाथ पर हाथ धरे सपने बुनता रहा। तभी मेरे पापा को मेरे एक खास दोस्त के पापा ने इस संस्थान के बारे में बताया। फिर क्या था, मेरे पापा ने जोड़ तोड़ कर मुझे रिश्वत का सर्टिफिकेट दिलवा दिया और सौभाग्य से इधर पाठ्यक्रम पूरा हुआ और उधर मेरा जुगाड़ भिड़ गया। अब रात को जो सपने देखता हूं अगले दिन बिना किसी डर के उन्हें साकार कर लेता हूं।'
अगर आप भी इसी श्रेणी में शामिल हैं, अगर आप भी चाहते हैं कि आपके पास आपके पद से चार गुना बड़ी कार हो, आपके पास आपके पद से चारगुना बड़ा फ्लैट हो तो आपके लिए हमारे संस्थान द्वारा चलाए जा रहे रिश्वत के विभिन्न पाठ्यक्रमों में से किया रिश्वत का कोई सा भी रोजगार संबंधी पाठ्यक्रम वरदान साबित हो सकता है। हमारा संस्थान देश का एकमात्र ऐसा संस्थान है जो पूरी तरह रिश्वत के विभिन्न पाठ्यक्रमों के लिए
ईमानदारी से समर्पित है। इसके पास पढ़ाने के लिए देश के चुनिंदा अनुभवी रिश्वतखोरों का परिष्कृत स्टाफ है। रिश्वत के क्षेत्र में उनकी अपनी- अपनी दक्षताएं हैं।
यदि आप अपने पद का सदुपयोग कर अथाह धन कमाना और समृद्धि पाना चाहते हैं तो हम आपको दावे के साथ कह सकते हैं कि हमारे संस्थान से किए गए रिश्वत डिप्लोमा से बढ़कर कोई और विकल्प आपके पास नहीं। इसके बारे में हमारी करिअर काउंसलर का कहना है कि 'मेरा तो मानना है कि रिश्वत का पाठ्यक्रम सभी के लिए बहुत आवश्यक है। पढ़े- लिखे तो पढ़े- लिखे अनपढ़ को भी टांगें पसारे सपने देखने का पूरा हक है। रिश्वत लेने का व्यावहारिक ज्ञान न होने की वजह से अनपढ़ तक देश के ऊंचे ओहदों पर काबिज तो हो जाते हैं पर जब मूंछों पर ताव दे रिश्वत लेते हैं तो यों ले बैठते हैं जैसे बाजार में आलू ले रहे हों और नतीजा, दूसरे दिन अखबारों की सुर्खियां बन जाते हैं। असल में ऐसे लोगों को रिश्वत के संबंध में कोई व्यावहारिक शिक्षा या अनुभव नहीं होता।'
यही वजह है कि हमने देश की राजनीति, सरकारी, गैर सरकारी विभागों, उपक्रमों, प्राइवेट क्षेत्र के नौकरी करने वालों के सपनों को ध्यान में रख रिश्वत में कई तरह के लांग टर्म, शार्ट टर्म पाठ्यक्रम इस साल से चलाए जा रहे हैं। हमारे संस्थान से इन सर्टिफिकेट, डिप्लोमा पाठ्यक्रमों को पूरा करने के बाद हम दावे से कह सकते हैं कि कम वेतन पाने वाला भी मजे से अपने सपने पूरे कर सकता है।
जो लोग नौकरी में हैं उनके लिए संस्थान ने पत्राचार कार्यक्रम चलाया है ताकि वे भी इस पाठ्यक्रम के लाभ से वंचित न रहें और देश के विकास में अपने दोनों हाथ सगर्व बंटा सकें। आपको याद दिला दें कि इस पाठ्यक्रम को करने के लिए विभागीय अनुमति की कतई आवश्यकता नहीं। हमारे संस्थान से करवाया जाने वाला रिश्वत का हर पाठ्यक्रम हर सरकार से प्रमाणित है। याद रखिए, रिश्वत लेना भ्रष्टाचार नहीं, लोक व्यवहार है। लोक व्यवहार अपने युग का धर्म होता है। अत: रिश्वत लेने की कला हमसे सीख रिश्वत लीजिए और अपने युग के धर्म का सगर्व पालन कीजिए।
परिचय:
24 जून 1961 को हिमाचल प्रदेश के सोलन जिला की तहसील कसौली के गांव में जन्में डॉ अशोक गौतम ने हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय शिमला से भाषा संकाय में पीएचडी की उपाधि प्राप्त की है। वे देश के प्रतिष्ठित दैनिक समाचार, पत्र-पत्रिकाओं और वेब-पत्रिकाओं में निरंतर लिख रहे हैं।
उनका पता है-
गौतम निवास,
अप्पर सेरी रोड,
नजदीक मेन वाटर टैंक,
सोलन-173212 हिमाचल प्रदेश
मोबाइल- 9418070089
ईमेल- a_gautamindia@rediffmail.com

0 Comments:

एक बच्चे की जिम्मेदारी आप भी लें

अभिनव प्रयास- माटी समाज सेवी संस्था, जागरुकता अभियान के क्षेत्र में काम करती रही है। इसी कड़ी में गत कई वर्षों से यह संस्था बस्तर के जरुरतमंद बच्चों की शिक्षा के लिए धन एकत्रित करने का अभिनव प्रयास कर रही है। बस्तर कोण्डागाँव जिले के कुम्हारपारा ग्राम में बरसों से आदिवासियों के बीच काम रही 'साथी समाज सेवी संस्था' द्वारा संचालित स्कूल 'साथी राऊंड टेबल गुरूकुल' में ऐसे आदिवासी बच्चों को शिक्षा दी जाती है जिनके माता-पिता उन्हें पढ़ाने में असमर्थ होते हैं। इस स्कूल में पढऩे वाले बच्चों को आधुनिक तकनीकी शिक्षा के साथ-साथ परंपरागत कारीगरी की नि:शुल्क शिक्षा भी दी जाती है। प्रति वर्ष एक बच्चे की शिक्षा में लगभग चार हजार रुपये तक खर्च आता है। शिक्षा सबको मिले इस विचार से सहमत अनेक जागरुक सदस्य पिछले कई सालों से माटी समाज सेवी संस्था के माध्यम से 'साथी राऊंड टेबल गुरूकुल' के बच्चों की शिक्षा की जिम्मेदारी लेते आ रहे हैं। प्रसन्नता की बात है कि नये साल से एक और सदस्य हमारे परिवार में शामिल हो गए हैं- रामेश्वर काम्बोज 'हिमांशु' नई दिल्ली, नोएडा से। पिछले कई वर्षों से अनुदान देने वाले अन्य सदस्यों के नाम हैं- प्रियंका-गगन सयाल, मेनचेस्टर (यू.के.), डॉ. प्रतिमा-अशोक चंद्राकर रायपुर, सुमन-शिवकुमार परगनिहा, रायपुर, अरुणा-नरेन्द्र तिवारी रायपुर, डॉ. रत्ना वर्मा रायपुर, राजेश चंद्रवंशी, रायपुर (पिता श्री अनुज चंद्रवंशी की स्मृति में), क्षितिज चंद्रवंशी, बैंगलोर (पिता श्री राकेश चंद्रवंशी की स्मृति में)। इस प्रयास में यदि आप भी शामिल होना चाहते हैं तो आपका तहे दिल से स्वागत है। आपके इस अल्प सहयोग से एक बच्चा शिक्षित होकर राष्ट्र की मुख्य धारा में शामिल तो होगा ही साथ ही देश के विकास में भागीदार भी बनेगा। तो आइए देश को शिक्षित बनाने में एक कदम हम भी बढ़ाएँ। सम्पर्क- माटी समाज सेवी संस्था, रायपुर (छ. ग.) 492 004, मोबा. 94255 24044, Email- drvermar@gmail.com

-0-

लेखकों सेः उदंती.com एक सामाजिक- सांस्कृतिक वेब पत्रिका है। पत्रिका में सम- सामयिक लेखों के साथ पर्यावरण, पर्यटन, लोक संस्कृति, ऐतिहासिक- सांस्कृतिक धरोहर से जुड़े लेखों और साहित्य की विभिन्न विधाओं जैसे कहानी, व्यंग्य, लघुकथाएँ, कविता, गीत, ग़ज़ल, यात्रा, संस्मरण आदि का भी समावेश किया गया है। आपकी मौलिक, अप्रकाशित रचनाओं का स्वागत है। रचनाएँ कृपया Email-udanti.com@gmail.com पर प्रेषित करें।

उदंती.com तकनीकि सहयोग - संजीव तिवारी

टैम्‍पलैट - आशीष